आरक्षण का पेंच सुलझेगा तब होंगे चुनाव, राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले
आरक्षण का पेंच सुलझेगा तब होंगे चुनाव, राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच OBC आरक्षण को लेकर फंसा हुआ है। पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र में बताया कि ओबीसी आयो…

सौजन्य से:- Hindustan
आरक्षण का पेंच सुलझेगा तब होंगे चुनाव, राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले
पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच OBC आरक्षण को लेकर फंसा हुआ है। पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र में बताया कि ओबीसी आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए 14 अगस्त 2026 तक का समय मांगा है।
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश में 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराना अब संभव नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया का लंबित होना है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव संपन्न कराने में कम से कम 90 दिन का समय लगेगा। ऐसे में अब प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव सितंबर के अंत या अक्टूबर-नवंबर के दौरान होने की संभावना जताई जा रही है।
हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए थे कि प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 31 जुलाई 2026 तक कराए जाएं। हालांकि, चुनाव की तैयारी के लिए जरूरी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इसी कारण तय समयसीमा में चुनाव कराना संभव नहीं माना जा रहा।
OBC आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच OBC आरक्षण को लेकर फंसा हुआ है। पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र में बताया कि ओबीसी आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए 14 अगस्त 2026 तक का समय मांगा है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही पंचायत और निकायों में आरक्षण की अंतिम सूची तैयार की जा सकेगी।
31 अगस्त तक तय होगा आरक्षण
पंचायती राज विभाग के अनुसार यदि ओबीसी आयोग 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंप देता है, तो विभाग 31 अगस्त 2026 तक अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए सभी पदों का आरक्षण निर्धारित कर देगा। इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
निर्वाचन आयोग ने बताया कितना लगेगा समय
पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा था कि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कराने में कितना समय लगेगा। इसके जवाब में आयोग ने साफ किया कि चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना या प्रेस विज्ञप्ति जारी होने के बाद चुनाव संपन्न कराने में कुल 90 दिन का समय लगेगा।
आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची, नामांकन, जांच, नाम वापसी, मतदान, मतगणना और परिणाम जैसी सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है। इसलिए निर्धारित समय से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।
चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश में पंचायतों की संख्या बढ़ने और उपलब्ध प्रशासनिक संसाधनों को देखते हुए पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 50 दिन का समय लगेगा।
चुनाव आयोग का मानना है कि एक साथ सभी पंचायतों में चुनाव कराने के बजाय चरणबद्ध तरीके से मतदान कराना प्रशासनिक दृष्टि से अधिक व्यावहारिक होगा।
दो चरणों में होंगे निकाय चुनाव
वहीं नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में कराने की योजना है। आयोग के अनुसार नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के चुनाव कराने में करीब 40 दिन का समय लगेगा। पंचायत और निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया मिलाकर कुल 90 दिन का समय आवश्यक बताया गया है।
अब कब हो सकते हैं चुनाव?
यदि OBC आयोग 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंप देता है और पंचायती राज विभाग 31 अगस्त तक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर देता है, तो उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। आयोग की तय 90 दिन की समयसीमा को देखते हुए प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर या नवंबर 2026 के बीच कराए जाने की संभावना है।
सरकार और आयोग नियमों के तहत आगे बढ़ रहे
राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही कराई जाएगी। आरक्षण निर्धारण के बिना चुनाव कराना संभव नहीं है, इसलिए पहले सभी आरक्षण संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
फिलहाल स्पष्ट हो गया है कि हाईकोर्ट द्वारा तय 31 जुलाई की समयसीमा के भीतर पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव नहीं हो पाएंगे। अब प्रदेश की नजर OBC आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पर टिकी हुई है, जिसके पूरा होने के बाद ही चुनावी बिगुल बज सकेगा।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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