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पैन-इंडिया भर्ती पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, राज्य में भर्ती के महत्वपूर्ण चरण हुए तो यहीं होगी सुनवाई

पैन-इंडिया भर्ती पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, राज्य में भर्ती के महत्वपूर्ण चरण हुए तो यहीं होगी सुनवाई Amir Ahmad 7 Oct 2026 1:17 PM IST राजस्थान हाईकोर्ट ने पैन-इंडिया स्तर पर होने वाली भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण…

Live Law Hindi के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 10:04 pm बजे
पैन-इंडिया भर्ती पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, राज्य में भर्ती के महत्वपूर्ण चरण हुए तो यहीं होगी सुनवाई

सौजन्य से:- Live Law Hindi

पैन-इंडिया भर्ती पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, राज्य में भर्ती के महत्वपूर्ण चरण हुए तो यहीं होगी सुनवाई

Amir Ahmad

7 Oct 2026 1:17 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने पैन-इंडिया स्तर पर होने वाली भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया के महत्वपूर्ण और ठोस चरण किसी राज्य में आयोजित हुए हैं तो उस राज्य के हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त होगा। भर्ती पूरे देश में होने या संबंधित प्राधिकरण के दूसरे राज्य में स्थित होने मात्र से स्थानीय हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार समाप्त नहीं हो जाता।

चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि जब याचिकाकर्ता उसी राज्य के निवासी हों, वहीं से भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए हों और भर्ती के महत्वपूर्ण चरण भी उसी राज्य में आयोजित हुए हों तो संबंधित हाईकोर्ट उनके लिए सुविधाजनक और उपयुक्त न्यायिक मंच माना जा सकता है। ऐसे अभ्यर्थियों को संवैधानिक उपाय के लिए किसी दूर स्थित हाईकोर्ट जाने के लिए बाध्य करना अनावश्यक कठिनाई और खर्च का कारण बन सकता है।

मामला पूरे देश में पदों पर भर्ती के लिए आयोजित प्रक्रिया से जुड़ा था। इस भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों का शारीरिक दक्षता परीक्षण और शारीरिक मानक परीक्षण (PET/PST) तथा कंप्यूटर परीक्षा राजस्थान में आयोजित की गई। इसके बाद ट्रेड टेस्ट बिहार में और विस्तृत मेडिकल परीक्षण दिल्ली में कराया गया।

बाद में अभ्यर्थियों ने अपनी फिटनेस प्रमाण-पत्रों पर विचार करने के निर्देश देने की मांग करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं। राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई कि भर्ती के संबंध में राजस्थान में कोई कारण-ए-दावा उत्पन्न नहीं हुआ, इसलिए राजस्थान हाईकोर्ट को इन याचिकाओं की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है।

सिंगल जज ने राज्य की इस आपत्ति को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि भर्ती प्रक्रिया एक समग्र प्रक्रिया है और उसके अलग-अलग चरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। चूंकि PET/PST और कंप्यूटर परीक्षा राजस्थान में आयोजित हुईं और ये भर्ती प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा थीं, इसलिए राजस्थान में कारण-ए-दावा का महत्वपूर्ण हिस्सा उत्पन्न हुआ। राज्य ने इस आदेश को डिवीजन बेंच के समक्ष चुनौती दी थी।

डिवीजन बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 226(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थापित कानूनी सिद्धांत है कि हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार तभी बनता है, जब कारण-ए-दावे का कोई महत्वपूर्ण या अभिन्न हिस्सा उसकी क्षेत्रीय सीमा के भीतर उत्पन्न हुआ हो। इसके लिए यह देखना जरूरी नहीं है कि संबंधित सरकारी प्राधिकरण या प्रतिवादी का कार्यालय उसी राज्य में स्थित है या नहीं।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवल किशोर शर्मा बनाम भारत संघ मामले का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया कि कारण-ए-दावे के लिए याचिका में बताए गए तथ्यों और मांगी गई राहत के बीच सीधा संबंध होना चाहिए। केवल ऐसे आकस्मिक तथ्यों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है, जिनका मांगी गई राहत से वास्तविक संबंध न हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कारण-ए-दावे का एक छोटा-सा हिस्सा भी संबंधित राज्य में उत्पन्न होता है, तो क्षेत्राधिकार का आधार बन सकता है।

हाईकोर्ट ने बख्शीश अहमद बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। इसमें कहा गया कि जब किसी मामले की सुनवाई के लिए एक से अधिक न्यायिक मंच उपलब्ध हों, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि विवाद के निपटारे के लिए कौन-सा मंच अधिक सुविधाजनक और उपयुक्त है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता राजस्थान के बेरोजगार युवा हैं। उन्होंने राजस्थान से भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया और भर्ती के महत्वपूर्ण चरण भी राजस्थान में आयोजित हुए। ऐसे में उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए किसी दूर स्थित हाईकोर्ट का रुख करने के लिए बाध्य करना अनावश्यक परेशानी और खर्च का कारण होगा।

इन परिस्थितियों में डिवीजन बेंच ने राज्य की अपीलें खारिज कीं और सिंगल जज का वह आदेश बरकरार रखा, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार पर राज्य की प्रारंभिक आपत्ति को खारिज किया गया।

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