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कोटा में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग, डायलिसिस कराने से ही इनकार किया जा रहा

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद वहां पर मरीजों और उनके परिजनों ने किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की। सूत्र बताते हैं कि मरीजों का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

Navbharat Times के अनुसार16 जुलाई 2026 को 04:12 am बजे
कोटा में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग, डायलिसिस कराने से ही इनकार किया जा रहा

सौजन्य से:- Navbharat Times

डायलिसिस नहीं, हो किडनी ट्रांसप्लांट, नहीं तो दे दीजिए इच्छा मृत्यु, कोटा में मां बनीं महिलाओं का छलका दर्द

Authored by: खुशेंद्र तिवारी|नवभारतटाइम्स.कॉम•

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं के केस बिगड़ने के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया। किडनी खराब होने के बाद अब अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं और उनके परिजनों ने डायलिसिस कराने से साफ इनकार कर दिया है।

डायलिसिस नहीं हो किडनी ट्रांसप्लांट

बुधवार को प्रसूता पिंकी और आरती का डायलिसिस निर्धारित था, लेकिन दोनों ने डायलिसिस कराने से मना कर दिया। इसके बाद वे अपने परिजनों के साथ अस्पताल परिसर के बाहर आ गईं। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि लगातार डायलिसिस के बजाय मरीजों के स्थायी उपचार के लिए किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जानिए क्या कहा

वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीजों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी पांचों प्रसूताओं का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में लगातार जारी है और सभी की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले लगभग तीन महीने तक दवाओं और अन्य उपचार के माध्यम से किडनी की कार्यक्षमता सुधारने का प्रयास किया जाता है। यदि इसके बाद भी आवश्यकता महसूस होती है, तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम किडनी ट्रांसप्लांट के संबंध में निर्णय लेती है।आरोपों को निराधार बताया

डॉ. जैन ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि मरीजों या उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या है तो वे सीधे अस्पताल प्रशासन से संपर्क करें, उसका समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पांचों मरीजों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज भी किया जा सकता है। परिजन चाहें तो मरीजों को घर ले जाकर आवश्यकता पड़ने पर डायलिसिस के लिए अस्पताल ला सकते हैं।निशुल्क किया जा रहा इलाज

प्राचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान सरकार की ओर से सभी प्रसूताओं का इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जा रहा है। साथ ही उपचार का पूरा खर्च सरकार वहन कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि मरीजों के हित में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे की चिकित्सा प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।कन्वर्सेशन शुरू करें

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