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जयपुर की नई शहरी सरकार : एक ही सदन में दिखेगा Gen Z का जोश और 67 साल का अनुभव

जयपुर की नई शहरी सरकार : एक ही सदन में दिखेगा Gen Z का जोश और 67 साल का अनुभव जयपुर नगर निगम बोर्ड में आयु वर्ग के हिसाब से 40 से 49 साल के पार्षदों की संख्या सबसे अधिक 55 है. Published : September 21, 2026 at 7:11 AM IS…

ETV Bharat के अनुसार21 सितंबर 2026 को 02:05 am बजे
जयपुर की नई शहरी सरकार : एक ही सदन में दिखेगा Gen Z का जोश और 67 साल का अनुभव

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर की नई शहरी सरकार : एक ही सदन में दिखेगा Gen Z का जोश और 67 साल का अनुभव

जयपुर नगर निगम बोर्ड में आयु वर्ग के हिसाब से 40 से 49 साल के पार्षदों की संख्या सबसे अधिक 55 है.

Published : September 21, 2026 at 7:11 AM IST

जयपुर: एक ही सदन में तीन पीढ़ियों का जयपुर नजर आएगा. कोई 21 साल की उम्र में पहली बार शहर की सरकार का हिस्सा बना है, तो कोई 67 साल की उम्र में दशकों का अनुभव लेकर सदन में पहुंचा है. किसी ने अभी-अभी युवा उम्र की दहलीज पार की है, तो किसी ने बदलते जयपुर को कई दौर से गुजरते देखा है. जयपुर नगर निगम के नए बोर्ड में उम्र का ये फासला महज 46 साल का नहीं, बल्कि सोच, अनुभव और पीढ़ियों के बदलाव की पूरी कहानी है. 150 पार्षदों वाले इस बोर्ड की औसत उम्र 45.08 साल है. अब दिलचस्प ये होगा कि 21 से 67 साल तक की उम्र वाले ये जनप्रतिनिधि बदलते जयपुर की जरूरतों को अपनी-अपनी पीढ़ी के अनुभव और नजरिए से कैसे देखते हैं?

Gen Z से लेकर वरिष्ठ पीढ़ी तक: जयपुर की शहरी सरकार में Gen Z की एंट्री हो चुकी है. एक तरफ 21 साल के ऐसे पार्षद हैं, जिनकी उम्र उस दौर की है जब सोशल मीडिया, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्मार्टफोन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, तो दूसरी तरफ 60 पार कर चुके ऐसे पार्षद हैं जिन्होंने जयपुर को बदलते हुए कई दशकों से देखा है. यानी नए नगर निगम बोर्ड में एक ही सदन में Gen Z से लेकर वरिष्ठ पीढ़ी तक का प्रतिनिधित्व है. सबसे युवा और सबसे वरिष्ठ पार्षद के बीच 46 साल का अंतर है.

सबसे युवा पार्षद 21 साल के, सबसे उम्रदराज 67 साल की : नए बोर्ड के सबसे युवा पार्षदों में वार्ड 10 से निर्वाचित बीजेपी की पलक यादव और वार्ड 71 से निर्वाचित कांग्रेस के फाइज हसन शामिल हैं. दोनों की उम्र 21 साल है. दूसरी ओर, वार्ड 136 से निर्वाचित निर्दलीय पार्षद जमीला बेगम 67 साल की उम्र के साथ बोर्ड की सबसे उम्रदराज पार्षद हैं. वार्ड 118 की कांग्रेस की सुनीता गुप्ता मावर 66 साल की हैं. वहीं, वार्ड 17 के बीजेपी के सुमेर सिंह, वार्ड 42 के बीजेपी के अशोक रावतानी और वार्ड 43 के बीजेपी के शैलेंद्र भार्गव 65 साल के हैं. इस तरह बोर्ड में सबसे युवा और सबसे वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच 46 साल का अंतर है. एक ओर ऐसे पार्षद हैं जो पहली बार सार्वजनिक जीवन और नगर निगम की जिम्मेदारियों के शुरुआती दौर में हैं, तो दूसरी ओर ऐसे प्रतिनिधि भी हैं जो उम्र के लिहाज से कई पीढ़ियों के बदलाव के साक्षी रहे हैं.

