होमकृषिराजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश: नेवता बांध में पानी को बहने देने के लिए अतिक्रमण हटाया जाए
कृषि

राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश: नेवता बांध में पानी को बहने देने के लिए अतिक्रमण हटाया जाए

राजस्थान हाईकोर्ट ने खतवाड़ा गांव में नालों और कैचमेंट एरिया पर अतिक्रमण और ज़मीन की हदबंदी के लिए पक्की बाउंड्री वॉल बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। संबंधित राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत इन अतिक्रमणों को हटाएं। साथ ही, संबंधित ज़मीन मालिकों को भी नोटिस जारी किया जाएगा ताकि वे पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकने वाले क्षेत्रों को खोल सकें।

Live Law Hindi के अनुसार7 जुलाई 2026 को 10:26 am बजे
राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश: नेवता बांध में पानी को बहने देने के लिए अतिक्रमण हटाया जाए

सौजन्य से:- Live Law Hindi

राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: नेवता बांध में पानी के बहाव को रोकने वाले कैचमेंट एरिया से तुरंत हटाया जाए अतिक्रमण

Shahadat

6 July 2026 11:46 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने खतवाड़ा गांव में नालों और कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्रों) पर अतिक्रमण और ज़मीन की हदबंदी के लिए पक्की बाउंड्री वॉल बनाने का गंभीरता से संज्ञान लिया है, जिसके कारण नेवता बांध में पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है या उसमें बाधा आ रही है।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खतवाड़ा गांव के नालों और कैचमेंट एरिया, तथा रामगढ़ और कूकास के इलाकों से अतिक्रमण और निर्माण को तुरंत हटाएं। हालांकि, इससे पहले संबंधित ज़मीन मालिकों को पानी के बहाव का रास्ता खुद खोलने का मौका दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने सिविल कोर्ट और रेवेन्यू कोर्ट को कैचमेंट एरिया से जुड़े किसी भी सिविल मुकदमे पर सुनवाई करने से भी रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि मॉनसून आने वाला है, इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और कोर्ट की अनुमति के बिना इसे किसी भी तरह से रोका नहीं जाना चाहिए।

कोर्ट ने माना कि राज्य अधिकारियों ने संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस भेज दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे नोटिस अखबारों में भी छापे जाएं और ज़मीन मालिकों को यह विकल्प दिया जाए कि अगर पानी के प्राकृतिक बहाव के लिए किसी खास इलाके को खोलने की ज़रूरत है तो वे उसे खोल दें। संबंधित तहसीलदार को भी संबंधित ज़मीन मालिकों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि कृषि भूमि की हदबंदी ज़रूरी है, लेकिन यह दूसरे तरीकों से भी की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि यह हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पक्की दीवारें बनाकर आस-पास के जल निकायों (water bodies) के कैचमेंट एरिया में पानी का बहाव न रोका जाए।

कोर्ट ने आगे कहा,

“हमने देखा है कि लोग खेती की ज़मीन खरीदते हैं और पक्की बाउंड्री वॉल बना लेते हैं, जिससे बारिश के मौसम में आस-पास के जलाशयों तक पानी का बहाव रुक जाता है। हालांकि, समाज और किसानों के बीच किसी भी तरह के झगड़े से बचने के लिए खेती की ज़मीन की सीमा तय करना ज़रूरी है, लेकिन साथ ही हर नागरिक की यह ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पक्की बाउंड्री वॉल बनाकर आस-पास के जलाशयों के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) को रोका न जाए। जहां तक सीमा तय करने की बात है, तो यह दूसरे तरीकों से भी किया जा सकता है। अगर किसी वजह से बाउंड्री वॉल बनानी भी पड़े, तो भी दीवार के निचले हिस्से में पानी के आगे बहते रहने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।”

इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) जमा करने के लिए 5 अगस्त, 2026 की तारीख तय की गई।

Title: Govindram v State of Rajasthan

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें