IAS-RAS की तैयारी से सीधे राजस्थान निकाय चुनाव के सियासी मैदान में उतरे Gen Z
IAS-RAS की तैयारी से सीधे राजस्थान निकाय चुनाव के सियासी मैदान में उतरे Gen Z युवा मतदाताओं के इस प्रभाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में भी पीढ़ी बदलने का संकेत दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक BJP के…

सौजन्य से:- Hindustan
IAS-RAS की तैयारी से सीधे राजस्थान निकाय चुनाव के सियासी मैदान में उतरे Gen Z
युवा मतदाताओं के इस प्रभाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में भी पीढ़ी बदलने का संकेत दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक BJP के करीब 51 फीसदी और कांग्रेस के करीब 49 फीसदी उम्मीदवार 40 साल तक की उम्र के हैं।
चुनावी मैदान में एक तरफ दशकों से राजनीति कर रहे पुराने चेहरे हैं, तो दूसरी तरफ सलवार-कुर्ता और वॉकिंग शूज पहनकर गांव की गलियों में घूमती 21 साल की नेहा जोशी भी है। कुछ दिन पहले तक टीवी चैनल में पत्रकारिता कर रही नेहा अब अलवर के थानागाजी से BJP के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ रही हैं। वह चारपाई पर बैठकर बुजुर्गों से बात करती हैं, खेतों में काम कर रही महिलाओं के बीच पहुंचती हैं और गांव की सफाई, पानी, सड़क और बिजली जैसे मुद्दों पर वोट मांग रही हैं।
नेहा का चुनाव लड़ने का फैसला भी अपने आप में नई पीढ़ी की राजनीति का संकेत देता है। वह कहती हैं कि अगर बदलाव की नीति लानी है तो शुरुआत खुद से करनी होगी। उनके मुताबिक वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए सिर्फ दूसरे जनप्रतिनिधियों की ओर देखने के बजाय उन्होंने खुद चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया।
नेहा अकेली नहीं हैं। राजस्थान के 309 नगर निकायों में इस बार BJP और कांग्रेस ने बड़ी संख्या में युवा चेहरों को मौका दिया है। करीब 1.40 करोड़ मतदाताओं वाले इन चुनावों में 18 से 25 साल के मतदाता करीब 14.7 फीसदी हैं, जबकि 26 से 35 साल की उम्र वाले मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 25.4 फीसदी है। यानी 35 साल तक की उम्र वाला बड़ा वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में है।
हर दूसरा उम्मीदवार 40 की उम्र के भीतर
युवा मतदाताओं के इस प्रभाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में भी पीढ़ी बदलने का संकेत दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक BJP के करीब 51 फीसदी और कांग्रेस के करीब 49 फीसदी उम्मीदवार 40 साल तक की उम्र के हैं।
इनमें भी 21 से 29 साल की उम्र वाले कई चेहरे सीधे Gen Z के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा जैसे प्रमुख शहरों के 510 वार्डों में BJP और कांग्रेस ने मिलकर करीब 70 Gen Z उम्मीदवारों को टिकट दिया है।
जयपुर में विद्याधर नगर के वार्ड नंबर 10 से BJP की 21 वर्षीय पलक यादव इसका उदाहरण हैं। महारानी कॉलेज की छात्रा पलक CA की पढ़ाई भी कर रही हैं और यह उनका पहला चुनाव है। प्रचार में उनकी मां और भाई भी साथ हैं। पलक का इंटरव्यू चल रहा हो और भाई बीच में आकर कह दे—‘मेरा भी इंटरव्यू लो’—तो चुनावी अभियान का अंदाज भी पारंपरिक राजनीति से थोड़ा अलग नजर आता है।
पलक का प्रचार महिलाओं और स्थानीय मतदाताओं से सीधे संवाद पर केंद्रित है। पूर्व निर्दलीय पार्षद कमलेश यादव ने उनके चुनाव अभियान की कमान संभाली है। मोहल्ले के लोगों के बीच पलक को लेकर यह उम्मीद भी सुनाई देती है कि नई उम्र का चेहरा स्थानीय समस्याओं को नए तरीके से उठा सकता है।
अजमेर में छात्र से लेकर निर्दलीय उम्मीदवार तक
अजमेर में भी युवा चेहरे BJP-कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मुकाबले में हैं। वार्ड नंबर 8 से 24 वर्षीय पंकज सिंह राठौड़ BJP के उम्मीदवार हैं। उनका फोकस स्थानीय विकास और लोगों की समस्याओं के समाधान पर है।
वार्ड नंबर 48 से कांग्रेस के 24 वर्षीय मोक्ष चुनाव लड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना और स्थानीय समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकताओं में है। वहीं वार्ड नंबर 40 से निर्दलीय काम्या सांखला भी सफाई और गंदगी जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही हैं।
जोधपुर में BJP ने सात और कांग्रेस ने 10 युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। झालामंड के वार्ड नंबर 51 से कांग्रेस की सरस्वती प्रजापति भी चुनाव लड़ रही हैं। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही हैं। उनके चुनावी मुद्दों में पेयजल, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याएं शामिल हैं।
अब चुनावी मैदान के साथ डिजिटल मैदान भी
Gen Z को साधने की लड़ाई सिर्फ वार्ड की गलियों में नहीं हो रही। सोशल मीडिया भी चुनाव प्रचार का नया मैदान बन चुका है। कांग्रेस ने युवाओं से सीधे संवाद के लिए ‘GenZ for Change’ अभियान शुरू किया है। पार्टी का डिजिटल और सोशल मीडिया नेटवर्क युवाओं तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है।
BJP सीधे ‘Gen Z’ शब्द पर जोर देने के बजाय ‘युवा वर्ग’ को टारगेट कर रही है। जिला और मंडल स्तर पर सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए रील आधारित कंटेंट तैयार किया जा रहा है। यानी पोस्टर, बैनर और नुक्कड़ सभाओं के साथ अब इंस्टाग्राम रील भी स्थानीय चुनावी प्रचार का हिस्सा है।
राजस्थान के निकाय चुनाव में इसलिए इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि युवा कितने वोट डालेंगे। असली सवाल यह है कि जो युवा खुद वोट मांगने मैदान में उतरे हैं, क्या वे स्थानीय राजनीति के तौर-तरीकों को भी बदल पाएंगे?
चारपाई पर बैठकर गांव की समस्या सुनती नेहा से लेकर CA की पढ़ाई के साथ चुनाव लड़ रही पलक तक—ये चेहरे बता रहे हैं कि निकाय चुनाव में Gen Z अब सिर्फ वोट बैंक नहीं रही। वह खुद सियासत का चेहरा बनने लगी है। अब नतीजे बताएंगे कि यह सिर्फ टिकट तक सीमित पीढ़ीगत बदलाव है या राजस्थान की स्थानीय राजनीति में सचमुच नई शुरुआत।
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