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पंचायत और निकाय चुनाव के लिए सरकार की समय मांग के पीछे के कारण

राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव के लिए समय मांगा है, जिसे नवंबर तक नहीं कराने के कई कारणों से बताया जा रहा है।

ETV Bharat के अनुसार14 जुलाई 2026 को 05:16 am बजे
पंचायत और निकाय चुनाव के लिए सरकार की समय मांग के पीछे के कारण

सौजन्य से:- ETV Bharat

पंचायत और निकाय चुनाव कराने के लिए सरकार ने मांगा समय, नवंबर तक नहीं कराने के गिनाए कारण

राजस्थान पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से प्रार्थना पत्र पेश किया गया है.

Published : July 13, 2026 at 8:51 PM IST

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराने की समय सीमा निर्धारित करने को लेकर राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया गया है. प्रार्थना पत्र में नवंबर तक चुनाव नहीं करा पाने के कारण बताए गए हैं. वहीं, दूसरी ओर मामले में संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी.

राज्य सरकार की ओर से समय बढाने के लिए दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में करीब 50 फीसदी आबादी ओबीसी वर्ग की है. ऐसे में उचित आरक्षण सुनिश्चित करना जरूरी है. ओबीसी आयोग ने 14 अगस्त, 2026 तक राजनीतिक आरक्षण रिपोर्ट पेश करने की सूचना दी है. ऐसे में सरकार विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण का विवरण 31 अगस्त तक उपलब्ध करा सकेगी.

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प्रार्थना पत्र में कहा गया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने गत 6 जुलाई को पत्र के जरिए सूचित किया है कि यदि आरक्षण का विवरण 31 अगस्त तक उपलब्ध करा दिया जाएगा तो विभिन्न वैधानिक प्रावधानों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चार चरण में और निकाय चुनाव दो चरण में कराने होंगे और इसमें कुल 90 दिन का समय लगेगा. प्रार्थना पत्र में कहा गया कि प्रदेश में करीब 14 हजार ग्राम पंचायतों और तीन सौ से अधिक नगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं. ऐसे में संसाधनों को देखते हुए चरणबद्ध चुनाव कराना सही रहेगा. ग्राम पंचायत के चुनाव में 50 दिन और शहरी निकायों के लिए 40 दिन लगेंगे. अब तक स्थानीय निकायों का परिसीमन और मतदाता सूची संशोधन पूरा हो चुका है. ऐसे में चुनाव कराने के लिए उचित समय दिया जाए.

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के सामने गोल्फ क्लब के पास बन रही बिल्डिंग के निर्माण पर लगी यथास्थिति को हटा दिया है. अदालत ने निर्माण कार्य को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा है. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह व जस्टिस संदीप तनेजा ने यह आदेश योगेश यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए. अदालत ने गत 19 दिसंबर को मामले में यथास्थिति के आदेश दिए थे.

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने कहा कि यह जनहित याचिका दो साल की देरी से दायर की गई है और जेडीए की ओर से किया जाने वाला निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है. इसके अलावा 11 अगस्त 2000 के समझौते के अनुसार क्लब हाउस का निर्माण जेडीए को करना था और इसे गोल्फ क्लब को चालू करना था. गोल्फ कोर्स क्लब के अवैध निर्माण के आरोप अब मायने नहीं रखते, क्योंकि पार्किंग बनाते समय उसे पहले ही हटा दिया जा चुका है. अब नया निर्माण कार्य अगस्त 2000 के समझौते के अनुसार ही हो रहा है और जेडीए अपनी जमीन पर ही यह कार्य कर रहा है. ऐसे में इसे अवैध नहीं कहा जा सकता. इसलिए अदालत निर्माण पर लगी यथास्थिति को हटाए, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यथास्थिति को हटा दिया है.

जनहित याचिका में कहा गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 14 सितंबर, 2023 को यहां भूतल सहित एक मंजिला इमारत निर्माण का निर्णय लिया गया. निर्णय में माना गया कि पार्किंग के लिए मौजूदा निर्माण को तोड़ने के बदले यह निर्माण किया जाएगा. इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि पूर्व का निर्माण ही अपने आप में अवैध था. इसके अलावा करीब नौ साल पहले राज्य सरकार ने गोल्फ क्लब को यहां निर्माण की अनुमति नहीं दी थी. निर्माण होने पर क्लब पर कार्रवाई भी हुई थी. ऐसे में अब पूर्व के निर्णय को दरकिनार कर निर्माण की अनुमति दी गई है. ऐसे में अवैध निर्माण को वैध निर्माण में नहीं बदला जा सकता.

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