क्या है राइस पुलर घोटाला, जादुई धातु की चमक? दिल्ली पुलिस ने जयपुर से ऐसे करोड़ों का खेला करने वाले को पकड़ा
क्या है राइस पुलर घोटाला, जादुई धातु की चमक? दिल्ली पुलिस ने जयपुर से ऐसे करोड़ों का खेला करने वाले को पकड़ा Edited by: खुशेंद्र तिवारी|भाषा• दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने जयपुर से 'राइस पुलर' घोटाले के आरोपी पूर्व सरकारी…

सौजन्य से:- Navbharat Times
क्या है राइस पुलर घोटाला, जादुई धातु की चमक? दिल्ली पुलिस ने जयपुर से ऐसे करोड़ों का खेला करने वाले को पकड़ा
Edited by: खुशेंद्र तिवारी|भाषा•
दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने जयपुर से 'राइस पुलर' घोटाले के आरोपी पूर्व सरकारी कर्मचारी सत्यनारायण अनोरिया को गिरफ्तार किया है, जिसने रेडियोएक्टिव मैजिकल मेटल या राइस पुलर धातु को जानकार बता ठगी की थी। आरोपी को दिल्ली पुलिस ने जयपुर से गिरफ्तार किया है।
2020 में दर्ज हुआ था मामला
ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा कि आरोपी सत्यनारायण अनोरिया (53) को अप्रैल 2020 में दर्ज एक मामले के सिलसिले में राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 2014 में अनोरिया नाम के शख्स और उसके सहयोगियों ने उनसे संपर्क कर दावा किया था कि उन्हें तथाकथित 'राइस पुलर' और रेडियोधर्मी दर्पण समेत दुर्लभ और प्राचीन कलाकृतियों के बारे में विशेषज्ञता हासिल है। रेडियोएक्टिव जादुई धातु के जानकार हैं।खुद को वैज्ञानिक बता लोगों को फंसाया
बयान में कहा गया है कि आरोपियों ने खुद को भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ के रूप में कथित तौर पर प्रस्तुत किया। साथ ही यह दावा किया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और पुरातत्व प्रयोगशालाओं जैसे संगठनों के वैज्ञानिक ही इन वस्तुओं की प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकते हैं।11 करोड़ रुपये प्रति इंच बताई कीमत
इसमें कहा गया, 'शिकायतकर्ता को समझाने के लिए, आरोपियों ने दावा किया कि इन कलाकृतियों में असाधारण वैज्ञानिक गुण हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत लगभग 11 करोड़ रुपये प्रति इंच है, तथा भविष्य के लेन-देन में भारी मुनाफे का वादा किया।'जयपुर से अनोरिया को किया गिरफ्तार
पुलिस ने कहा कि इसके बाद शिकायतकर्ता को परीक्षण शुल्क, प्रमाणन शुल्क और अन्य खर्चों के नाम पर बड़ी रकम देने के लिए राजी किया गया। समय के साथ, उसने अलग अलग तरीके से लगभग नौ करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए। बयान में कहा गया, 'हालांकि, कोई वास्तविक परीक्षण नहीं किया गया और कोई प्राचीन वस्तुएं वितरित नहीं की गईं।' पुलिस ने कहा कि ईओडब्ल्यू की एक टीम ने लगातार प्रयासों के बाद जयपुर में अनोरिया का पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।जयपुर नगर निगम में था पहले कार्यरत
जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि अनोरिया पहले जयपुर नगर निगम में कार्यरत था, लेकिन इसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी के छह मामलों में कथित रूप से संलिप्त पाए जाने के बाद 2018 में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। वह वर्तमान में एक मंदिर में पुजारी के रूप में काम कर रहा है। पुलिस ने कहा कि कथित धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए प्रयास जारी हैं।क्या है राइस पुलर घोटाला
कम पढ़े-लिखे या कहिए जादू पर झट से भरोसा करने वाले लोग ऐसे गिरोह के झांसे में आ जाते हैं। ये ऐसा मायाजाल बुनते हैं कि यह जादुई मेटल स्पेस में जाने वाले अंतरिक्षयान का सबसे महंगा पार्ट है। प्रूफ के नाम पर वे कहते हैं कि यह मेटल चावल को अपनी ओर खींचता है। लिहाजा 'Rice-Puller' घोटाले के नाम से यह कई साल से चर्चा में रहा है। राजस्थान, एमपी के कई शहरों से ऐसे ठग पकड़े गए जो मैग्नेटिक पावर का 'खेला' दिखाकर लोगों को रेडियोएक्टिव पदार्थ का झांसा दे देते हैं। दिल्ली में भी पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। लोग अब तक लाखों से लेकर करोड़ों रुपये इस तरह के गैंग की फर्जी चीजों के चक्कर में गंवा चुके हैं। ऐसे एक नहीं, कई ठग पैदा हो गए हैं जो न केवल छोटे कारोबारी या किसानों को फंसाते हैं बल्कि बड़े बिजनसमैन भी स्कैम में फंस जाते हैं। आरबीआई भी ऐससे फ्रॉड से बचने की सलाह देता रहता है।कन्वर्सेशन शुरू करें
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