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Jaipur JDA Action: 1981 में बनी, 2026 में ध्वस्त, क्या था नूरानी मस्जिद का इतिहास, जानें

जयपुर के मालवीय नगर क्षेत्र में 'ऑपरेशन 80 फीट' के तहत सुबह से जेडीए की कार्रवाई जारी है। इसके तहत 44 साल पुरानी नूरानी मस्जिद, 2 मंदिर, मज़ार और चबूतरे को ध्वस्त किया गया। नूरानी मस्जिद को लेकर यह जानकारी है कि यह 1981…

Navbharat Times के अनुसार9 जून 2026 को 04:34 am बजे
Jaipur JDA Action: 1981 में बनी, 2026 में ध्वस्त, क्या था नूरानी मस्जिद का इतिहास, जानें

सौजन्य से:- Navbharat Times

जयपुर के मालवीय नगर क्षेत्र में 'ऑपरेशन 80 फीट' के तहत सुबह से जेडीए की कार्रवाई जारी है। इसके तहत 44 साल पुरानी नूरानी मस्जिद, 2 मंदिर, मज़ार और चबूतरे को ध्वस्त किया गया। नूरानी मस्जिद को लेकर यह जानकारी है कि यह 1981 में बनी थी।

जयपुर: गुलाबी शहर के तौर पर पहचानी जाने वाली राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज सुबह से ही जेडीए कार्रवाई को लेकर चर्चा है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की ओर से जयपुर के मालवीय नगर और जगतपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत कुल पांच धार्मिक ढांचों को हटाने की कार्रवाई हुई, जिसमें 2 मंदिर, 1 मस्जिद, 1 मज़ार, 1 चबूतरा ((सत्संग भवन)) तोड़ने की कार्रवाई हुई है। अभी कुछ देर पहले ही जेडीए ने 1981 में बनी नूरानी मस्जिद को ध्वस्त किया है। बताया जाता है कि ये नूरानी मस्जिद जयपुर में इस क्षेत्र के लोगों के बीच खास पहचान रखती थी। इसका इतिहास काफी पुराना है।

क्या है नूरानी मस्जिद का इतिहास

मस्जिद कमेटी के अनुसार, इस नूरानी मस्जिद का निर्माण साल 1981 में करीब 391 वर्ग गज भूमि पर किया गया था। पिछले 44 सालों से यहां नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज अदा की जा रही थी, जिसमें सैकड़ों स्थानीय लोग शामिल होते थे। मिली जानकारी के अनुसार इस जमीन को 2 जुलाई 1981 को अब्दुल रहमान मंसूरी नामक व्यक्ति की ओर से खरीदा गया था। मस्जिद कमेटी का दावा है कि यह जमीन जेडीए (JDA) से अप्रूव्ड एक स्थानीय सोसाइटी से खरीदी गई थी। जमीन खरीदने के बाद, स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके जन सहयोग से इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। तब से यहां नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज़ और धार्मिक आयोजन होते आ रहे थे।

1988 में वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड होने का दावा

मस्जिद के इतिहास से जुड़े दस्तावेजों को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि इस इबादतगाह को 28 अप्रैल 1988 को राजस्थान वक्फ बोर्ड में विधिवत रूप से पंजीकृत (रजिस्टर्ड) कराया गया था। यह भी जानकारी दी जा रही है कि, मस्जिद कमेटी ने वर्ष 1994 में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को बाकायदा विकास शुल्क का भुगतान भी किया था। कमेटी ने यह भी कहना है कि निर्माण के बाद से तीन दिन पहले नोटिस मिलने तक किसी भी सरकारी प्राधिकरण ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर अवैध घोषित नहीं किया था।

जेडीए ने क्यों की यह कार्रवाई

मालवीय नगर और जगतपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रहे गतिरोध को दूर करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 'ऑपरेशन 80 फीट' के तहत आज अपनी कार्रवाई को अंतिम रूप दे दिया। ऑपरेशन 80 फीट" के तहत जेडीए ने यह भी पाया कि मस्जिद का यह चार मंजिला ढांचा सड़क की तय सीमा (राइट ऑफ वे) के भीतर आ रहा है, जिसके कारण इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मानकर हटाने का फैसला किया गया। इसके विरोध में मस्जिद कमेटी ने आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं, लेकिन प्रशासन ने सड़क परियोजना को जनहित में जरूरी बताते हुए इसे अंततः ढहा दिया।

पहले चरण में अवैध मकानों को किया गया था ध्वस्त

जेडीए के मुताबिक, मालवीय नगर क्षेत्र में लंबे समय से लंबित सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जाना बेहद जरूरी है। इस विकास परियोजना के लिए जेडीए ने कुछ समय पहले कुल 143 नोटिस जारी किए थे। इसमें से कार्रवाई के पहले चरण के तहत 22 मई को ही 134 अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया गया था, लेकिन उस समय कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए धार्मिक स्थलों को नहीं छुआ गया था। अब दूसरे चरण में इन सभी धार्मिक ढांचों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

छावनी में तब्दील पूरा इलाका, इंटरनेट बंद

सुबह करीब 7 बजे शुरू हुए इस ध्वस्तीकरण अभियान से पहले रविवार को ही पुलिस और प्रशासन ने इलाके में फ्लैग मार्च कर अपनी मुस्तैदी दिखा दी थी। सोमवार सुबह प्रशासन और भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई। असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने की आशंका को देखते हुए सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। । फिलहाल मौके पर भारी तनाव के बीच शांति व्यवस्था बनी हुई है। किसी भी तरह के विरोध और अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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