एमएसपी से नीचे बेचने को मजबूर किसान, राजस्थान उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका में नोटिस जारी किया
राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका में नोटिस जारी किया है, जिसमें किसानों के मांगों को देखा जा रहा है कि उन्हें एमएसपी से नीचे अपनी उपज बेचने से रोका जाए। अदालत ने एफसीआई, कृषि विकास सहकारी समिति और राजफेड को नोटिस जारी किया है और संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की चेतावनी दी गई है।

सौजन्य से:- Court Book
राजस्थान उच्च न्यायालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद से संबंधित एक जनहित याचिका (पीआईएल) का दायरा बढ़ाते हुए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), कृषि विकास सहकारी समिति और राजस्थान राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (राजफेड) को मामले में पक्ष बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि उठाए गए मुद्दे राज्य भर के किसानों को प्रभावित करते हैं और राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
जनहित याचिका रामपाल जाट द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि निर्धारित मानकों को पूरा करने के बावजूद किसानों को मक्का, बाजरा, मूंग और चना जैसी योग्य फसलों की खरीद से वंचित किया जा रहा है। याचिका के अनुसार, इससे काश्तकारों को एमएसपी से नीचे अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे वित्तीय नुकसान होता है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि मामला "गंभीर सार्वजनिक महत्व" का है।
पीठ ने कहा,
"प्रथम दृष्टया, बार में दी गई दलीलें किसानों की वास्तविक शिकायत को दर्शाती हैं। यह देखना कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य है कि किसानों की फसलें इस तरीके से बेची जाएं कि वे अपना जीवन यापन करने में सक्षम हो सकें।"
अदालत ने संबंधित प्रतिवादी को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिसमें एमएसपी खरीद के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया जाए और क्या अधिकारियों के पास पात्र फसलों की खरीद से इनकार करने का कोई विवेक है। इसने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को केंद्र सरकार और एफसीआई से निर्देश प्राप्त करने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट और सुझाव भी मांगे।
उच्च न्यायालय ने एफसीआई, कृषि विकास सहकारी समिति और राजफेड को नोटिस जारी किया और मामले को 30 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया। यह भी स्पष्ट कर दिया कि जवाब दाखिल करने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा, चेतावनी दी गई कि यदि अनुपालन नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
मामले का विवरण:
केस का शीर्षक: रामपाल जाट बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य।
केस नंबर: डी.बी. जनहित याचिका संख्या 11407/2018
न्यायाधीश: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा
निर्णय तिथि: 03 जुलाई 2026
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