राजस्थान में मुख्य सचिव का बदलना संभव नहीं, सरकार ने केंद्र के पास प्रस्ताव भेजा है
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश में अब नया सीएस कौन होगा, यह अभी तय नहीं है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। प्रदेश में अब नया सीएस कौन होगा? इसको लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का माहौल तेज है। सूत्रों के अनुसार वी. श्रीनिवास का कार्यकाल बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो CS की रेस में शामिल कई बड़े अफसरों के चहरे पर मायूसी छा सकती है।
जयपुर: राजस्थान की प्रशासनिक गैलरी में इन दिनों इस बात को लेकर जबरदस्त सुगबुगाहट चल रही है कि राज्य के सबसे शीर्ष प्रशासनिक पद यानी मुख्य सचिव (CS) की कमान किसके हाथों में रहेगी। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और वर्तमान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास आगामी 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालांकि, इस बीच प्रशासनिक गलियारों से आ रही बड़ी खबर यह है कि राज्य सरकार ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। यदि केंद्र से हरी झंडी मिलती है, तो मुख्य सचिव पद की रेस में शामिल अन्य वरिष्ठ अफसरों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
राज्य सरकार ने भेजा 1 साल के एक्सटेंशन का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को एक पत्र भेजकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को एक साल का सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्य सचिव को इस संबंध में अग्रिम जानकारी भी दे दी है। गौरतलब है कि 1989 बैच के आईएएस अधिकारी वी. श्रीनिवास ने 17 नवंबर 2025 को राजस्थान के मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया था। इससे पूर्व वह लंबे समय तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे।
जानिए कैसे मिलती है एक्सटेंशन की मंजूरी?
किसी भी राज्य के मुख्य सचिव को सेवा विस्तार देने की प्रक्रिया पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन होती है।
राज्य सरकार कग दी भेजा गया एक्सटेंशन का प्रस्ताव केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव के पास पहुंचता है।
इसके बाद सचिव की ओर से प्रस्ताव को 'कैबिनेट की नियुक्ति एवं सेवा विस्तार समिति' के समक्ष रखते हैं।
विभागीय प्रमुख होने के नाते प्रधानमंत्री स्वयं इस समिति के अध्यक्ष होते हैं।
प्रधानमंत्री की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही एक्सटेंशन का आधिकारिक आदेश जारी होता है।
रेस में शामिल दिग्गजों की उम्मीदों पर लग सकता है ब्रेक
यदि केंद्र सरकार वी. श्रीनिवास के सेवा विस्तार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, तो मुख्य सचिव पद के दावेदार माने जा रहे कई वरिष्ठ अधिकारियों की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग जाएगा। इस पद की रेस में अभय कुमार, रजत कुमार और अखिल अरोड़ा प्रमुख चेहरों के नाम चर्चा में हैं।
अभय कुमार: सबसे मजबूत दावेदारी पर लग सकता है ब्रेक!
मुख्य सचिव पद की रेस में अभय कुमार (1992 बैच) को सबसे आगे माना जा रहा था, लेकिन एक्सटेंशन के प्रस्ताव से उनकी उम्मीदों पर मायूसी छा सकती है। वरिष्ठता के साथ-साथ उनके पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ड्रीम और फ्लैगशिप प्रोजेक्ट 'रामजल सेतु लिंक' की कमान संभाल रहे हैं। इसके अलावा, अगस्त 2028 तक का उनका लंबा कार्यकाल सरकार को एक स्थिर प्रशासनिक ढांचा दे सकता था। ऐसे में यदि वी. श्रीनिवास को एक साल का एक्सटेंशन मिलता है, तो अभय कुमार के मुख्य सचिव बनने का इंतजार लंबा हो जाएगा।
रजत कुमार मिश्रा: केंद्र के अनुभव और टाइमिंग पर फिरेगा पानी?
1992 बैच के ही आईएएस अफसर रजत कुमार मिश्रा प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन के बेहद माहिर माने जाते हैं। वर्तमान में वे दिल्ली में डेपुटेशन पर हैं और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव पद संभाल रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ उनके बेहतरीन तालमेल को देखते हुए उन्हें सीएस पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। जनवरी 2028 में रिटायर होने वाले मिश्रा के लिए भी एक्सटेंशन की यह खबर एक बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि इससे उनका बचा हुआ कार्यकाल सीमित हो जाएगा।
अखिल अरोड़ा: सुपरसीड करने और लंबे कार्यकाल के गणित पर असर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के एसीएस अखिल अरोड़ा (1993 बैच) अपनी मजबूत प्रशासनिक छवि और वित्त तथा जनस्वास्थ्य जैसे भारी-भरकम विभागों के सफल संचालन के लिए जाने जाते हैं। फरवरी 2029 तक का लंबा कार्यकाल उनके पक्ष में है, हालांकि उन्हें मुख्य सचिव बनाने के लिए सरकार को 1992 बैच के वरिष्ठ अफसरों को दरकिनार करना पड़ता। अब यदि मौजूदा मुख्य सचिव को ही सेवा विस्तार मिल जाता है, तो अखिल अरोड़ा के लिए फिलहाल सीएस की कुर्सी तक पहुंचने की संभावनाएं काफी हद तक सुस्त पड़ सकती हैं।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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