Jaipur News: इलाज नहीं, ठगी का नेटवर्क चला रहे थे डॉक्टर, डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़
Jaipur News: इलाज नहीं, ठगी का नेटवर्क चला रहे थे डॉक्टर, डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़ Jaipur News In Hindi: जयपुर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के सदस…

सौजन्य से:- ABP News
Jaipur News: इलाज नहीं, ठगी का नेटवर्क चला रहे थे डॉक्टर, डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़
Jaipur News In Hindi: जयपुर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के सदस्य एमबीबीएस डॉक्टर हैं, 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके सदस्य पढ़े-लिखे डॉक्टर हैं. विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल पेशे में जाने के बजाय इन युवकों ने साइबर अपराध का रास्ता चुन लिया. श्याम नगर थाना पुलिस ने इस मामले में गिरोह के दो अहम सदस्यों गणेश चौधरी और दुष्यंत जांगिड़ को गिरफ्तार किया है.
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी गणेश चौधरी और गिरोह का फरार मास्टरमाइंड सुनील बिश्नोई उर्फ कार्तिक ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी.
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पढ़ाई के दौरान दोनों की दोस्ती हुई और बाद में वे साइबर अपराध के नेटवर्क से जुड़ गए. आरोप है कि दोनों ने मिलकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये ठगने का संगठित नेटवर्क तैयार कर लिया.
75 वर्षीय महिला डॉक्टर से 24 लाख की ठगी
गिरोह की सबसे चर्चित वारदात जयपुर की 75 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ हुई. ठगों ने खुद को ईडी और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला को लगातार 4 दिनों तक वीडियो कॉल और फोन पर डराया.
उन्हें बताया गया कि उनका बैंक खाता आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है. गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर आरोपियों ने महिला से 24 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए.
बेंगलुरु में भी किया बड़ा साइबर फ्रॉड
पुलिस के अनुसार जयपुर की वारदात के तुरंत बाद इसी गिरोह ने बेंगलुरु में भी 40 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया. जांच में पता चला कि आरोपी विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे. इन खातों में ठगी की रकम जमा कराई जाती थी और बाद में यूएसडीटी जैसी डिजिटल करेंसी खरीदकर पैसों का ट्रैक छिपाने की कोशिश की जाती थी.
पुलिस का कहना है कि फरार मास्टरमाइंड सुनील बिश्नोई उर्फ कार्तिक फर्जी दस्तावेजों और बदली हुई पहचान के जरिए बैंक खाते खुलवाता था. वह लगातार अपने ठिकाने और पहचान बदलता रहता था, ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सके. फिलहाल उसकी तलाश जारी है.
भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 32 एटीएम कार्ड, 12 चेकबुक, 9 पासबुक, 8 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 2 रबर स्टाम्प और 1.27 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. साइबर पोर्टल पर इस गिरोह और उसके नेटवर्क के खिलाफ देशभर से 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं.
पुलिस ने लोगों को आगाह करते हुए कहा है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती. अगर कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है या गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी जानकारी पुलिस को दें.
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