‘हमें किडनी दो या मौत दे दो’, कोटा की पांच प्रसूताओं ने राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू को लिखा पत्र - Jansatta
राजस्थान के कोटा के एक सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन कराने वाली पांच प्रसूता ने राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इमरजेंसी अंग प्रत्यारोपण कराने की मांग की है। महिलाओं ने पत्र में कहा कि या तो उन्हें सर्जरी करानी चाहि…

सौजन्य से:- Jansatta
राजस्थान के कोटा के एक सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन कराने वाली पांच प्रसूता ने राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इमरजेंसी अंग प्रत्यारोपण कराने की मांग की है। महिलाओं ने पत्र में कहा कि या तो उन्हें सर्जरी करानी चाहिए या उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जानी चाहिए।
अपने पत्र में, कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में 5 से 7 मई के बीच सी-सेक्शन कराने वाली वाली और तब भी अस्पताल में भर्ती पांच महिलाओं ने इलाज के दौरान लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि नकली दवाओं के कारण उनके गुर्दे (किडनी) को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण उन्हें नियमित डायलिसिस पर निर्भर रहना पड़ता है।
दो माह में 19 महिलाओं की गई जान
यह घटना पिछले दो महीनों में प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण कम से कम 19 महिलाओं की मौत के बाद सामने आई है, जिनमें से पांच की मृत्यु कोटा के इसी अस्पताल में हुई थी।
अपने पत्र में राष्ट्रपति से महिलाओं ने कहा कि उन्होंने सभी रास्ते अजमा कर देख लिए हैं वे तत्काल प्रत्यारोपण, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पर्याप्त मुआवजे की मांग कर रही है या फिर, अगर ऐसा नहीं हो सकता तो इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए क्योंकि उनके पास अब गरिमापूर्ण जीवन जीने का कोई तरीका नहीं बचा है। सभी पांच महिलाओं को अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में भर्ती कराया गया है।
‘मुख्यमंत्री तक से नहीं मिला न्याय’
महिलाओं में से एक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमने कोटा के कलेक्टर, कोटा बूंदी सांसद और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बार-बार संपर्क किया, लेकिन न तो हमें न्याय मिला और न ही पर्याप्त मेडिकल या फाइंनेशियल सपोर्ट। किडनी की खराबी, फेफेड़ों में पानी भरना, सांस लेने में तकलीफ और आक्सीजन की जरूरत के साथ-साथ हर 48 घंटे में दर्दनाक डायलिसिस से गुजरना हमें थका और निराश कर देता है। हमारी गंभीर बीमारी ने परिवार को गंभीर आर्थिक तंगी में डाल दिया है क्योंकि हमारे पतियों ने हमारी देखभाल के लिए नौकरी छोड़ रखी है।”
बीमार महिलाओं में से एक धन्नी बाई के पति ने कहा, “उनकी पत्नी अब डायलिसिस से डरती है। हम कब तक ऐसे ही चलते रहेंगे? हर बार जब वह डायलिसिस के लिए जाती है, तो उसे उल्टी होती है और रात को नींद आती। उसे अस्पताल में भर्ती हुए 72 दिन हो चुके हैं। अब मेरी पत्नी और अन्य महिलाओं ने डायलिसिस कराने के मना कर दिया है और वे अब किडनी ट्रांसप्लांट करवाना चाहती हैं।”
दो सप्ताह में मामले बढ़े
यह खबर ऐसे समय में आई है जब पिछले दो सप्ताह में राज्य में मातृ मृत्यु के मामले बढ़ गए हैं। भीलवाड़ा में पांच और बांसवाड़ा में चार महिलाओं की मौत हो चुकी है जबकि बीकानेर में एक और मौत की खबर सामने आई है। इन मौतों ने राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़ कर दिए हैं। राज्य सरकार ने इन मौत मामलों की जांच कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कही ये बात
पिछले सप्ताह हुई मौत के बाद बांसवाड़ा का दौरा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने दावा किया कि बांसवाड़ा में हुई चार मौतों में से दो का संबंध प्रसव से था। उन्होंने कहा, “एक महिला ने दो माह की गर्भावस्था में डॉक्टर से सलाह लिए बिना गर्भपात की गोलियां खा लीं और एक महिला मध्य प्रदेश से आई थी और यात्रा के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई। शेष दो महिलाओं की मौत प्रसव पीड़ा के दौरान अत्याधिक बीपी बढ़ने और लीवर की समस्याओं के कारण हुई।”
14 जुलाई को भीलवाड़ा में जहां गजेंद्र सिंह खिमसर ने कहा, “खबरों में बताए गए पांच महिलाओं में से एक भी गर्भवती नहीं थी और उसे गर्भाशय के ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया था। उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।”
आगे कहा, एक अन्य महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अस्पताल में उसकी किसी भी प्रकार की सर्जरी नहीं की गई। इलाज के दौरान हाइपोवोलेमिक शॉक (रक्तस्राव की कमी) के कारण मौत हो गई। शेष तीन माताओं की मौत फुफ्फुसीय थ्रोम्बोम्बोलिज्म, एचईएलएलपी सिंड्रोम, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) और डीआईसी जैसी गंभीर चिकित्सा जटिलताओं के कारण हुई।”
इसी बीच, बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में एक 25 वर्षीय महिला की सीजेरियन के बाद एक महीने से अधिक समय तक परेशानी जूझने के बाद मौत हो गई।
यह भी पढ़ें: ‘जहां सुरक्षा का प्रश्न उठे, वहां राष्ट्र प्रधान रहे’, हाई कोर्ट ने भारत-पाक बॉर्डर पर मस्जिदें हटाने के खिलाफ याचिका की खारिज
राजस्थान हाई कोर्ट ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है और धार्मिक भेदभाव का मामला नहीं है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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