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सड़कें धंसने पर सिस्टम की पोल खुलती है: जयपुर में गड्ढों से जूझने की कहानी

जयपुर में बारिश शुरू होने के बाद शहर की सड़कें गड्ढे में समाने लगी हैं. टोंक रोड, कालावाड़ रोड, न्यू सांगानेर रोड, मानसरोवर सहित कई ठिकानों पर सड़कें धंसने से खतरा बढ़ गया है. प्रशासन की कार्रवाई केवल हादसे के बाद ही होती है, जिससे सवाल उठता है कि सड़कें बनती कैसे हैं?

AajTak के अनुसार7 जुलाई 2026 को 10:27 am बजे
सड़कें धंसने पर सिस्टम की पोल खुलती है: जयपुर में गड्ढों से जूझने की कहानी

सौजन्य से:- AajTak

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जयपुर में बारिश शुरू ही हुई है और सड़कों के धंसने का जानलेवा सिलसिला शुरू हो गया है. शनिवार को टोंक रोड के धंसने के बाद कालावाड रोड पर पूरी सड़क गड्डे में समा गई और अब मानसरोवर में सड़क पूरी तरह से धंस गई है. गुर्जर की थडी पर भी सड़क धंसने से आसपास के लोगों के लिए जान का खतरा हो गया है. रात को इनोवा गाड़ी इस गड्ढे में समा गई. हालांकि खड़ी खाली गाड़ी थी जिसकी वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. मौके पर ठेकेदार काम चलाऊ काम करके कट्टे में मिट्ठी भरकर डाल रहे हैं जबकि बाकी की सड़क भी धंसती जा रही है. कई जगह तो ईंट रखकर जनता को सावधान किया गया है जबकि अंदर से सड़क गुफा बन गई है.

जयपुर में बारिश की पहली बारिश और शहर की सड़कें गड्ढे में समाने लगी हैं.पहले टोंक रोड धंसी, फिर एक के बाद एक ऐसी ही तस्वीरें कालावाड़ रोड, न्यू सांगानेर रोड, मानसरोवर से भी सामने आईं, जिन्हें देखकर सवाल उठता है कि सड़कें बनी थीं या सिर्फ ऊपर से रंग-रोगन किया गया था?

सबसे हैरानी की बात ये है कि प्रशासन तब तक जागता ही नहीं, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए.पहले गड्ढा बनता है. फिर लोग सोशल मीडिया पर वीडियो डालते हैं. उसके बाद अधिकारी पहुंचते हैं और फिर शुरू होता है मिट्टी डालने और बैरिकेड लगाने का वही पुराना ड्रामा.

टैक्स जनता देती है, टेंडर ठेकेदार लेते हैं, लेकिन जब सड़क धंसती है तो सबसे पहले जनता ही गड्ढे में गिरती है. सवाल सिर्फ सड़क का नहीं है. सवाल उस सिस्टम का है, जो हर बार हादसे का इंतजार करता है और फिर उसे मरम्मत का नाम देकर भूल जाता है.

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जरा सोचिए... आप रात को परिवार के साथ गाड़ी चला रहे हों और अचानक पूरी सड़क आपके नीचे से गायब हो जाए. ये किसी हॉलीवुड फिल्म का सीन नहीं, बल्कि राजस्थान की राजधानी जयपुर की हकीकत है. अभी तो मानसून की शुरुआत हुई है और सड़कें ऐसे बैठ रही हैं, जैसे सालों से अंदर से खोखली हों. सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं... सवाल ये है कि आखिर ये सड़कें बनती कैसे हैं?

बारिश का पानी अभी ठीक से बरसा भी नहीं था कि न्यू सांगानेर रोड पर सड़क ने जवाब दे दिया. ऊपर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है. लेकिन नीचे पूरी जमीन खोखली हो चुकी है. सड़क अचानक धंस गई और देखते ही देखते बड़ा गड्ढा बन गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश में यही डर बना रहता है कि अगला नंबर किसका होगा, क्योंकि सड़क सिर्फ ऊपर से मजबूत दिखती है... अंदर की कहानी बिल्कुल अलग है.

गुर्जर की थड़ी... जहां हालात और भी डराने वाले हैं. रात के समय एक इनोवा कार सीधे धंसी हुई सड़क में समा गई. गनीमत रही कि गाड़ी खाली खड़ी थी, अगर उसमें कोई बैठा होता या कोई बाइक सवार गुजर रहा होता तो हादसा कितना बड़ा हो सकता था... इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. देखें VIDEO:-

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द्रव्यवती नदी के पास... जहां सामने बड़ा स्कूल है और रोज हजारों बच्चे, अभिभावक और गाड़ियां गुजरती हैं. यहीं सड़क का बड़ा हिस्सा धंस चुका है. बारिश का पानी पूरे सिस्टम की पोल खोल रहा है. सवाल ये है कि अगर यही सड़क स्कूल के व्यस्त समय में बैठ जाती... तो जिम्मेदारी कौन लेता? देखें VIDEO:-

गोपालपुरा और कालावाड़ रोड... कालावाड़ रोड पर तो पूरी सड़क ही गड्ढे में समा गई. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए तो प्रशासन हरकत में आया. लेकिन सवाल वही है... हर बार हादसे के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है? क्या पहले से जांच नहीं हो सकती? क्या सड़क बनने के समय गुणवत्ता की निगरानी सिर्फ कागजों में होती है? देखें VIDEO:-

जयपुर में अभी मानसून की शुरुआत है... और अगर शुरुआत इतनी खतरनाक है तो आगे क्या होगा? सड़कें बारिश से नहीं धंसतीं... सड़कें तब धंसती हैं जब निर्माण में ईमानदारी धंस जाती है... निगरानी धंस जाती है... और जवाबदेही धंस जाती है। आज गड्ढे में कार गिरी है... कल कोई बाइक सवार... कोई स्कूली बच्चा... या किसी परिवार की पूरी जिंदगी भी गिर सकती है.

हैरानी की बात ये है कि प्रशासन का समाधान भी कम दिलचस्प नहीं है. कहीं ईंट रख दी गई... कहीं मिट्टी से बोरी भरकर डाल दी गई... यानी इलाज ऐसा कि मरीज को देखकर डॉक्टर भी सोच में पड़ जाए. लेकिन असली खतरा अभी भी खत्म नहीं हुआ है.आसपास की सड़क लगातार धँस रही है और अंदर से कई जगह पूरी सड़क गुफा जैसी बन चुकी है. अब सवाल ये है कि जयपुर की सड़कें आखिर बारिश से डरती हैं... या भ्रष्टाचार के बोझ से टूट रही हैं?

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