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सचिन पायलट के खिलाफ अशोक गहलोत ने क्यों छेड़ी नई जंग, क्या है इनसाइड स्टोरी

Explainer: सचिन पायलट के खिलाफ अशोक गहलोत ने क्यों छेड़ी नई जंग, क्या है इनसाइड स्टोरी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से अदावत चल रही है। कुछ समय तक ठंडापन दिखने के बाद अशोक गहलोत ने एक बार फिर पूर्व उपमुख्यमंत…

Hindustan Hindi News के अनुसार10 जून 2026 को 04:03 am बजे
सचिन पायलट के खिलाफ अशोक गहलोत ने क्यों छेड़ी नई जंग, क्या है इनसाइड स्टोरी

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News

Explainer: सचिन पायलट के खिलाफ अशोक गहलोत ने क्यों छेड़ी नई जंग, क्या है इनसाइड स्टोरी

सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से अदावत चल रही है। कुछ समय तक ठंडापन दिखने के बाद अशोक गहलोत ने एक बार फिर पूर्व उपमुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आखिर क्यों उन्होंने भूली बिसरी बातों को दोहराया है? आइए समझते हैं।

राजस्थान में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति एक बार फिर रेगिस्तानी रेत की तरह गरम हो चुकी है। हाल ही में अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिल्ली में हाथ मिलाते और साथ ठहाके लगाते नजर आए थे, पर कुछ ही दिनों में खुद पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि दिल नहीं मिले हैं। अशोक गहलोत ने अचानक मीडिया को बुलाकर जिस तरह सचिन पायलट की 'बगावत' याद दिलाई और अपनी वफादारी की तरफदारी की, उसने जयपुर से दिल्ली तक सबको चौंका दिया है। आखिर क्यों गहलोत गड़े मुर्दे उखाड़ने लगे? उन्हें क्यों 2020 और 22 के घटनाक्रम को याद दिलाने की जरूरत पड़ गई?

राजस्थान कांग्रेस की हर हलचल पर करीब से निगाह रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 'जादूगर' कहे जाने वाले गहलोत 'यूं' ही कुछ भी नहीं करते। ना ही उन्होंने चलते-फिरते या फिर उस तरह का कोई सवाल आने पर इस तरह का जवाब दिया है। यह काफी सोच-समझकर उठाया गया कदम है। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल पूरा होने के बाद कमान के लिए यह घमासान शुरू हुआ है। डोटासरा अगले साल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में छह साल पूरे कर लेंगे, जबकि पार्टी के 'उदयपुर घोषणापत्र' में पांच साल का लिमिट तय कर चुकी है।

सचिन पायलट को लेकर क्या अटकलें

गोविंद सिंह होटासरा के बाद प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कौन बैठेगा, इसको लेकर कई नामों पर अटकलें चल रही हैं। पांच से अधिक नेताओं को रेस में बताया जा रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सचिन पायलट का नाम चल रहा है। कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी के हालिया फैसलों के बाद यह चर्चा जोरों पर है कि निकट भविष्य में युवा नेताओं को पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जाएंगी। जानकारों का कहना है कि राजस्थान के युवाओं के बीच अच्छी लोकप्रियता रखने वाले पायलट को लेकर बढ़ते ट्रेंड और कांग्रेस में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देखकर ही अशोक गहलोत ने एक बार फिर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। गहलोत ने 2022 और 22 की घटना को याद करते हुए सचिन पायलट को निशाने पर रखा और यह स्थापित करने की कोशिश की कि उनकी पूर्व उपमुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता और नेतृत्व के लिए वफादारी पर दाग है।

पायलट को कप्तानी नहीं चाहते गहलोत

माना जा रहा है कि अशोक गहलोत नहीं चाहते हैं कि एक बार फिर सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिले। भाजपा-कांग्रेस को 5-5 साल में बदलने का राजस्थान की जनता का ट्रेंड जारी रहा तो गहलोत जानते हैं कि 2028 के अंत में एक बार फिर पायलट की दावेदारी मुख्यमंत्री पद पर मजबूत हो जाएगी। जिस तरह 2018 में कांग्रेस की जीत के बाद सचिन पायलट को सीएम बनाने की मांग ने जोर पकड़ा, उसे अपने अनुभव के दम पर गहलोत दबाने में कामयाब रहे पर 10 साल बाद इतिहास दोहराया जाएगा या नहीं इसका जोखिम वह नहीं लेना चाहेंगे। निचोड़ यह है कि, गहलोत नहीं चाहते कि पायलट को इस समय कप्तानी मिले।

2022 को क्यों किया याद

गहलोत ने रविवार को पहली बार विस्तार से 25 सितंबर, 2022 की कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) बैठक का जिक्र किया। उस दिन के घटनाक्रम ने गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनने और पायलट के मुख्यमंत्री बनाए जाने के प्लान को फेल कर दिया था। गहलोत ने कहा कहा कि यह आलाकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी, बल्कि विधायक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे।

2020 पर क्या बोले

असल में मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से सचिन पायलट और उनके कुछ समर्थक विधायक नाराज थे। 2020 में पायलट के करीबी विधायक मानेसर के एक होटल में रुके थे। माना जा रहा था कि खेमा कभी भी भाजपा में शामिल हो सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस का यह संकट खत्म हो पाया था। इस घटना को लेकर गहलोत पायलट को गद्दार तक कह चुके हैं। बाद में पायलट का उपमुख्यमंत्री का पद भी चला गया था और पूर्व सीएम बार-बार उन्हें निशाना बनाते रहे।

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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड

(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)

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