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राजस्थान की राजनीति में संवाद का गलत अर्थ

राजस्थान की राजनीति में हाल ही में घटी तीन घटनाओं ने सत्ता गलियारों में विवाद के दौर पैदा किया है। मुख्यमंत्री ने डिप्टी सीएम को 'मुख्यमंत्री' कहा, प्रदेशाध्यक्ष ने सीएम को 'पूर्व मुख्यमंत्री' कहा, और अब स्पीकर ने गहलोत को 'मुख्यमंत्री' कहा। यह संबोधन क्या दर्शाता है और इसका क्या अर्थ है? खासकर उन लोगों के लिए जो कूटनीति के माध्यम से सत्ता संचार करते हैं, इसका विश्लेषण जरूरी है। सूत्र: अमर उजाला

Amar Ujala के अनुसार16 जुलाई 2026 को 11:02 am बजे
राजस्थान की राजनीति में संवाद का गलत अर्थ

सौजन्य से:- Amar Ujala

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राजस्थान की राजनीति में जुबान का खेल: तीन 'स्लिप ऑफ टंग' और सत्ता के गलियारों में सौ सवाल

Thu, 16 Jul 2026 01:55 PM IST

Sourabh Bhatt

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

Published by: Sourabh Bhatt

Updated Thu, 16 Jul 2026 01:55 PM IST

सार

CM ने डिप्टी CM को 'मुख्यमंत्री' कहा, प्रदेशाध्यक्ष ने CM को 'पूर्व मुख्यमंत्री', अब स्पीकर ने गहलोत को 'मुख्यमंत्री'...जानिए राजस्थान की सियासत के गलियारों में इस 'स्लिप ऑफ टंग' की खूब हो रही है चर्चा।

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विस्तार

राजनीति में सार्वजनिक मंचों से कही जाने वाली बातों के मायने ढूंढे जाते हैं। अक्सर नेताओं के बयानों को लेकर कयास लगते हैं। राजस्थान की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही तीन दिलचस्प वाकये हुए हैं, जिन्होंने सत्ता के गलियारों में चर्चा का नया विषय खड़ा कर दिया है। तीन अलग-अलग मंच, तीन बड़े नेता और तीन बार ऐसा संबोधन, जिसने सुनने वालों को चौंका दिया।

किस्सों की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से हुई। एक सरकारी कार्यक्रम में उन्होंने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का नाम लेते हुए उन्हें "मुख्यमंत्री" कह दिया। मंच पर मौजूद लोगों ने इसे सामान्य भूल समझा, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर खूब चर्चा हुई।

यह चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि दूसरा किस्सा सामने आ गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का परिचय देते हुए उन्हें "पूर्व मुख्यमंत्री" कह दिया। मंच पर मौजूद नेताओं के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन सोशल मीडिया ने इस वीडियो को हाथोंहाथ उठा लिया।

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तीसरा और सबसे ताजा घटनाक्रम विधानसभा के भीतर हुआ। सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष अशोक गहलोत का जिक्र करते हुए उन्हें "मुख्यमंत्री" कह दिया। हालांकि कुछ ही क्षण बाद उन्होंने अपनी बात सुधार ली, लेकिन तब तक राजनीतिक गलियारों में एक और किस्सा जुड़ चुका था।

तीन घटनाएं... एक सवाल

संयोग देखिए-तीनों घटनाओं में संबोधन मुख्यमंत्री पद से जुड़ा रहा। कभी उपमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बन गए, कभी मुख्यमंत्री 'पूर्व मुख्यमंत्री' हो गए और कभी पूर्व मुख्यमंत्री फिर से 'मुख्यमंत्री' बन बैठे।

हालांकि बयान देने वालों के लिए यह महज 'स्लिप ऑफ टंग' है। राजनीतिक जानकरों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में लगातार भाषण देने वाले नेताओं से ऐसी चूक हो जाना असामान्य नहीं है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस पर चुटकियां भी ली जा रही हैं। कोई इसे सत्ता और संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं का असर बता रहा है तो कोई इसे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति कह रहा है।

सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज

तीनों घटनाओं के वीडियो और क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। यूजर्स ने इसे लेकर मीम्स बनाए और कई तरह की राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं। विपक्ष ने भी इन घटनाओं को सरकार पर निशाना साधने का मौका बनाया, जबकि भाजपा नेताओं ने इन्हें सामान्य मानवीय भूल करार दिया।

राजनीति में जुबान भी लिख देती है किस्से

राजनीति केवल फैसलों और बयानों से नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे किस्सों से भी याद रखी जाती है। राजस्थान की मौजूदा राजनीति में पिछले कुछ दिनों के ये तीन 'स्लिप ऑफ टंग' ऐसे ही किस्से बन गए हैं, जो सत्ता से ज्यादा सत्ता के आसपास की चर्चाओं को हवा दे रहे हैं। यह महज संयोग है, मंच की थकान है या अवचेतन मन की चूक—इसका जवाब शायद किसी के पास न हो, लेकिन इतना तय है कि इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में मुस्कुराने और सोचने, दोनों की वजह जरूर दे दी है।

स्लिप ऑफ टंग पर बेनीवाल ने ली चुटकी, बोले-पूछा हैं सीएम ?

