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CYBER CRIME : संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी

CYBER CRIME : संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी RPSC भर्ती पोर्टल प्रकरण के बाद साइबर क्राइम शाखा ने शैक्षणिक संस्थानों और संगठनों को किया सतर्क. Published : July 31, 2026 at 8:06 P…

ETV Bharat के अनुसार31 जुलाई 2026 को 03:16 pm बजे
CYBER CRIME : संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी

सौजन्य से:- ETV Bharat

CYBER CRIME : संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी

RPSC भर्ती पोर्टल प्रकरण के बाद साइबर क्राइम शाखा ने शैक्षणिक संस्थानों और संगठनों को किया सतर्क.

Published : July 31, 2026 at 8:06 PM IST

जयपुर: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर विस्तृत साइबर एडवाइजरी जारी करते हुए शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संगठनों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी है.

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि हाल ही में आरपीएससी भर्ती पोर्टल से जुड़े प्रकरण में पोर्टल में अनधिकृत प्रवेश कर राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा के परिणाम, अभ्यर्थियों की वरीयता सूची एवं आवेदन संबंधी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का मामला सामने आया. जिसमें अजमेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. इस घटना के मद्देनजर संस्थागत वेब पोर्टलों की सुरक्षा को और मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है.

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पोर्टल्स की 4 मुख्य तकनीकी कमजोरियां :

- यूजर द्वारा URL या Request में मौजूद ID (जैसे id = 1001) बदलकर दूसरे यूजर का डेटा देखना, जब सर्वर पर अनुमति की जांच नहीं होती.

- लॉगिन फॉर्म या सर्च बॉक्स में गलत SQL कमांड डालकर डेटाबेस को सीधे प्रभावित करना, जिससे साइबर अपराधी डेटाबेस से जानकारी पढ़, बदल या मिटा सकते हैं.

- संवेदनशील कार्य (जैसे पासवर्ड बदलना/रीसेट करना) करते समय वर्तमान पासवर्ड या सेशन की पुष्टि न होना.

- लॉगिन, ओटीपी या पासवर्ड रीसेट पर सीमित प्रयासों की पाबंदी न होना, जिससे ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए लाखों बार पासवर्ड का अनुमान लगाया जा सकता है.

यह है साइबर अपराधियों के काम करने का तरीका :

- साइबर अपराधी सबसे पहले HTTP रिक्वेस्ट और URL में कमजोरियों (जैसे recordID=501) की पहचान करते हैं.

- इसके बाद बॉट्स/स्क्रिप्ट्स के जरिए अलग-अलग IDs भेजकर सिस्टम की परमिशन चेकिंग का परीक्षण करते हैं.

- सुरक्षा में चूक मिलते ही अनधिकृत कमांड चलाकर संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं या रिकॉर्ड बदल देते हैं.

बचाव एवं सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय :

- प्रत्येक रिक्वेस्ट पर सर्वर-साइड ऑथराइजेशन जांचें. क्रमिक IDs (Sequential IDs) के स्थान पर UUID/GUID (रैंडम आइडेंटिफायर्स) का उपयोग करें.

- Prepared Statements, Parameterized Queries या ORM Framework का उपयोग करें. फॉर्म, URL, XML व JSON आदि सभी इनपुट की सर्वर-साइड वैलिडेसन (Validation & Sanitization) करें.

- पासवर्ड बदलने से पूर्व वर्तमान पासवर्ड की री-वेरिफिकेशन mandatory करें तथा संवेदनशील कार्यों के लिए Multi-Factor Authentication (MFA) लागू करें.

- लॉगिन, ओटीपी और पासवर्ड रीसेट पर सीमित प्रयासों की सीमा तय करें तथा बार-बार असफल प्रयासों पर अकाउंट को अस्थायी रूप से लॉक करें.

साइबर आपातकाल में यहां करें संपर्क : किसी भी प्रकार की साइबर सुरक्षा सेंधमारी या धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन पर संपर्क करना चाहिए. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं. इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 व 9257510100 पर तुरंत सूचित करें.

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