होमक्राइमExplainer: कोटा मॉडल से खान सर तक, कितना बड़ा है कोचिंग बाजार; तीन दशक में कैसे बदली भारत की शिक्षा व्यवस्था?
क्राइम

Explainer: कोटा मॉडल से खान सर तक, कितना बड़ा है कोचिंग बाजार; तीन दशक में कैसे बदली भारत की शिक्षा व्यवस्था?

Explainer: कोटा मॉडल से खान सर तक, कितना बड़ा है कोचिंग बाजार; तीन दशक में कैसे बदली भारत की शिक्षा व्यवस्था? कभी कोटा की गलियों में शुरू हुई कोचिंग की कहानी आज खान सर, ऑनलाइन क्लास और हजारों करोड़ रुपये की इंडस्ट्री तक…

Amar Ujala के अनुसार10 जून 2026 को 01:01 pm बजे
Explainer: कोटा मॉडल से खान सर तक, कितना बड़ा है कोचिंग बाजार; तीन दशक में कैसे बदली भारत की शिक्षा व्यवस्था?

सौजन्य से:- Amar Ujala

Explainer: कोटा मॉडल से खान सर तक, कितना बड़ा है कोचिंग बाजार; तीन दशक में कैसे बदली भारत की शिक्षा व्यवस्था?

कभी कोटा की गलियों में शुरू हुई कोचिंग की कहानी आज खान सर, ऑनलाइन क्लास और हजारों करोड़ रुपये की इंडस्ट्री तक पहुंच चुकी है। इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी से शुरू हुआ यह मॉडल अब यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और सरकारी नौकरियों तक फैल चुका है। आखिर तीन दशक में भारत की कोचिंग इंडस्ट्री कितनी बड़ी हुई, किन शिक्षकों ने इसे ब्रांड में बदला, ऑनलाइन क्रांति ने क्या बदला और सफलता के इस मॉडल पर उठे सवाल क्या हैं? आइए समझते हैं भारत की कोचिंग इंडस्ट्री का पूरा सफर।

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

पटना के चर्चित शिक्षक खान सर बीते कई दिनों से सुर्खियों में हैं। खान ग्लोबल स्टडीज (केजीएस) में कथित तोड़फोड़, प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान से जुड़े आरोप, सुरक्षा गार्डों की कथित फायरिंग और पुलिस जांच ने उन्हें राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लेकिन यह कहानी सिर्फ खान सर या किसी एक विवाद की नहीं है। यह उस कोचिंग इंडस्ट्री की कहानी है जिसने पिछले तीन दशक में भारत की शिक्षा व्यवस्था के समानांतर एक विशाल तंत्र खड़ा कर दिया है।

आज मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, राज्य लोक सेवा आयोग, सेना भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए कोचिंग अनिवार्य सी मानी जाने लगी है। यही वजह है कि कभी छोटे-छोटे कमरों में चलने वाले कोचिंग संस्थान आज हजारों करोड़ रुपये के उद्योग में बदल चुके हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में कोचिंग उद्योग कितना बड़ा है? यह कैसे एक समानांतर तंत्र बना? इसके विस्तार के लिए कौन से कारक जिम्मेदार रहे? कोचिंग उद्योग में बड़े बदलाव कब आए? आगे इसके और कितना बड़ा होने का आसार है? किन शिक्षकों को इस उद्योग ने एक ब्रांड में बदल दिया? सफलता की कहानियों के बीच असफलता की किन कहानियों ने इस पर सवाल भी खड़े किए? आइये जानते हैं....

कितनी बड़ी है भारत की कोचिंग इंडस्ट्री?

भारत में कोचिंग संस्थान अब शिक्षा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण आर्थिक हिस्सा बन चुके हैं। बाजार अनुसंधान संस्था IMARC Group के अनुसार 2025 में भारत का कोचिंग संस्थान बाजार लगभग 7.2 अरब डॉलर यानी करीब 58 हजार करोड़ रुपये का था। अनुमान है कि 2034 तक यह बढ़कर 17.8 अरब डॉलर यानी लगभग एक लाख 69 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बढ़ती युवा आबादी, प्रतियोगी परीक्षाओं का विस्तार, सरकारी नौकरियों का आकर्षण और बेहतर करियर की चाहत इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।

भारत में कोचिंग इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ने के लिए कौन से कारक जिम्मेदार रहे?