40 से 49 साल की उम्र वाले सबसे ज्यादा: आयु वर्ग के हिसाब से बोर्ड में 40 से 49 साल के पार्षदों की संख्या सबसे अधिक 55 है. इसके बाद 30 से 39 साल के 38 पार्षद और 50 से 59 साल के 35 पार्षद हैं. 60 साल से ज्यादा उम्र के 14 पार्षद हैं, जबकि 30 साल से कम उम्र के 7 पार्षद चुने गए हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि बोर्ड में मध्य आयु वर्ग की मौजूदगी सबसे ज्यादा है. युवा प्रतिनिधियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद 30 साल से कम उम्र के 7 पार्षदों की मौजूदगी नई पीढ़ी की भागीदारी को सामने लाती है.

तीन पीढ़ियों का समावेश : राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद शर्मा ने कहा कि जयपुर नगर निगम के नए बोर्ड की खास बात ये है कि इसमें तीन पीढ़ियों का समावेश देखने को मिलेगा. उम्र के इस बड़े अंतर के साथ काम करने के अनुभव और कार्यशैली में भी अंतर स्वाभाविक है. एक तरफ Gen Z पीढ़ी है, जो टेक्नोलॉजी के साथ सहज है और एक क्लिक पर देश-दुनिया की जानकारी तक पहुंच रखती है, वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र के पार्षदों के पास वर्षों का सामाजिक और राजनीतिक अनुभव है. बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के रूप में अलग-अलग पीढ़ियों का ये प्रतिनिधित्व एक-दूसरे से सीखने का अवसर भी देगा. युवा पार्षद वरिष्ठों के अनुभव से सीख सकते हैं. वहीं अनुभवी पार्षद नई पीढ़ी की तकनीकी समझ और नए नजरिए को अपना सकते हैं. शर्मा के मुताबिक युवा जोश और अनुभव का ये तालमेल जयपुर के विकास के लिए उपयोगी साबित हो सकता है और नगर निगम के कामकाज में नई सोच को जगह दे सकता है.

अलग-अलग हो सकती हैं प्राथमिकताएं : सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, अतिक्रमण, पार्क, सार्वजनिक सुविधाएं और वार्ड स्तर की समस्याएं पार्षदों के रोजमर्रा के काम का हिस्सा हैं. ऐसे में अलग-अलग उम्र के प्रतिनिधियों के अनुभव और प्राथमिकताएं नगर निगम की कार्यशैली में किस तरह दिखाई देंगी, ये आने वाले समय में देखने वाली बात होगी. युवा पार्षदों के सामने वार्ड की समस्याओं को समझने, प्रशासनिक प्रक्रिया सीखने और नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी. वहीं, वरिष्ठ पार्षदों के लिए अपने अनुभव को मौजूदा शहरी जरूरतों और बदलती तकनीक के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण होगा.

औसत आयु नहीं, कामकाज बताएगा प्रदर्शन : बहरहाल, बोर्ड की औसत आयु 45 साल से कुछ अधिक होना एक सांख्यिकीय तथ्य है, लेकिन इससे ये तय नहीं होता कि बोर्ड कितना प्रभावी काम करेगा. शहर के नागरिकों के लिए असली सवाल ये होगा कि पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाते हैं. नगर निगम के संसाधनों का उपयोग कैसे होता है और विकास कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी रहती है. अब देखने वाली बात होगी कि Gen Z की डिजिटल सोच और वरिष्ठ पीढ़ी का अनुभव जयपुर की सफाई, ट्रैफिक, सड़क, अतिक्रमण और दूसरी शहरी चुनौतियों पर एक साथ किस तरह नजर आता है.

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