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राजस्थान: किस नेता के गढ़ में किसका चला सिक्का? अजमेर से झालावाड़ तक निकाय चुनाव ने बदले सियासी संकेत

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Amar Ujala के अनुसार21 सितंबर 2026 को 03:05 pm बजे
राजस्थान: किस नेता के गढ़ में किसका चला सिक्का? अजमेर से झालावाड़ तक निकाय चुनाव ने बदले सियासी संकेत

सौजन्य से:- Amar Ujala

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राजस्थान: किस नेता के गढ़ में किसका चला सिक्का? अजमेर से झालावाड़ तक निकाय चुनाव ने बदले सियासी संकेत

Mon, 21 Sep 2026 07:40 PM IST

हिमांशु सिंह बघेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

Published by: हिमांशु सिंह बघेल

Updated Mon, 21 Sep 2026 07:40 PM IST

सार

राजस्थान निकाय चुनाव के मेयर और सभापति-अध्यक्ष के नतीजों में कई नेताओं के राजनीतिक क्षेत्रों में अलग-अलग तस्वीर सामने आई। अजमेर और पाली में कांग्रेस वार्डों में आगे रही, लेकिन मेयर की कुर्सी भाजपा के खाते में गई, जबकि बीकानेर और झालावाड़ में वार्डों की बढ़त शीर्ष पद तक पहुंची।

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विस्तार

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सोमवार को मेयर और सभापति-अध्यक्ष के चुनाव के बाद तस्वीर सिर्फ नगर निकायों की सत्ता तक सीमित नहीं रही। कई ऐसे इलाके सामने आए, जिन्हें किसी बड़े नेता की राजनीतिक जमीन माना जाता है। कहीं नेता के प्रभाव वाले क्षेत्र में उनकी पार्टी को बढ़त मिली, तो कहीं वार्डों के नतीजों ने अलग कहानी लिखी। सबसे अहम बात यह रही कि कुछ जगह वार्डों में बढ़त और शीर्ष पद की सत्ता के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया।

अजमेर: देवनानी-भागीरथ चौधरी के इलाके में कांग्रेस की बढ़त, मेयर भाजपा का

अजमेर में भाजपा के प्रमुख चेहरों में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और भाजपा नेता अनिता भदेल शामिल हैं। विधानसभा चुनाव में जिले की आठ में से सात सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। निकाय चुनाव में भी कांग्रेस ने वार्ड स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत रखी। नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37, भाजपा ने 32 और निर्दलीयों ने 11 सीटें जीतीं। लेकिन मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। यानी कांग्रेस छह वार्ड ज्यादा जीतने के बावजूद मेयर की कुर्सी नहीं ले सकी।

पाली: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के क्षेत्र में कांग्रेस सबसे बड़ी, लेकिन मेयर भाजपा का

पाली भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र है। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी भी यहां भाजपा की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं। इसके बावजूद पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 वार्डों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही। भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। इसके बाद भी भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर चुनी गईं। पाली का नतीजा इसलिए खास है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के राजनीतिक क्षेत्र में कांग्रेस ने वार्डों में बढ़त बनाई, लेकिन बोर्ड की शीर्ष कुर्सी भाजपा के पास रही।

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बीकानेर: अर्जुनराम मेघवाल के गढ़ में कांग्रेस का मेयर, 12 साल बाद बदली शहरी सत्ता

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा की राजनीतिक जमीन माने जाने वाले बीकानेर में कांग्रेस ने निकाय चुनाव में स्पष्ट बढ़त हासिल की। 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। भाजपा को 27 और निर्दलीयों को 10 सीटें मिलीं, जबकि एक सीट आरएलपी के खाते में गई। इसके बाद कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए। वे पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे हैं। यहां वार्डों का जनादेश सीधे नगर निगम की सत्ता में बदल गया। यहां 12 साल बाद कांग्रेस शहरी सत्ता में आई है।

अलवर में जूली-भंवर जितेंद्र बनाम भूपेंद्र-संजय का मुकाबला, भाजपा जीती

अलवर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह का भी यहां मजबूत राजनीतिक जुड़ाव है। हालांकि भाजपा के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और कैबिनेट मंत्री संजय शर्मा भी अलवर से ही आते हैं। जूली ने अपनी विधानसभा मालाखेड़ा में कांग्रेस का बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है। नगर निगम के परिणाम में भाजपा को 28, कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 13 सीटें मिलीं। किसी दल को बहुमत नहीं मिला, लेकिन मेयर पद भाजपा की सुमनलता अग्रवाल के खाते में गया।

भरतपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले में निर्दलीयों की ताकत

भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है। यहां 65 वार्डों में 36 निर्दलीय, 20 भाजपा और सात कांग्रेस पार्षद चुने गए। संख्या के लिहाज से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह रहे, लेकिन मेयर चुनाव में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध चुनी गईं। हालांकि इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। सरकार के मंत्री से लेकर कई बड़े नेता यहां निर्दलियों को साधने में लगे रहे।

झालावाड़: वसुंधरा राजे के क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत वापसी

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रमुख राजनीतिक आधार वाले झालावाड़ में इस बार निकाय चुनाव ने स्थानीय स्तर पर अलग संकेत दिया। नगर परिषद के 43 वार्डों में कांग्रेस ने 29 और भाजपा ने 13 सीटें जीतीं। कांग्रेस के राजेश गुर्जर सभापति चुने गए।

ये भी पढ़ें- राजस्थान निकाय चुनाव: वार्डों के बाद मेयर-अध्यक्ष के नतीजों से तस्वीर साफ, भाजपा के 197 अध्यक्ष निर्वाचित

सवाई माधोपुर: किरोड़ीलाल मीणा के इलाके में भाजपा का दबदबा

सवाई माधोपुर को भाजपा के वरिष्ठ नेता किरोड़ीलाल मीणा के प्रमुख राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां भाजपा ने 60 में से 33 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 18 और निर्दलीयों को नौ सीटें मिलीं। इसके बाद भाजपा की मेवा चौधरी सभापति चुनी गईं।

उदयपुर: भाजपा का मजबूत संगठन, पारस सिंघवी बने मेयर

उदयपुर में भाजपा ने 53 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 25 और निर्दलीयों को चार सीटें मिलीं। भाजपा के पारस सिंघवी को मेयर चुनाव में 55 वोट मिले और कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर को 25 वोट। यहां भाजपा की वार्डों में स्पष्ट बढ़त मेयर की कुर्सी में भी बदल गई।

डोटासरा के गढ़ सीकर में कांग्रेस मजबूत, लक्ष्मणगढ़ में भी बहुमत तक पहुंची

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के राजनीतिक गढ़ सीकर में नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने कुल मिलाकर मजबूत प्रदर्शन किया है। जिले के 13 निकायों के परिणाम देखें तो कांग्रेस ने कई प्रमुख निकायों में बढ़त बनाई, जबकि भाजपा भी कुछ जगह अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रही। सबसे अहम नतीजा लक्ष्मणगढ़ का रहा, जो गोविंद सिंह डोटासरा की विधानसभा सीट है। यहां 45 वार्डों में कांग्रेस ने 23 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। भाजपा को 12 और निर्दलीयों को 10 सीटें मिलीं। यानी कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए किसी दूसरे दल या निर्दलीय पार्षद के समर्थन की जरूरत नहीं रही। सीकर नगर परिषद में भी कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 41 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 24 सीटों पर सफलता मिली। इससे सीकर शहर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला।

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अजमेर: देवनानी-भागीरथ चौधरी के इलाके में कांग्रेस की बढ़त, मेयर भाजपा का

अजमेर में भाजपा के प्रमुख चेहरों में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और भाजपा नेता अनिता भदेल शामिल हैं। विधानसभा चुनाव में जिले की आठ में से सात सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। निकाय चुनाव में भी कांग्रेस ने वार्ड स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत रखी। नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37, भाजपा ने 32 और निर्दलीयों ने 11 सीटें जीतीं। लेकिन मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। यानी कांग्रेस छह वार्ड ज्यादा जीतने के बावजूद मेयर की कुर्सी नहीं ले सकी।

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पाली: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के क्षेत्र में कांग्रेस सबसे बड़ी, लेकिन मेयर भाजपा का

पाली भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र है। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी भी यहां भाजपा की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं। इसके बावजूद पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 वार्डों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही। भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। इसके बाद भी भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर चुनी गईं। पाली का नतीजा इसलिए खास है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के राजनीतिक क्षेत्र में कांग्रेस ने वार्डों में बढ़त बनाई, लेकिन बोर्ड की शीर्ष कुर्सी भाजपा के पास रही।

