नौकरी नहीं तो मान्यता नहीं: राजस्थान के पैरा एथलीटों का संघर्ष
राजस्थान सरकार ने 137 खिलाड़ियों की लिस्ट बनाई थी, लेकिन अब तक केवल 4 खिलाड़ियों को नौकरी मिली है। राकेश भैड़ा ने कहा कि अन्य खिलाड़ियों के साथ सरकार भेदभाव कर रही है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Rajasthan
- Jaipur
- No Jobs, No Grants; When Will The Rajasthan Government Issue Its Decree?
न नौकरी, ना अनुदान; राजस्थान सरकार कब जारी करेगी फरमान
- कॉपी लिंक
पिछले करीब 4 साल से खिलाड़ियों को न तो अनुदान मिला है और न ही आउट ऑफ टर्न में नौकरी। इसी के विरोध में खिलाड़ियों ने सोमवार को सवाई मानसिंह स्टेडियम में धरना दिया। खिलाड़ी गद्दे वगैरह बिछाकर ही धरने पर बैठ गए। करीब 7-8 घंटे 50 से ज्यादा खिलाड़ी धरने पर बैठे रहे। इनमें पैरालिंपिक मेडलिस्ट निशानेबाज मोना अग्रवाल, एशियन पैरा गेम्स मेडलिस्ट राकेश भैड़ा, अनिता के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट सुनील कुमार साहू भी उपस्थित थे।
50 लोगों की लिस्ट सीएम ने फाइनल की, उन्हें भी नौकरी नहीं मिली : सुनील साहू
पैरा एथलीट सुनील कुमार साहू ने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मेडल जीते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने 50 लोगों की लिस्ट फाइनल की थी। उनकी भी जॉइनिंग अभी तक नहीं हुई है। सरकार हमें सपोर्ट करेगी तो हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी अच्छा करेंगे। नौकरी मिलने से खिलाड़ी फाइनेंशियली स्ट्रॉंग होंगे तो देश और प्रदेश के लिए और ज्यादा पदक जीतेंगे।’ इनके अलावा भी काफी संख्या में पैरा और एबल बॉडी के खिलाड़ियों ने अनुदान और नौकरी नहीं मिलने के कारण धरना दिया। इनका कहना है कि न तो सरकार से मेडल का अनुदान मिल रहा है और न ही नौकरी मिल रही। सरकार ने 137 खिलाड़ियों की लिस्ट बनाई थी। यहां तक कि विधानसभा में भी यह बात बोली गई थी कि सरकार कांग्रेस सरकार से भी ज्यादा नौकरी देने जा रही है।
पैरा एशियन में मेडल जीता : राकेश
पैरा एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले राकेश भैड़ा ने कहा, ‘एशियन गेम्स और पैरा एशियन गेम्स में जिन खिलाड़ियों ने मेडल जीते थे उनमें से सिर्फ 4 खिलाड़ियों को ही पुलिस विभाग में डीवाईएसपी बनाया गया है। अन्य खिलाड़ियों के साथ सरकार भेदभाव क्यों कर रही है। इनमें तीन पैरा और 7 एबल बॉडी के खिलाड़ी भी शमिल हैं।’
जो पॉलिसी है उसके अनुसार मिले पद : मोना
पैरालिंपिक शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मोना अग्रवाल ने कहा, ‘सरकर की जो पॉलिसी है उसके अनुरूप नौकरी दी जानी चाहिए। पहले भी पैरालिंपिक मेडलिस्ट को ग्रेड-1 की नौकरी दी गई है। फिर मुझे इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। हम सम्मान के लिए लड़ रहे हैं।’ उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर से इन्हें शिक्षा विभाग में नौकरी ऑफर की गई है लेकिन पॉलिसी के अनुसार यह ग्रेड वन की नौकरी नहीं है। पहले पैरालिंपिक मेडलिस्ट खिलाड़ी वन विभाग में एसीएफ लगे हैं। हालांकि उनका मामला भी अभी तक विवाद में है। उन्हें विभाग ने परमानेंट नहीं किया है।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

जयपुर में 35 लाख की ज्वेलरी लूट के मामले में तीनों आरोपी गिरफ्तार, क्या कह रहे हैं वे...

रातों-रात 18 आईपीएस अफसरों के तबादले, जोधपुर कमिश्नर फिर बदले: रिफाइनरी से जुड़े एसपी फील्ड से बाहर

काशीपुर से लापता युवती 10 दिन बाद अजमेर से सकुशल बरामद


