हाईकोर्ट ने सरकार को दी सख्त चेतावनी, 31 अगस्त तक चुनावी फैसला लेने की टीमलाइन
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को तलब किया है। अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग इन चुनावों को संपन्न कराने में खुद को लाचार पा रहा है, तो फिर हाईकोर्ट सुपरवाइजर नियुक्त करेगा। राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने नई समयसीमा 31 अगस्त की घोषणा की है, जिसमें ओबीसी आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा और सरकार आरक्षण से जुड़ी सभी बारीकियों को अंतिम रूप देगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को सीधे तलब कर लिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग सक्षम नहीं है, तो कोर्ट सुपरवाइजर नियुक्त कर देगा।
जयपुर: राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने में हो रही लगातार देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव अमले को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट का गुस्सा इस कदर फूटा कि एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव व सलाहकार को सीधे कोर्ट में तलब कर लिया। अदालत ने साफ कहा कि प्रशासनिक दिक्कतों की आड़ लेकर अदालती आदेशों को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता।
यह पूरा मामला पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की उस अवमानना याचिका पर गरमाया, जिसमें उन्होंने सरकार पर कोर्ट के पुराने आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
'चुनाव नहीं करा सकते, तो हाईकोर्ट से बंदा भेज दें?'
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट के तेवर भांपकर अफसरों के पसीने छूट गए जब पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- 'अगर राज्य चुनाव आयोग इन चुनावों को संपन्न कराने में खुद को लाचार पा रहा है, तो फिर हम इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाईकोर्ट से किसी अधिकारी को नियुक्त कर सकते हैं।' इसके साथ ही अदालत ने दोटूक चेतावनी दी कि सरकार उसे ज्यादा सख्त फैसले लेने के लिए मजबूर न करे।
50 फीसदी आबादी और ओबीसी आरक्षण का पेंच
अदालत की इस तीखी फटकार के बीच राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने समय सीमा बढ़ाने की गुहार लगाई। सरकार ने दलील दी कि वे कोर्ट के आदेशों की नाफरमानी नहीं कर रहे हैं, बल्कि व्यावहारिक संकट में फंसे हैं।
महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि राजस्थान की लगभग 50 प्रतिशत आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखती है। ऐसे में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने से पहले इस बड़े वर्ग के लिए संवैधानिक रूप से सही और वैध राजनीतिक आरक्षण की सीमाएं तय करना तकनीकी रूप से अनिवार्य है। सरकार ने सारा ठीकरा ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी पर फोड़ा, जिसकी वजह से सीटों के वर्गीकरण का काम अटका हुआ है।
31 अगस्त की नई डेडलाइन
सरकार ने कोर्ट के सामने इस गतिरोध को सुलझाने का एक रोडमैप भी रखा। राज्य सरकार के मुताबिक, ओबीसी आयोग आगामी 14 अगस्त तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंप देगा। इसके बाद, सरकार ने 31 अगस्त तक आरक्षण से जुड़ी सभी बारीकियों और विशिष्टताओं को अंतिम रूप देकर चुनावी तस्वीर साफ करने का लक्ष्य रखा है।
बहरहाल, हाईकोर्ट की ओर से आला अधिकारियों को गुरुवार को ही निजी या वर्चुअल रूप से पेश होने के अल्टीमेटम के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट सरकार की इस नई टाइमलाइन को स्वीकार करता है या फिर स्वतंत्र निष्पक्ष चुनाव के लिए कोई कड़ा और सीधा हंटर चलाता है।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान हाईकोर्ट का अल्टिमेटम, 20 जुलाई को चुनाव शेड्यूल के साथ सरकार और सीईसी तलब

दुश्मनी के खेल के साथ भी निभाना है राजनीतिक शिष्टाचार: वसुंधरा राजे

राजस्थान हाईकोर्ट ने निलंबित किया एडीजे नवीन कुमार मीणा, एनडीपीएस मामलों में जमानत देने के आरोप


