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कचरा समझकर जिसे फेंक दिया, वो निकला खजाना! राजस्थान के मार्बल वेस्ट में मिले दुर्लभ खनिज, पूरे प्रदेश में खोज शुरू

राजस्थान में जिसे 'कचरा' समझकर सालों से फेंका जा रहा था, वह असल में कुबेर का खजाना निकला। मार्बल वेस्ट डंप्स की जांच में निकल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे बेहद दुर्लभ खनिज मिले हैं। खास बात यह है कि इस मलबे में खनिज…

Navbharat Times के अनुसार11 जून 2026 को 09:05 am बजे
कचरा समझकर जिसे फेंक दिया, वो निकला खजाना! राजस्थान के मार्बल वेस्ट में मिले दुर्लभ खनिज, पूरे प्रदेश में खोज शुरू

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान में जिसे 'कचरा' समझकर सालों से फेंका जा रहा था, वह असल में कुबेर का खजाना निकला। मार्बल वेस्ट डंप्स की जांच में निकल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे बेहद दुर्लभ खनिज मिले हैं। खास बात यह है कि इस मलबे में खनिजों की मात्रा धरती की सतह से 40 गुना ज्यादा है।

जयपुर: राजस्थान की मरुधरा अपनी कोख में छिपे अनमोल खनिजों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन अब एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिसर्च ने प्रदेश के माइनिंग सेक्टर में खलबली मचा दी है। राज्य में जिन मार्बल वेस्ट डंप्स (संगमरमर के कचरे के ढेरों) को अब तक बिल्कुल बेकार और पर्यावरण के लिए आफत माना जा रहा था, वे असल में बेशकीमती खनिजों की खान निकले हैं। एक नए अध्ययन में इन कचरों के ढेरों के भीतर निकल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे अत्यंत दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों की मौजूदगी पाई गई है।

इस अविश्वसनीय खोज के सामने आते ही राजस्थान सरकार ने तुरंत बड़ा कदम उठाया है और प्रदेश के कई जिलों में फैले माइनिंग कचरे के मूल्यांकन का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।

पायलट प्रोजेक्ट में हुआ बड़ा खुलासा

यह अभूतपूर्व कामयाबी खान विभाग, राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट और IIT (ISM) धनबाद के एक संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट के जरिए मिली है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद यह पता लगाना था कि खानों से निकलने वाले अनुपयोगी मलबे और कचरे में क्या व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं। शुरुआती चरण में विभाग ने पूरे प्रदेश में 78 मिनरल डंप्स की पहचान कर उन्हें क्लस्टर्स में बांटा। विस्तृत अध्ययन के लिए सबसे पहले उदयपुर और उसके आसपास के इलाके से 8 पिंक मार्बल और 2 ग्रीन मार्बल के डंप्स को चुना गया।

वैज्ञानिक भी अपनी आंखें मलने पर मजबूर!

जब इन डंप्स से लिए गए सैंपल्स की लैब में जांच की गई, तो वैज्ञानिक भी अपनी आंखें मलने पर मजबूर हो गए। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इन कचरों के ढेरों में इन दुर्लभ खनिजों की सांद्रता पृथ्वी की सामान्य परत में पाए जाने वाले औसत की तुलना में 25 से 40 गुना अधिक है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से इन्हें बाहर निकालना कितना व्यवहार्य होगा, इसके लिए अभी और अध्ययन किए जा रहे हैं।

अब इन 15 क्षेत्रों के 'कचरे' की होगी सघन जांच

उदयपुर क्लस्टर में मिली इस बड़ी सफलता के बाद, बाकी बचे 68 डंप्स और कचरों की भी जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग, सैंपलिंग और मिनरलॉजिकल एनालिसिस शुरू कर दी गई है। इसके तहत आने वाले दिनों में टंगस्टन, लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे भविष्य के ईंधनों की खोज की जाएगी। यह महा-सर्वे मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में फैला हुआ है।

उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर

ऋषभदेव, अजमेर, ब्यावर, सावर और नागौर

सिरोही, जोधपुर, बालेसर, सोजत सिटी और जालोर

' नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन ' को लगेंगे पंख

अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार की यह अनूठी पहल केंद्र सरकार के 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' के विजन से पूरी तरह मेल खाती है, जिसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज संसाधनों की खोज को बढ़ावा देना है। आज के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक युग में मोबाइल चिप्स, ईवी बैटरी और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए इन खनिजों की पूरी दुनिया में भारी मांग है। अगर वेस्ट डंप्स से इन्हें निकालने की तकनीक सफल रहती है, तो यह न केवल पर्यावरण को साफ रखने का एक क्रांतिकारी रास्ता बनेगी, बल्कि राजस्थान को समृद्धि की एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

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विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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