1. स्कूल और प्रतियोगी परीक्षा के बीच अंतर

भारत की अधिकांश स्कूली शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं पर केंद्रित है। दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं का पैटर्न अलग होता है। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को लगता है कि केवल स्कूल शिक्षा पर्याप्त नहीं है। यही अंतर कोचिंग उद्योग के विस्तार का सबसे बड़ा कारक बना।

2. प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने की मारामारी

भारत में हर साल लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन सीटों और नौकरियों की संख्या सीमित है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार साल 2026 में JEE Main में कुल 11,10, 904 विद्यार्थी शामिल हुए। नीट यूजी में इस साल 22.79 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।  यूपीएससी में लाखों आवेदन आते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का होता है। एसएससी और रेलवे भर्ती परीक्षाओं में करोड़ों आवेदन देखे जाते हैं। जब प्रतियोगिता इतनी ज्यादा हो तो छात्र अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिए कोचिंग का सहारा लेते हैं।

3. सरकारी नौकरी का आकर्षण

निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ने के बावजूद सरकारी नौकरी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा और स्थिर आय आज भी युवाओं को आकर्षित करती है। यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में सरकारी नौकरी की तैयारी एक सामाजिक प्रवृत्ति बन चुकी है। इससे कोचिंग संस्थानों की मांग लगातार बढ़ रही है।

4. सामाजिक और पारिवारिक दबाव

कई शहरों और राज्यों में कोचिंग जाना सफलता की अनिवार्य शर्त माना जाने लगा है। छात्रों पर परिवार की अपेक्षाओं का दबाव भी होता है। कोटा, पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों में बेहतर कोचिंग की तलाश में परिवारों का स्थानांतरण तक देखने को मिलता है।

कोचिंग उद्योग कैसे एक समानांतर तंत्र बना?

भारत में कोचिंग उद्योग का सबसे बड़ा प्रतीक राजस्थान का कोटा शहर रहा है। आज जिस कोटा को देश की कोचिंग राजधानी कहा जाता है, उसकी कहानी 1985 में शुरू हुई थी। उस समय जे.के. सिंथेटिक्स में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले वी.के. बंसल ने अपने घर से छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में वे सातवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाते थे, बाद में दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाने लगे। 1985 में उनके एक छात्र ने IIT-JEE परीक्षा पास कर ली। इस सफलता ने वी.के. बंसल को एक नई दिशा दिखाई। उन्होंने बंसल क्लासेज की स्थापना की, जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों में से एक बन गया।

इसने कोटा में एक नई शैक्षणिक अर्थव्यवस्था को जन्म दिया। देखते ही देखते शहर में दर्जनों बड़े संस्थान खड़े हो गए और कोटा इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का राष्ट्रीय केंद्र बन गया। आज देश के कई शहर इस मॉडल को दोहरा रहे हैं। इसी तरह दिल्ली यूपीएसी की तैयारी का देश में सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। नीट पेपर लीक के दौरान चर्चा में आए सीकर में भी कोचिंग उद्योग बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है।

पटना क्यों बना नया कोचिंग हब?

पिछले दो दशक में पटना तेजी से उभरते कोचिंग केंद्र के रूप में सामने आया है। यहां एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, बीपीएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सैकड़ों संस्थान सक्रिय हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों छात्र यहां आते हैं। खान सर, आनंद कुमार, रोशन आनंद जैसे शिक्षकों का उदय भी इसी दौर में हुआ।

कोचिंग उद्योग में बड़े बदलाव कब आए?

2015-16 के दौर में इंटरनेट डेटा सस्ता होने के बाद कोचिंग उद्योग में भी बदलाव की शुरुआत हुई। जब बायजू, अनएकेडमी जैसे ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म चर्चित होने लगे। 2020 की कोरोना महामारी कोचिंग उद्योग के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई। जब ऑफलाइन कक्षाएं बंद हुईं तो संस्थानों को ऑनलाइन माध्यम अपनाना पड़ा। यूट्यूब, मोबाइल एप, लाइव क्लास और रिकॉर्डेड लेक्चर मुख्य माध्यम बन गए। ऑनलाइन पढ़ाने वाले कई शिक्षक भी इसी दौर में सुर्खियों में आए। इनमें अलख पांडेय, खान सर जैसे नाम शामिल थे। कई शिक्षक सोशल मीडिया स्टार बन गए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऑनलाइन कोचिंग की वृद्धि ऑफलाइन से भी तेज होगी।

इस बदलाव का क्या असर हुआ?

