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कोटा में मगरमच्छों की बढ़ती संख्या:

कोटा में अब मगरमच्छों का डेरा है, जो हर साल करीब 300 मगरमच्छों का रेस्क्यू कराने के बावजूद बढ़ रहे हैं। वन विभाग की टीम ने हाल ही में तीन मगरमच्छों का रेस्क्यू किया है, जिन्हें चंबल नदी में छोड़ा गया है। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है, क्योंकि मगरमच्छ कभी भी किसी भी वाटर बॉडी के रास्ते आबादी में पहुंच सकते हैं।

ETV Bharat के अनुसार30 जुलाई 2026 को 04:43 am बजे
कोटा में मगरमच्छों की बढ़ती संख्या:

सौजन्य से:- ETV Bharat

कोटा में मगरमच्छों का डेरा : रात को तीन क्रोकोडाइल आबादी में घुसे, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

कोटा जिले की कोई भी वॉटर बॉडी अब मगरमच्छों से अछूती नहीं है. खाली प्लाटों में भी पानी जमा होने पर मगरमच्छ पहुंच जाते हैं.

Published : July 30, 2026 at 8:53 AM IST

कोटा: शहर में बारिश के मौसम में मगरमच्छों का आबादी क्षेत्रों में प्रवेश करना अब आम बात हो गई है. बुधवार रात को एक साथ तीन मगरमच्छ अलग-अलग इलाकों में घुस गए, जिससे वहां दहशत फैल गई. वन विभाग की टीम ने मात्र दो घंटे में तीनों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें चंबल नदी में रिलीज कर दिया. इनमें 8 फीट, 5 फीट और 4.5 फीट लंबे मगरमच्छ शामिल थे. कोटा जिले में मगरमच्छों की संख्या अब हजारों में पहुंच गई है. चंबल नदी, नहरें, तालाब और यहां तक कि खाली प्लाट भी इनके लिए आश्रय स्थल बन गए हैं. हर साल करीब 300 मगरमच्छों का रेस्क्यू किया जाता है, फिर भी इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही. लोगों में डर का माहौल है, क्योंकि यह मगरमच्छ कभी भी किसी भी वाटर बॉडी के रास्ते आबादी में पहुंच सकते हैं.

वन विभाग के तकनीकी सहायक वीरेंद्र सिंह हाडा ने बताया कि बोरखेड़ा थाने से सूचना मिली कि अंजलि विहार कॉलोनी में 8 फीट लंबा मगरमच्छ घूम रहा है. सूचना मिलते ही रात दस बजे टीम मौके पर पहुंची और बड़ी मुश्किल से क्रोकोडाइल को काबू में किया. इस दौरान बोरखेड़ा थाना पुलिस ने भी मदद की. मगरमच्छ को वाहन में रखा ही था कि बूंदी रोड पर केशोरायपाटन जाने वाली नहर के पास एक फार्म हाउस में मगरमच्छ होने की सूचना मिली. टीम तुरंत वहां पहुंची, जहां करीब 5 फीट लंबा व 40 किलो वजनी मगरमच्छ था, जिसे रेस्क्यू किया गया. इसी दौरान बालिता गांव से भी सूचना मिली, जहां 4.5 फीट लंबे क्रोकोडाइल को पकड़ा गया. तीनों को रात करीब 12:30 बजे चंबल नदी में छोड़ा गया.

वीरेंद्र ने बताया कि अंजलि विहार और बालिता में घनी आबादी के बीच मगरमच्छ होने के कारण स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल था. उन्होंने तीनों का मुंह और हाथ-पैर बांधकर डंडे, जूट की बोरी और रस्सी की सहायता से रेस्क्यू किया.

हजारों की है तादाद: कोटा के उपवन संरक्षक अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल नदी मगरमच्छों के लिए अत्यंत अनुकूल है, जिसके चलते यहां इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. चंबल के साथ-साथ मगरमच्छ नहरों, तालाबों और अन्य नदियों में भी पहुंच गए हैं. अनुकूल वातावरण, पर्याप्त भोजन और कम मानवीय दखल के कारण इनकी संख्या दोगुनी से अधिक हो रही है. हालांकि, सटीक संख्या गिनना मुश्किल है, लेकिन अब कोटा जिले में इनकी संख्या हजारों में हो गई है.

200 किलो तक वजनी है मगरमच्छ : कोटा जिले में हर साल करीब 300 मगरमच्छ रेस्क्यू किए जाते हैं. जिले की लगभग कोई भी वाटर बॉडी अब मगरमच्छों से अछूती नहीं है. यहां तक कि खाली पड़े प्लाटों में भी पानी जमा होने पर मगरमच्छ पहुंच जाते हैं. इनमें 2 फीट से लेकर 15 से 18 फीट तक लंबे और 200 किलो तक वजनी मगरमच्छ शामिल हैं. कोटा की चंद्रलोई नदी में अकेले 200 से अधिक मगरमच्छ हैं, इसके अलावा तालाबों में भी बड़ी संख्या में मगरमच्छ मौजूद हैं.

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