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जयपुर तक पहुंचा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन, विभाग का घेराव, प्रदेशव्यापी महापड़ाव की चेतावनी

जयपुर तक पहुंचा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन, विभाग का घेराव, प्रदेशव्यापी महापड़ाव की चेतावनी राजस्थान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 10 हजार रुपए तक मानदेय मिल रहा है, जबकि मध्यप्रदेश में बढ़ाकर 15 हजार किया ज…

ETV Bharat के अनुसार8 जुलाई 2026 को 01:24 pm बजे
जयपुर तक पहुंचा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन, विभाग का घेराव, प्रदेशव्यापी महापड़ाव की चेतावनी

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर तक पहुंचा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन, विभाग का घेराव, प्रदेशव्यापी महापड़ाव की चेतावनी

राजस्थान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 10 हजार रुपए तक मानदेय मिल रहा है, जबकि मध्यप्रदेश में बढ़ाकर 15 हजार किया जा चुका है.

Published : July 8, 2026 at 5:15 PM IST

जयपुर: अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर में आंदोलनरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आक्रोश अब राजधानी जयपुर तक पहुंच गया है. यह आंदोलन एक सप्ताह से भी अधिक समय से जारी है. आंदोलन के तहत बुधवार को बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी महिला कार्मिकों ने जयपुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय का घेराव कर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि जब तक मांगों पर सम्मानजनक समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

जयपुर में महापड़ाव की चेतावनी: अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के संस्थापक संरक्षक छोटीलाल बुनकर ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्मिकों ने 1 जुलाई से 6 जुलाई तक कार्य बहिष्कार किया था, जबकि 7 जुलाई से अनिश्चितकालीन ताला बंदी और आम हड़ताल शुरू कर दी गई है. सरकार और विभाग उनकी समस्याओं के समाधान का रास्ता निकालने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रहे हैं. बुनकर का कहना है कि मांगों को सरकार तक पहुंचाने के बजाय विभागीय अधिकारी कार्मिकों को सेवा से पृथक करने की धमकी देकर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास कर रहे हैं. इससे कर्मचारियों में और अधिक आक्रोश बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों का शांतिपूर्ण धरना करना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन विभाग द्वारा डराने-धमकाने की कार्रवाई की जा रही है. यही स्थिति बनी रही तो आंदोलन और उग्र होगा, साथ ही प्रदेशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का जयपुर में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा.

बुनकर ने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट नीति बनाना, नियमितीकरण तक न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप 20 हजार से 26 हजार रुपए मासिक मानदेय देना शामिल है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में मध्यप्रदेश मॉडल के आधार पर मानदेय बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन आज भी राजस्थान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 6 हजार से 10 हजार रुपए तक मानदेय मिल रहा है, जबकि मध्यप्रदेश में यह राशि बढ़ाकर 15 हजार रुपए की जा चुकी है.

जेब से देना पड़ रहा आंगनवाड़ी भवनों का किराया: संघ की प्रदेशाध्यक्ष रचना शर्मा ने वर्ष 2025 के बजट में घोषित सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का लाभ अब तक लागू नहीं होने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने परियोजनाओं में ठेका प्रथा समाप्त करने, गैर-आईसीडीएस कार्यों पर रोक लगाने, लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने और सामुदायिक गतिविधियों के लिए पिछले एक वर्ष से लंबित प्रोत्साहन राशि जारी करने की भी मांग की.

प्रदर्शन के दौरान महिला कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन का किराया भी उन्हें अपनी जेब से देना पड़ रहा है, जबकि मानदेय समय पर नहीं मिलता और किस्तों में दिया जाता है. इससे आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. उन्होंने कहा कि आक्रोश अब सरकार से अधिक विभागीय अधिकारियों के रवैये को लेकर है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उच्च स्तर पर वार्ता कर सम्मानजनक समाधान नहीं निकालती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र करना पड़ेगा.

चाकसू क्षेत्र के 250 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले : चाकसू उपखंड मुख्यालय एवं कोटखावदा ब्लॉक क्षेत्र के करीब 250 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार को ताले लटक गए. मानदेय में बढ़ोतरी, नियमितीकरण तथा चुनावी वादों को पूरा करने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. हड़ताल के चलते महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण समन्वय, पूरक पोषण वितरण तथा अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो गई हैं. वहीं, विभागीय रिकॉर्ड संधारण, सर्वे एवं अन्य प्रशासनिक कार्य भी पूरी तरह ठप पड़ गए हैं.

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