अब प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट मिलेगा ब्लड, भजनलाल सरकार का फैसला
अब प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट मिलेगा ब्लड, भजनलाल सरकार का फैसला Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं को ब्लड या ब्लड कॉम्पोनेंट लेने के लिए रिप्लेसमेंट डोनर यानी बदले में किसी व्यक्त…

सौजन्य से:- ABP News
अब प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट मिलेगा ब्लड, भजनलाल सरकार का फैसला
Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं को ब्लड या ब्लड कॉम्पोनेंट लेने के लिए रिप्लेसमेंट डोनर यानी बदले में किसी व्यक्ति से ब्लड डोनेट कराने की शर्त नहीं होगी.
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब सरकारी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं को ब्लड या ब्लड कॉम्पोनेंट लेने के लिए रिप्लेसमेंट डोनर यानी बदले में किसी व्यक्ति से ब्लड डोनेट कराने की शर्त नहीं होगी. राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं.
नए आदेश का सीधा फायदा उन महिलाओं को मिलेगा, जो सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच करा रही हैं, गंभीर एनीमिया से जूझ रही हैं या डिलीवरी के दौरान ऐसी स्थिति में पहुंच जाती हैं, जहां तत्काल ब्लड चढ़ाने की जरूरत होती है. अब इन मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराने से पहले परिवार को डोनर तलाशने के लिए नहीं कहा जाएगा.
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अब बिना रिप्लेसमेंट डोनर के मिलेगा ब्लड
अब तक बिना रिप्लेसमेंट डोनर के ब्लड उपलब्ध कराने की सुविधा मुख्य रूप से थैलेसीमिया, सिकल सेल बीमारी, ट्रॉमा केस और 14 साल से कम उम्र की बच्चियों जैसे मामलों तक सीमित थी. नए आदेश के बाद सरकारी अस्पतालों में आने वाले सभी प्रसूति मामलों, खासकर गंभीर एनीमिया और डिलीवरी से जुड़ी इमरजेंसी में इस सुविधा का दायरा बढ़ा दिया गया है.
सरकार ने सिर्फ ब्लड ही नहीं, बल्कि जरूरत के मुताबिक ब्लड कॉम्पोनेंट उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं. इसका मतलब मरीज की जरूरत के अनुसार रेड सेल्स, प्लेटलेट्स या प्लाज्मा जैसे कॉम्पोनेंट भी रिप्लेसमेंट डोनर की शर्त के बिना उपलब्ध कराए जा सकेंगे.
19 महिलाओं की मौत के बाद लिया फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है जब मई से अब तक पांच जिलों में 19 महिलाओं की मौत के मामले सामने आए हैं. इनमें कई मामले सीजेरियन डिलीवरी के बाद पैदा हुई जटिलताओं से जुड़े बताए गए हैं. जांच में यह बात सामने आई कि गंभीर एनीमिया, ब्लीडिंग या प्रसव संबंधी जटिलताओं के दौरान ब्लड का इंतजाम करने में देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के निर्देश
सरकार के इस फैसले से ब्लड बैंकों पर दबाव बढ़ने की संभावना है. इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं. ब्लड सेंटरों को सामाजिक संगठनों, एनजीओ, कॉलेजों और सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग से ज्यादा से ज्यादा रक्तदान शिविर लगाने और दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले डोनर्स की सूची तैयार करने को कहा गया है. सरकार का फोकस साफ है कि ब्लड के इंतजार में किसी प्रसूता की जान न जाए और इमरजेंसी में इलाज में देरी की एक बड़ी वजह को खत्म किया जाए.
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