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मंत्रियों पर भेदभाव: राजस्थान में क्या हैं तबादलों के बाद के विरोध के पीछे के कारण?

राजस्थान में तबादलों के बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है. सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कर्मचारियों को सजा के तौर पर दूर-दराज के इलाकों में ट्रांसफर किया गया है. कर्मचारी संगठन भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

ETV Bharat के अनुसार15 जुलाई 2026 को 11:18 am बजे
मंत्रियों पर भेदभाव: राजस्थान में क्या हैं तबादलों के बाद के विरोध के पीछे के कारण?

सौजन्य से:- ETV Bharat

तबादलों का दौर खत्म, लेकिन विरोध के सुर हुए तेज, कर्मचारी संगठनों ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कर्मचारियों को चिन्हित कर दूर-दराज तबादला किए गए. सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे.

Published : July 15, 2026 at 1:47 PM IST

जयपुर: प्रदेश में तबादलों का दौर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन अब तबादलों में भाई भतीजावाद और चहेतों को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं. वहीं, सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कर्मचारियों को सजा के तौर पर चिन्हित कर दूरदराज के इलाकों में तबादले करने का मामला अब सरकार के खिलाफ विरोध का कारण बनता जा रहा है.

कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ तबादलों को लेकर आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर दी है. आलम यह है कि न अन्य कर्मचारी संगठन, बल्कि आरएसएस समर्थित कर्मचारियों के भी दूर-दराज तबादले किए गए हैं, जिसे लेकर मंगलवार को भाजपा मुख्यालय और आरएसएस कार्यालय में भी कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी. मंगलवार को आरएसएस पृष्ठभूमि के माने जाने वाले एक शिक्षक ओमवीर पेलावत ने अपने तबादले को लेकर सोशल मीडिया पर ही लंबी चौड़ी पोस्ट लिख डाली. शिक्षक ओमवीर पेलावत का ट्रांसफर धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया है.

मेरे पिता जी भारतीय जनता पार्टी के इमानदार कार्यकर्ता रहे हैं इस बात को स्म्माननीया वसुंधरा राजे जी जानती है।

— 𝗢𝗺𝘃𝗶𝗿 𝗣𝗲𝗹𝗮𝘄𝗮𝘁 (@omvirpailawat) July 13, 2026

मैं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हूं।

मैंने भी अनेकों बार भाजपा का जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

लेकिन आज पहली बार…

शिक्षक का सोशल मीडिया पोस्ट : शिक्षक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मेरे पिताजी भारतीय जनता पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता रहे हैं. इस बात को वसुंधरा राजे भी जानती हैं. मैं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हूं. मैंने भी अनेकों बार भाजपा का जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन आज पहली बार मुझे जरूरत पड़ी कि गलती से मैंने प्रमोशन स्वीकार कर लिया और मुझे 59 साल की उम्र में धौलपुर से 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ भेज दिया है. दुर्भाग्य यह रहा कि मेरा रिक्त स्थान पर भी ट्रांसफर नहीं किया गया. खैर मैं तो वीआरएस ले लूंगा, लेकिन शिक्षा मंत्री जी आपकी जिद बीजेपी को ले डूबेगी.

पढ़ें : राजस्थान में 18 IPS अधिकारियों के तबादले, कई रेंजों में नए चेहरे, जोधपुर कमिश्नर भी बदले

सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रही सरकार : राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के सभाध्यक्ष महावीर सिहाग ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को चिन्हित करके सजा के तौर पर दूर-दराज के इलाकों में ट्रांसफर किया गया है. उन्होंने कहा कि गंगानगर में दृष्टि बाधित शिक्षक का तबादला उसके घर से लगभग 200 किलोमीटर दूर कर दिया है.

साथियों राजस्थान में पदोन्नत व्याख्याताओं के साथ अन्याय हुआ है। माननीय शिक्षा मंत्री जी ने हाल ही में पदोन्नत व्याख्याताओं के ट्रांसफर नहीं किए हैं। जबकि पदोन्नत व्याख्याताओं को 500-700 किलोमीटर दूर पदस्थापन दिया था। और काउंसलिंग के नाम पर टीए डीए भी नहीं दिया।फोरगो का आप्शन भी…

— 𝗢𝗺𝘃𝗶𝗿 𝗣𝗲𝗹𝗮𝘄𝗮𝘁 (@omvirpailawat) July 14, 2026

हनुमानगढ़ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष का तबादला जैसलमेर किया गया है. सरकार पूरी तरीके हठधर्मिता और तानाशाही अपना रही है. तबादलों में जमकर भाई-भतीजावाद भी हुआ है. एक मंत्री के बेटे का तबादला उसके गृह जिले में किया गया है. चहेतों को फायदा पहुंचाया गया है. सिहाग ने कहा कि सरकार ने तबादलों में जिस तरह का भेदभाव किया गया है वो रवैया ठीक नहीं है. इसके विरोध में हम सरकार के खिलाफ सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 17 जुलाई को भी सभी संभाग मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर सरकार का विरोध करेंगे.

एकल महिला का तबादला 500 किलोमीटर दूर : राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से तबादलों पर से बैन हटाने के बाद जिस तरह से तबादले हुए हैं, उसमें पूरी तरीके से भाई-भतीजावाद और भेदभावपूर्ण रवैया देखने को मिला है. यह न सरकार के लिए ठीक है और न ही कर्मचारियों के लिए ठीक है.

जिन कर्मचारियों के प्रार्थना पत्र और डिजायर के आधार पर तबादले किए गए हैं वो तो ठीक है, लेकिन कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जब एकल महिला का ट्रांसफर 500 किलोमीटर दूर किया गया है. जबकि सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि एकल महिला, दिव्यांग, दृष्टि बाधित के तबादले उनके गृह जिले में ही किए जाएंगे. गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि कई विभाग ऐसे भी हैं, जहां पर तबादलों की अंतिम तिथि निकालने के बाद बैक डेट में तबादले करके चहेतों को फायदा पहुंचाया गया है. राठौड़ का कहना है कि शिक्षा मंत्री के आवास पर कई महिला शिक्षक रोते हुए तबादलों की गुहार कर रही थीं, लेकिन शिक्षा मंत्री ने उनसे मिलना तक मुनासिब नहीं समझा.

भाजपा प्रत्याशी मिटा रहे अपनी हार की खीझ : गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि इस बार तबादलों में भाजपा के हारे हुए प्रत्याशियों ने भी अपनी हार की खीझ मिटाने के लिए जातिगत आधार पर कर्मचारियों के तबादले करवाए हैं. उन्हें लगता है कि उनकी हार की वजह कर्मचारी थे. भाजपा प्रत्याशियों ने न केवल उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र, बल्कि कई सौ किलोमीटर दूर तबादले करवा दिए हैं. इस तरह का रवैया ठीक नहीं है. सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

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