राजस्थान: इस्लामपुर को लेकर गर्माई राजनीति, पुलिस की चर्चा कर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा सुर्खियों में
झुंझुनू के इस्लामपुर गांव का नाम 'श्रीरामपुर' करने के विरोध में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू आमने सामने हैं। आज इसी क्रम में राजेंद्र गुढ़ा ने अपना विरोध जताया। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्श…

सौजन्य से:- Navbharat Times
झुंझुनू के इस्लामपुर गांव का नाम 'श्रीरामपुर' करने के विरोध में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू आमने सामने हैं। आज इसी क्रम में राजेंद्र गुढ़ा ने अपना विरोध जताया। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया।
झुंझुनूं: जिले के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर 'श्रीरामपुर' किए जाने के प्रस्ताव को लेकर आज यहां राजनीतिक पारा चढ़ा रहा। इस फैसले के विरोध में सोमवार को पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस्लामपुर से झुंझुनू कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला। रैली में शामिल ग्रामीणों ने गांव की पुरानी और ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने की मांग करते हुए नाम परिवर्तन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
राजेंद्र सिंह गुढ़ा कलेक्ट्रेट के सामने लेटे
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा अचानक कलेक्ट्रेट के सामने तपती सड़क पर लेट गए। भीषण गर्मी और उमस के बीच गुढ़ा के इस कदम से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से तुरंत मौके पर मेडिकल टीम और एंबुलेंस बुलाई, लेकिन पूर्व मंत्री ने उसमें जाने से साफ इनकार कर दिया। वहीं इसके बाद जब गुढ़ा कलेक्ट्रेट में आगे जाने लगे तो महिला पुलिस ने उनके आगे खड़ी हो गई।
चुटीले अंदाज में पुलिस ने की बात
इससे जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें गुढ़ा पुलिस के साथ चुटीले अंदाज में बात करते नजर आए। उन्होंने कहा कि डिप्टी साहब ने महिलाओं को आगे कर दिया है। इस दौरान महिला पुलिस की ओर से जब कहा गया कि आप महिलाओं को कमजोर समझ रहे हैं क्या, तो जवाब में गुढ़ा बोले कि आप हमारी बहन बेटी है। आप शक्ति का रूप हैं।
गुढ़ा बोले- यहां पैदा हुए मुस्लिम हमारे भाई
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए गुढ़ा ने कहा कि सरकार को सबका खयाल रखना चाहिए। उन्होंने सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए कहा, 'मुस्लिम समाज का कोई व्यक्ति बाहरी नहीं है, वे सब हमारे भाई हैं।
क्यों शुरू हुआ यह विवाद?
बताया जा रहा है कि दरअसल, यह पूरा मामला गांव के दो गुटों के बीच का है। ग्रामीणों के एक गुट की मांग पर स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू ने शासन को गांव का नाम 'इस्लामपुर' से बदलकर 'श्रीरामपुर' करने का आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है। वहीं ग्रामीणों का दूसरा गुट और पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा इस बदलाव का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव के ऐतिहासिक नाम और पहचान के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
कलेक्टर ने कही ये बात
पैदल मार्च और उग्र प्रदर्शन के बाद पूर्व मंत्री गुढ़ा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। जिला कलेक्टर ने स्थिति को संभालते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि नाम परिवर्तन के समर्थन में आए दूसरे पक्ष से तथ्यात्मक साक्ष्य मांगे गए हैं। दो दिनों के भीतर मिलने वाले दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा के बाद ही इस पर आगे कोई फैसला लिया जाएगा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन दोनों पक्षों की बात सुनकर पूरी तरह निष्पक्ष निर्णय लेगा और जनभावनाओं के खिलाफ कोई काम नहीं किया जाएगा।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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