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'नागरिकों को जहर नहीं दे सकती सरकार': जोजरी-बांडी नदी प्रदूषण पर CS को होना पड़ेगा सुप्रीम कोर्ट में पेश

राजस्थान की जोजरी और बांडी नदियों में जहरीले औद्योगिक कचरे से हो रहे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि 55 हजार नौकरियों की आड़ में 20 लाख लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया…

Navbharat Times के अनुसार25 जुलाई 2026 को 04:32 am बजे
'नागरिकों को जहर नहीं दे सकती सरकार': जोजरी-बांडी नदी प्रदूषण पर CS को होना पड़ेगा सुप्रीम कोर्ट में पेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान की जोजरी और बांडी नदियों में जहरीले औद्योगिक कचरे से हो रहे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि 55 हजार नौकरियों की आड़ में 20 लाख लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

जयपुर: राजस्थान में नदियों के लगातार दूषित होते पानी और औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जोजरी और बांडी नदी में फैलते जहरीले रसायनों पर सख्त रुख अपनाते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार अपने नागरिकों को जहर देने की अनुमति नहीं दे सकती। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को सभी दिशा-निर्देशों का समयबद्ध पालन कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है और उन्हें 4 अगस्त को वर्चुअल रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।

'20 लाख जिंदगियों से खिलवाड़ मंजूर नहीं'

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि बिना ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे जहरीले औद्योगिक कचरे के कारण एक गांव के पीने के पानी का स्रोत पूरी तरह गुलाबी हो गया है। पीठ ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि 55 हजार कर्मचारियों के रोजगार या आर्थिक गतिविधियों की आड़ में करीब 20 लाख लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से समझौता नहीं किया जा सकता।

जयपुर की 2500 में से सिर्फ 143 टेक्सटाइल इकाइयों के पास मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर बेहद नाराजगी जताई। कोर्ट ने पाया कि जयपुर में काम कर रही लगभग 2,500 टेक्सटाइल प्रिंटिंग इकाइयों में से केवल 143 के पास ही वैध अनुमति है। बाकी की अनधिकृत इकाइयां बेधड़क नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। इसके अलावा, साल 2015 से अनिवार्य 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' मानकों को लागू करने में सरकार और प्रशासन पूरी तरह विफल रहे हैं।

अधिकारियों की मिलीभगत और सिस्टम फेलियर पर उठे सवाल

अदालत ने उन गंभीर आरोपों पर चिंता व्यक्त की जिनमें कहा गया है कि अधिकारियों ने जहरीले पानी को बहाने के लिए बांध के फाटक तक खुलवा दिए और सीईटीपी को बाईपास करने के लिए अवैध समानांतर पाइपलाइनों की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट ने उद्योग संघों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें बिना ट्रीट किए टैंकरों से कचरा बहाने या छूट देने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग इलाकों से आ रही रिपोर्ट प्रशासनिक व्यवस्था के फेल होने की ओर इशारा करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन सभी आरोपों की जांच करे, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय करे और अल्पकालिक व दीर्घकालिक सुधार के उपाय बताए।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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