1. शिक्षा भौगोलिक सीमाओं से मुक्त हो गई।

2. छोटे शहरों के छात्रों को बड़े शिक्षकों तक पहुंच मिल गई।

3. शिक्षकों की लोकप्रियता राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।

कोचिंग उद्योग का शहरों की आर्थिक व्यवस्था क्या असर पड़ता है?

कोचिंग उद्योग केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। इससे कई अन्य क्षेत्र भी जुड़े हैं। कोटा, पटना और प्रयागराज जैसे शहरों में हॉस्टल, किराये के मकान, भोजनालय, पुस्तक बाजार, परिवहन और डिजिटल सेवाओं का बड़ा कारोबार छात्रों पर निर्भर है। यानी कोचिंग उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है।

आगे इसके और कितना बड़ा होने का आसार है?

सफलता की कहानियों के बीच असफलता की किन कहानियों ने इस पर सवाल भी खड़े किए?

बायजू की कहानी भारतीय स्टार्टअप जगत की सबसे बड़ी सफलता और सबसे बड़ी विफलता दोनों का उदाहरण है। 2011 में शुरू हुई यह एडटेक कंपनी कोविड काल में ऑनलाइन शिक्षा की बढ़ती मांग के कारण तेजी से बढ़ी और 2022 में इसकी वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर तक पहुंच गई। लेकिन आक्रामक विस्तार, महंगे अधिग्रहण, भारी कर्ज, वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल, ऑडिट में देरी, निवेशकों और कर्जदाताओं के साथ कानूनी विवाद, नकदी संकट और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े आरोपों ने कंपनी की नींव हिला दी। धीरे-धीरे निवेशकों का भरोसा टूटता गया, वैल्यूएशन ध्वस्त हो गई और कंपनी दिवालियापन व कानूनी लड़ाइयों में उलझ गई।

पिछले वर्ष इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान FIITJEE में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक संकट से घिर गया। दिल्ली-एनसीआर समेत नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और भोपाल के कई केंद्र बंद होने से सैकड़ों छात्रों और अभिभावकों की पढ़ाई प्रभावित हुई । ईडी की जांच में सामने आया है कि कोचिंग संचालकों ने इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के 4 वर्षीय कोर्स के लिए करीब 15 हजार छात्र छात्राओं से 250 करोड़ रुपए जुटाने के बाद जनवरी माह में अचानक कई शहरों में अपने केंद्र बंद कर दिए थे।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें

89K views · 2.2K reactions | राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले का एक गांव, इस्लामपुर, इन दिनों प्रदेश की राजनीति और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है. गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की मांग हो रही है. इसकी चर्चा गांव की गलियों से लेकर राजधानी जयपुर तक है.  

रिपोर्टः मोहर सिंह मीणा
वीडियो एडिटिंगः निमित वत्स | BBC News हिन्दी
राजनीति

89K views · 2.2K reactions | राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले का एक गांव, इस्लामपुर, इन दिनों प्रदेश की राजनीति और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है. गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की मांग हो रही है. इसकी चर्चा गांव की गलियों से लेकर राजधानी जयपुर तक है. रिपोर्टः मोहर सिंह मीणा वीडियो एडिटिंगः निमित वत्स | BBC News हिन्दी

जयपुर: पाकिस्तान तक फेसबुक से बना कॉन्टेक्ट, कलमा पढ़कर बनी 'खदीजा', महिला स्लीपर सेल गिरफ्तार
क्राइम

जयपुर: पाकिस्तान तक फेसबुक से बना कॉन्टेक्ट, कलमा पढ़कर बनी 'खदीजा', महिला स्लीपर सेल गिरफ्तार

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च
शिक्षा-करियर

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च

जयपुर में झमाझम बरसात, चूरू में ओले गिरे:  सीकर में गाड़ियां फंसी; पारा लुढ़का, लेकिन उमस बढ़ी; आज 20 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट - Jaipur News
कृषि

जयपुर में झमाझम बरसात, चूरू में ओले गिरे: सीकर में गाड़ियां फंसी; पारा लुढ़का, लेकिन उमस बढ़ी; आज 20 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट - Jaipur News