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बीकानेर: अर्जुनराम मेघवाल के गढ़ में कांग्रेस का मेयर, 12 साल बाद बदली शहरी सत्ता

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा की राजनीतिक जमीन माने जाने वाले बीकानेर में कांग्रेस ने निकाय चुनाव में स्पष्ट बढ़त हासिल की। 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। भाजपा को 27 और निर्दलीयों को 10 सीटें मिलीं, जबकि एक सीट आरएलपी के खाते में गई। इसके बाद कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए। वे पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे हैं। यहां वार्डों का जनादेश सीधे नगर निगम की सत्ता में बदल गया। यहां 12 साल बाद कांग्रेस शहरी सत्ता में आई है।

अलवर में जूली-भंवर जितेंद्र बनाम भूपेंद्र-संजय का मुकाबला, भाजपा जीती

अलवर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह का भी यहां मजबूत राजनीतिक जुड़ाव है। हालांकि भाजपा के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और कैबिनेट मंत्री संजय शर्मा भी अलवर से ही आते हैं। जूली ने अपनी विधानसभा मालाखेड़ा में कांग्रेस का बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है। नगर निगम के परिणाम में भाजपा को 28, कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 13 सीटें मिलीं। किसी दल को बहुमत नहीं मिला, लेकिन मेयर पद भाजपा की सुमनलता अग्रवाल के खाते में गया।

भरतपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले में निर्दलीयों की ताकत

भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है। यहां 65 वार्डों में 36 निर्दलीय, 20 भाजपा और सात कांग्रेस पार्षद चुने गए। संख्या के लिहाज से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह रहे, लेकिन मेयर चुनाव में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध चुनी गईं। हालांकि इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। सरकार के मंत्री से लेकर कई बड़े नेता यहां निर्दलियों को साधने में लगे रहे।

झालावाड़: वसुंधरा राजे के क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत वापसी

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रमुख राजनीतिक आधार वाले झालावाड़ में इस बार निकाय चुनाव ने स्थानीय स्तर पर अलग संकेत दिया। नगर परिषद के 43 वार्डों में कांग्रेस ने 29 और भाजपा ने 13 सीटें जीतीं। कांग्रेस के राजेश गुर्जर सभापति चुने गए।

ये भी पढ़ें- राजस्थान निकाय चुनाव: वार्डों के बाद मेयर-अध्यक्ष के नतीजों से तस्वीर साफ, भाजपा के 197 अध्यक्ष निर्वाचित

सवाई माधोपुर: किरोड़ीलाल मीणा के इलाके में भाजपा का दबदबा

सवाई माधोपुर को भाजपा के वरिष्ठ नेता किरोड़ीलाल मीणा के प्रमुख राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां भाजपा ने 60 में से 33 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 18 और निर्दलीयों को नौ सीटें मिलीं। इसके बाद भाजपा की मेवा चौधरी सभापति चुनी गईं।

उदयपुर: भाजपा का मजबूत संगठन, पारस सिंघवी बने मेयर

उदयपुर में भाजपा ने 53 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 25 और निर्दलीयों को चार सीटें मिलीं। भाजपा के पारस सिंघवी को मेयर चुनाव में 55 वोट मिले और कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर को 25 वोट। यहां भाजपा की वार्डों में स्पष्ट बढ़त मेयर की कुर्सी में भी बदल गई।

डोटासरा के गढ़ सीकर में कांग्रेस मजबूत, लक्ष्मणगढ़ में भी बहुमत तक पहुंची

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के राजनीतिक गढ़ सीकर में नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने कुल मिलाकर मजबूत प्रदर्शन किया है। जिले के 13 निकायों के परिणाम देखें तो कांग्रेस ने कई प्रमुख निकायों में बढ़त बनाई, जबकि भाजपा भी कुछ जगह अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रही। सबसे अहम नतीजा लक्ष्मणगढ़ का रहा, जो गोविंद सिंह डोटासरा की विधानसभा सीट है। यहां 45 वार्डों में कांग्रेस ने 23 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। भाजपा को 12 और निर्दलीयों को 10 सीटें मिलीं। यानी कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए किसी दूसरे दल या निर्दलीय पार्षद के समर्थन की जरूरत नहीं रही। सीकर नगर परिषद में भी कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 41 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 24 सीटों पर सफलता मिली। इससे सीकर शहर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला।

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