शस्त्र, शास्त्र और साफा का संगम: जयपुर की बेटियां सीख रहीं आत्मरक्षा, संस्कार और संस्कृति का गौरव
शस्त्र, शास्त्र और साफा का संगम: जयपुर की बेटियां सीख रहीं आत्मरक्षा, संस्कार और संस्कृति का गौरव बेटियां आत्मरक्षा, संस्कार और संस्कृति का अनूठा प्रशिक्षण लेकर स्वयं को सशक्त बनाने में जुटी हैं. Published : June 9, 2026…

सौजन्य से:- ETV Bharat
शस्त्र, शास्त्र और साफा का संगम: जयपुर की बेटियां सीख रहीं आत्मरक्षा, संस्कार और संस्कृति का गौरव
बेटियां आत्मरक्षा, संस्कार और संस्कृति का अनूठा प्रशिक्षण लेकर स्वयं को सशक्त बनाने में जुटी हैं.
Published : June 9, 2026 at 9:29 PM IST
जयपुर : तलवारों की खनक, बुलंद हौसले और रंग-बिरंगे साफों की शान के बीच जयपुर में इन दिनों शस्त्र, शास्त्र और संस्कार का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. जहां ग्रीष्मकालीन अवकाश में अधिकांश बच्चे मनोरंजन और घूमने-फिरने में व्यस्त रहते हैं, वहीं शहर की बालिकाएं आत्मरक्षा, भारतीय संस्कारों और राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति का प्रशिक्षण लेकर स्वयं को सशक्त बनाने में जुटी हैं.
शौर्य संस्कार सेवा संगठन की ओर से संचालित एक माह के निःशुल्क शौर्य एवं संस्कार प्रशिक्षण शिविर में 8 से 16 आयु वर्ग की करीब 80 बालिकाएं भाग ले रही हैं. शिविर में बालिकाओं को तलवारबाजी, लाठी संचालन, दंड शास्त्र, आत्मरक्षा तकनीक, योग, संस्कृत श्लोक, नैतिक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके साथ ही राजस्थान की आन-बान-शान का प्रतीक साफा बांधने की कला भी सिखाई जा रही है.
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करारा जवाब देने का हुनर : नन्हें हाथों में तलवार और लाठी थामे बालिकाएं आत्मविश्वास के साथ विभिन्न युद्धक कौशल का अभ्यास करती नजर आती हैं. यह प्रशिक्षण केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिकाओं में साहस, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास भी करता है. शौर्य संस्कार सेवा संगठन की संस्थापिका विजयलक्ष्मी शेखावत ने बताया कि शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाना है.
वर्तमान समय में बेटियों का आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी होना बेहद आवश्यक है. इसी सोच के साथ उन्हें आत्मरक्षा के आधुनिक कौशल के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से भी जोड़ा जा रहा है. एक महीने चलने वाले इस शिविर में बेटियां तलवारबाजी के दांव-पेंच सीखकर मनचलों और असामाजिक तत्वों को करारा जवाब देने का हुनर हासिल कर रही हैं. दूसरी ओर एक-दूसरे के सिर पर आकर्षक अंदाज में साफा बांधकर राजस्थानी संस्कृति की विरासत को भी सहेज रही हैं.
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परंपराओं और संस्कृति से जुड़ना अत्यंत प्रेरणादायक : शिविर में पहुंची भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनीषा सिंह ने बालिकाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिकता के इस दौर में शस्त्र, शास्त्र और साफा के माध्यम से बेटियों का अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ना अत्यंत प्रेरणादायक है. आज की बेटियां केवल शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और आत्मरक्षा के क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम कर रही हैं. राजस्थान की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का यह प्रयास समाज के लिए सकारात्मक संदेश है.
शस्त्र, शास्त्र और साफा का अनूठा संगम : नन्हें हाथों में थमी तलवारें केवल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि नारी शक्ति के जागरण का संदेश भी दे रही हैं. बेटियां यह साबित कर रही हैं कि वे अब केवल परंपराओं की संरक्षक ही नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए स्वयं सक्षम और सजग भी हैं.
आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति रुचि : शिविर में गुरु खुशी नरूका विशेष रूप से बालिकाओं को तलवारबाजी और लाठी संचालन का प्रशिक्षण दे रही हैं. उनके मार्गदर्शन में बालिकाएं शौर्य और आत्मरक्षा के गुर सीख रही हैं. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का आरंभ प्रतिदिन ज्योतिर्विद पंडित फणींद्र शास्त्री की ओर से संस्कृत श्लोकों के अभ्यास से कराया जाता है. इससे बालिकाओं में भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति रुचि विकसित हो रही है. वहीं, योगालय के संस्थापक आशुतोष सक्सेना नियमित योग और प्राणायाम का प्रशिक्षण देकर प्रतिभागियों के शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता को मजबूत बना रहे हैं. खुशी कहती हैं कि तलवारबाजी और आत्मरक्षा सीखने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है. वहीं, साफा बांधने जैसी पारंपरिक कला सीखकर उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस होता है.
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