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सरकार पर हमलावर जूली, चेताया-आंदोलनकारियों की आवाज नहीं दबाने देंगे, जरूरत पड़ी तो घेरेंगे सीएम आवास

सरकार पर हमलावर जूली, चेताया-आंदोलनकारियों की आवाज नहीं दबाने देंगे, जरूरत पड़ी तो घेरेंगे सीएम आवास नेता प्रतिपक्ष ने पौधे लगाने के लक्ष्य पर सवाल खड़े किए और पिछले साल लगाए पौधों का सत्यापन कराने की मांग की. Published…

ETV Bharat के अनुसार8 अगस्त 2026 को 02:15 pm बजे
सरकार पर हमलावर जूली, चेताया-आंदोलनकारियों की आवाज नहीं दबाने देंगे, जरूरत पड़ी तो घेरेंगे सीएम आवास

सौजन्य से:- ETV Bharat

सरकार पर हमलावर जूली, चेताया-आंदोलनकारियों की आवाज नहीं दबाने देंगे, जरूरत पड़ी तो घेरेंगे सीएम आवास

नेता प्रतिपक्ष ने पौधे लगाने के लक्ष्य पर सवाल खड़े किए और पिछले साल लगाए पौधों का सत्यापन कराने की मांग की.

Published : August 8, 2026 at 6:55 PM IST

जयपुर: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने एवं तानाशाही का आरोप लगाया. जूली ने कहा, कर्मचारियों को आंदोलन करने और धरने—प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है. जो लोग प्रदर्शन करते हैं, पुलिस उन्हें पकड़कर दूर छोड़ आती है. प्रदेश में आंदोलनकारियों को परेशान किया जा रहा है. जूली शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बात कर रहे थे.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान की जनता की आवाज दबाने नहीं दी जाएगी. सरकार ने आंदोलनकारियों की आवाज दबाने का प्रयास जारी रखा तो वो लोगों को लेकर खुद मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. सरकार को धरने-प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ेगी. जनता की आवाज नहीं सुनी गई तो प्रदेश में आंदोलन और तेज होगा.

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मानसून सत्र से भागना चाहती है सरकार: जूली ने आरोप लगाया कि सरकार मानसून सत्र से भागना चाहती है, इसलिए केवल तीन से चार दिन का सत्र चलाकर अहम मुद्दों से बचने की कोशिश कर सकती है. सरकार को विधानसभा सत्र पूरी गंभीरता से चलाना चाहिए. 15 से 25 दिन का सदन चलाएं ताकि राज्य के जनप्रतिनिधि जनता के सभी अहम मुद्दों को विधानसभा में उठा सकें. प्रदेश में बेरोजगारी, कर्मियों की समस्या, किसानों के मुद्दे, पर्यावरण कानून व्यवस्था और अन्य समस्याओं पर सदन में चर्चा होनी चाहिए, लेकिन आशंका है कि सरकार विधानसभा सत्र से भागना चाहती हैं.

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट करें सार्वजनिक: उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. रिपोर्ट कैबिनेट में आ चुकी है, लेकिन अब सरकार को रिपोर्ट सार्वजनिक करना चाहिए. जनता को बताना चाहिए कि क्या रिपोर्ट आई है. उस रिपोर्ट के आधार पर क्या प्रावधान कर रहे हैं. जनता को बताना चाहिए कि उसे छुपाना क्यों चाहते हैं.

50 करोड़ पौधों के दावे पर सवाल: टीकाराम ने राज्य सरकार के 50 करोड़ के पौधे लगाने के लक्ष्य पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि सरकार पिछले साल लगाए गए पौधों का सत्यापन कराए. बीते साल 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य था. बाद में 15 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया, लेकिन मौके पर 2 करोड़ पौधे भी नहीं लग पाए.उनमें भी आधे जीवित नहीं बचे हैं. जिस औसत से सरकार पौधे लगाने का दावा कर रही, अगर वास्तव में इतने पौधे लगाए जाते हैं तो प्रदेश में पौधे ही पौधे हो जाएंगे. लोगों को पैर रखने की जगह तक नहीं मिलेगी.

पौधे लगाने में भी भ्रष्टाचार: उन्होंने आरोप लगाया कि पौधारोपण के नाम पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार, पैसे खाने का सिस्टम चल रहा है. आंकड़ों के जरिए प्रदेश की जनता को क्यों भ्रमित किया जा रहा है. एक तरफ सरकार 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाए हैं, दूसरी तरफ उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने को बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं.अंडमान-निकोबार तक के पेड़ नहीं छोड़े, बारां- झालावाड़, छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों में पेड़ों की कटाई का मुद्दा सामने आ रहा है. ऐसे में राजस्थान के जंगलों को कैसे छोड़ा जाएगा?. जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध खनन, अवैध वन कटाई और अवैध बजरी खनन जारी है. सरकार ने आंखें मूंद रखी हैं. मानसून सत्र में पौधारोपण के आंकड़ों का सत्यापन करने की मांग करेंगे.

दावों की जांच जरूरी: उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 200 जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग क्षेत्र में भेजकर सरकार को पौधारोपण के दावों की जांच करवानी चाहिए. जहां पौधे लगाने का दावा किया, वहां जनप्रतिनिधियों को भेज कर भौतिक सत्यापन कराएं. सोशल ऑडिट भी कराएं और सरकार सार्वजनिक करें कि उसने 15 करोड़ पौधे आखिर कहां लगाए हैं.

विरासत बचाने की योजना बताओ: जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जयपुर को यूनेस्को की पहचान मिली थी. बीते तीन साल में जिस तरह फंड बांटा जा रहा है, उसमें अपने लोगों को फायदा पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं. राजस्थान की संस्कृति, जयपुर की ऐतिहासिक विरासत और धरोहरों को सहेजने की जरूरत है, लेकिन सरकार इस दिशा में अपेक्षित काम नहीं कर रही है.उन्होंने सवाल किया कि राजस्थान के संस्कृति और जयपुर की विरासत को बचाने की सरकार की ठोस योजना क्या है?.

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3 साल की कैबिनेट बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक करें: जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से 3 साल की कैबिनेट बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा, सरकार जनता को बताए कि इन बैठकों में राजस्थान के हितों पर कितने फैसले लिए गए. कैबिनेट बैठकों में जन हित के फैसले होते है या अपने लोगों को जमीन देने के. जूली ने कहा, भाजपा से जुड़े लोग ही बांधों में अतिक्रमण कर रहे हैं. उनके कई विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. जूली ने कहा कि हाईकोर्ट सरकार को रामगढ़ बांध में अतिक्रमण मामले में कई बार फटकार चुका है. अतिक्रमण के कारण बारिश का पानी बांधों तक नहीं पहुंच पा रहा ह़ै. इसके बावजूद सरकार विधानसभा में अतिक्रमण नहीं होने की बात कहती है, जबकि मीडिया में लगातार अतिक्रमण की खबरें आ रही हैं. सरकार को वो अतिक्रमण दिखाई नहीं देते हैं.

छात्रसंघ चुनाव कराने पड़ेंगे: नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूरे प्रदेश में युवा छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग लेकर आंदोलन कर रहे हैं. सरकार को छात्रसंघ चुनाव जल्दी शुरू करना चाहिए. छात्रसंघ चुनाव युवाओं की आवाज है और सरकार इस आवाज को दबा नहीं सकती है. इससे पहले जूली राजस्थान कांग्रेस के सामाजिक न्याय अधिकारिता प्रकोष्ठ की पीसीसी मुख्यालय से शहीद स्मारक तक तिरंगा मार्च में भी शामिल हुए.

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