स्लिप ऑफ टंग वाले बयानों को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर चुटकी ली। उन्होंने लिखा...संयोग ,प्रयोग ,विरोध या स्लीप ऑफ टंग ?

राजस्थान में इन दिनों संबोधनों की राजनीति कुछ ज़्यादा ही चर्चा में है। पहले मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी को "मुख्यमंत्री" कह दिया।फिर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मदन राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को "पूर्व मुख्यमंत्री" कहकर संबोधित कर दिया। और आज विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को "मुख्यमंत्री" कह दिया। अब सवाल यह है कि यह केवल संयोग है या फिर सत्ता और व्यवस्था के भीतर चल रहा कोई प्रयोग? कहीं ऐसा तो नहीं कि जुबान वही सच बोल रही है, जिसे राजनीति छिपाने की कोशिश कर रही है! राजस्थान की जनता भी सोच रही है कि आखिर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन है और सरकार किसके भरोसे चल रही है ?

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किस्सों की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से हुई। एक सरकारी कार्यक्रम में उन्होंने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का नाम लेते हुए उन्हें "मुख्यमंत्री" कह दिया। मंच पर मौजूद लोगों ने इसे सामान्य भूल समझा, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर खूब चर्चा हुई।

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यह चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि दूसरा किस्सा सामने आ गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का परिचय देते हुए उन्हें "पूर्व मुख्यमंत्री" कह दिया। मंच पर मौजूद नेताओं के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन सोशल मीडिया ने इस वीडियो को हाथोंहाथ उठा लिया।

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तीसरा और सबसे ताजा घटनाक्रम विधानसभा के भीतर हुआ। सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष अशोक गहलोत का जिक्र करते हुए उन्हें "मुख्यमंत्री" कह दिया। हालांकि कुछ ही क्षण बाद उन्होंने अपनी बात सुधार ली, लेकिन तब तक राजनीतिक गलियारों में एक और किस्सा जुड़ चुका था।

तीन घटनाएं... एक सवाल

संयोग देखिए-तीनों घटनाओं में संबोधन मुख्यमंत्री पद से जुड़ा रहा। कभी उपमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बन गए, कभी मुख्यमंत्री 'पूर्व मुख्यमंत्री' हो गए और कभी पूर्व मुख्यमंत्री फिर से 'मुख्यमंत्री' बन बैठे।

हालांकि बयान देने वालों के लिए यह महज 'स्लिप ऑफ टंग' है। राजनीतिक जानकरों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में लगातार भाषण देने वाले नेताओं से ऐसी चूक हो जाना असामान्य नहीं है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस पर चुटकियां भी ली जा रही हैं। कोई इसे सत्ता और संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं का असर बता रहा है तो कोई इसे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति कह रहा है।

सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज

तीनों घटनाओं के वीडियो और क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। यूजर्स ने इसे लेकर मीम्स बनाए और कई तरह की राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं। विपक्ष ने भी इन घटनाओं को सरकार पर निशाना साधने का मौका बनाया, जबकि भाजपा नेताओं ने इन्हें सामान्य मानवीय भूल करार दिया।

राजनीति में जुबान भी लिख देती है किस्से

राजनीति केवल फैसलों और बयानों से नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे किस्सों से भी याद रखी जाती है। राजस्थान की मौजूदा राजनीति में पिछले कुछ दिनों के ये तीन 'स्लिप ऑफ टंग' ऐसे ही किस्से बन गए हैं, जो सत्ता से ज्यादा सत्ता के आसपास की चर्चाओं को हवा दे रहे हैं। यह महज संयोग है, मंच की थकान है या अवचेतन मन की चूक—इसका जवाब शायद किसी के पास न हो, लेकिन इतना तय है कि इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में मुस्कुराने और सोचने, दोनों की वजह जरूर दे दी है।

स्लिप ऑफ टंग पर बेनीवाल ने ली चुटकी, बोले-पूछा हैं सीएम ?

स्लिप ऑफ टंग वाले बयानों को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर चुटकी ली। उन्होंने लिखा...संयोग ,प्रयोग ,विरोध या स्लीप ऑफ टंग ?

राजस्थान में इन दिनों संबोधनों की राजनीति कुछ ज़्यादा ही चर्चा में है। पहले मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी को "मुख्यमंत्री" कह दिया।फिर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मदन राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को "पूर्व मुख्यमंत्री" कहकर संबोधित कर दिया। और आज विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को "मुख्यमंत्री" कह दिया। अब सवाल यह है कि यह केवल संयोग है या फिर सत्ता और व्यवस्था के भीतर चल रहा कोई प्रयोग? कहीं ऐसा तो नहीं कि जुबान वही सच बोल रही है, जिसे राजनीति छिपाने की कोशिश कर रही है! राजस्थान की जनता भी सोच रही है कि आखिर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन है और सरकार किसके भरोसे चल रही है ?

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