भारतीय भारोत्तोलन को डोपिंग मुद्दों के कारण राष्ट्रमंडल खेलों में कोटा घटाना किया गया है।
भारोत्तोलक दिलबाग सिंह चोटिल होने के बाद टीम से बाहर हो गए हैं। डोपिंग मामलों का असर पिछले वर्षों में सामने आए मामलों के चलते हुआ है। सूत्र: हिन्दुस्तान।

सौजन्य से:- Hindustan
राष्ट्रमंडल खेल....भारत का भारोत्तोलन कोटा घटा, दिलबाग बाहर
भारतीय भारोत्तोलन को डोपिंग उल्लंघनों के कारण पुनः कीमत चुकानी पड़ी है। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारत का कोटा 16 से घटकर 11 हो गया है, जिससे चोटिल खिलाड़ी दिलबाग सिंह को टीम से बाहर होना पड़ा। इस मुद्दے का असर पिछले वर्षों में सामने आए डोपिंग मामलों के चलते हुआ है।
डोपिंग का डंक ग्लास्गो, एजेंसी। भारतीय भारोत्तोलन को एक बार फिर डोपिंग के डंक की कीमत चुकानी पड़ी है। राष्ट्रमंडल खेलों से ठीक पहले कई डोपिंग उल्लंघनों (एडीआरवी) के कारण भारत का कोटा 16 से घटाकर 11 कर दिया गया है। इसका सीधा असर टीम चयन पर पड़ा और चोटिल भारोत्तोलक दिलबाग सिंह को अंतिम दल से बाहर होना पड़ा।
भारतीय भारोत्तोलन महासंघ की कार्रवाई
भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफआई) ने पहले ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू की अगुआई में 12 सदस्यीय टीम घोषित की थी। हालांकि महासंघ को बुधवार को ही यह सूचना मिली कि भारत को केवल 11 भारोत्तोलकों का कोटा मिलेगा। महासंघ के एक सूत्र ने बताया, कोटा घटने की जानकारी हमें बुधवार को ही मिली। दिलबाग पीठ की चोट से जूझ रहे हैं और बर्मिंघम में लगे तैयारी शिविर के दौरान उन्होंने अभ्यास भी नहीं किया था। ऐसे में उन्हें टीम से हटाने का फैसला लिया गया।
डोपिंग मामलों का प्रभाव
भारत के खिलाफ यह कार्रवाई क्वालिफिकेशन अवधि के दौरान हुए कई डोपिंग मामलों के कारण हुई। पुरुष वर्ग में एन अजित (71 किग्रा), साईराज परदेशी (88 किग्रा) और हरचरण सिंह (110 किग्रा) पर डोपिंग के कारण प्रतिबंध लगाया गया। महिला वर्ग में वंशिता वर्मा (86 किग्रा) भी एंटी डोपिंग नियम उल्लंघन की दोषी पाई गई थीं। भारतीय भारोत्तोलन में डोपिंग कोई नया संकट नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आए मामलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित हुई है और अब इसका असर सीधे राष्ट्रमंडल खेलों में मिलने वाले कोटे पर भी पड़ा है।
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