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अजमेर में करोड़ों की सरकारी जमीन पर लग्जरी आइलैंड बनाया: नाले के ऊपर सड़क बनाई, करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट, अधिकारी देखते रहे - Ajmer News

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Dainik Bhaskar के अनुसार24 जून 2026 को 05:51 am बजे
अजमेर में करोड़ों की सरकारी जमीन पर लग्जरी आइलैंड बनाया:  नाले के ऊपर सड़क बनाई, करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट, अधिकारी देखते रहे - Ajmer News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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भास्कर एक्सक्लूसिवअजमेर में करोड़ों की सरकारी जमीन पर लग्जरी आइलैंड बनाया:नाले के ऊपर सड़क बनाई, करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट, अधिकारी देखते रहे

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अजमेर में एक कॉलोनाइजर ने सरकारी नाले पर एक ‘आइलैंड’ बना दिया। इतना ही नहीं खुद की जमीन के साथ नाला और अजमेर विकास प्राधिकरण की सरकारी जमीन पर चारदीवारी बनाकर कब्जा कर लिया।

नाले पर आवाजाही के लिए पुलिया बनाने के बजाय सीमेंट के पाइप डालकर सड़क भी बनाई है। दिलचस्प बात यह है कि यह सब उस सिस्टम की निगरानी में हुआ, जिसका काम ऐसे निर्माणों पर नजर रखना था।

यही नहीं, पूरे सरकारी सिस्टम ने सेवन वंडर पार्क के टूटने से भी कोई सीख नहीं ली। अब सवाल यह उठता है कि भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई होती है तो यहां जमीन खरीदने वालों के सपनों की कीमत कौन चुकाएगा?

मामला चाचियावास में ‘जीएस लेक एवेन्यू प्रोजेक्ट’ का है। जहां 340 प्लॉट की इस कॉलोनी का लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट की कीमत करोड़ों में है।

लेकिन अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई करना तो दूर काम तक नहीं रोका गया। आज भी यहां जोर-शोर से काम चल रहा है।

नाले को ‘लेक’ बताकर कैसे बेचे गए घरों के सपने?

1. नाले के बीचों बीच बना दिया आइलैंड

कॉलोनी को प्रीमीयम लुक देने के लिए यहां बने करीब दस हजार वर्ग मीटर नाले के बीच में एक आइलैंड बना लिया गया। एक बड़ा टीला बनाकर यहां इस पर पेड़ व घास लगाई गई है।

जबकि नियम ये है कि किसी भी जलस्रोत व नाले में किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इस निर्माण से जलभराव व जलबहाव प्रभावित होगा।

2. नाले पर पाइप डालकर बना दी सड़क

नाले पर आवाजाही के लिए पुलिया बनाकर सड़क बनाने के बजाय केवल पानी की आवाजाही के लिए पाइप डालकर खानापूर्ति की गई। इससे नाले में पानी का बहाव क्षेत्र प्रभावित होगा।

जबकि अगर पर्याप्त चौड़ाई के साथ आरससीसी पुलिया का निर्माण होता तो पानी का बहाव भी प्रभावित नहीं होता। लेकिन इसमें कॉलोनाइजर को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते।

3. नाले के बफर जोन में पक्का निर्माण

नाले के बफर जोन (जल बहाव क्षेत्र के आसपास का इलाका, जिस पर निर्माण नहीं किया जा सकता) में पक्का निर्माण कर लिया गया। इसके लिए यहां पक्का पाथवे बनाकर रेलिंग भी लगा दी।

यहां किए गए निर्माण तक आनेञजाने के लिए लोहे की पुलिया व रेलिंग भी बना दी। जबकि नाले के नौ मीटर के बफर जोन को पूरी तरह खुला रखना था और इसमें किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं करना था।

4. सरकारी जमीन चारीदीवारी में कैद

अजमेर विकास प्राधिकरण के नाम दर्ज खसरा 2068 की जमीन 1000 वर्ग मीटर व 2088 की 7100 वर्ग मीटर जमीन है। इसके अलावा सरकारी नाले की खसरा संख्या 2069 का क्षेत्रफल 10 हजार वर्ग मीटर है। इन तीनों को भी खुद की जमीन के लिए बनाई गई चारदीवारी में शामिल कर कैद कर लिया।

पिछली गलती से भी नहीं ले रहे सबक

आनासागर झील के कैचमेंट और बफर जोन में पाथ वे सहित निर्माण कार्य किए गए थे। सेवन वंडर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर धराशायी कर दिया था और पाथ वे व अन्य निर्माण का मामला अब भी स्रुपीम कोर्ट में है।

कोर्ट कई बार जल स्रोतों के आसपास निर्माण पर सख्त नाराजगी जता चुका है। इसके बावजूद नियमों की लंबे समय से की जा रही अनदेखी के बावजूद अजमेर विकास प्राधिकरण कोई सबक नहीं ले रहा।

इस सम्बन्ध में प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि पवित्र कोठारी से नाले में आईलैंड व अन्य निर्माण, पुलिया के बजाय सीमेन्ट के पाइप डालकर सड़क बनाने, बफर जोन में पक्का निर्माण सहित अन्य मामलों में जानकारी चाही तो उनका कहना रहा कि एडीए से नक्शा स्वीकृत है और नियमों के मुताबिक काम किया जा रहा है।

अजमेर विकास प्राधिकरण के डिप्टी कमिश्नर (नॉर्थ) जयपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि जीएस लेक ऐवेन्यू प्रोजेक्ट की जांच करवा ली जाएगी। अगर नियमानुसार काम नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी।

जी.एस. लेक एवेन्यू प्रोजेक्ट - कब क्या हुआ?

- 18 अगस्त 2023 को खातेदारों से मै.जी.एस.ड्रीम होम एलएलपी के अधीकृत प्रतिनिधि मुकेश कुमार पुत्र कालूराम, निवासी सरल-1st फ्लोर, पटेल स्टेडियम के पास जयपुर रोड (अजमेर) ने जमीन खरीदी गई।

- 9 अक्टूबर 2023 को जमीन का अजमेर विकास प्राधिकरण से 90ए (डायवर्जन) कराया गया। 18 सितम्बर 2024 को अजमेर विकास प्राधिकरण से ले आउट पास किया गया।

- 20 दिसम्बर 2024 को रेरा से रजिस्ट्रेशन मिला। इसमें प्रोजेक्ट खत्म करने की डेट 16 सितम्बर 2027 बताई गई।

इन्होंने नक्शा पास किया

- भरतराज गुर्जर (RAS), उपायुक्त नॉर्थ एडीए

- मुकेश मित्तल, डायरेक्टर (प्लान) एडीए

- सुनीता, तहसीलदार, एडीए

- अनुराग मिश्रा, उप-नगर नियोजक एडीए

- सुनीता जाटव, भ-अभिलेख निरीक्षक, एडीए

- मनोज कुमार, जेईएन, एडीए

प्रोजेक्ट का कुल भूमि क्षेत्रफल 96,000 वर्गमीटर

यह प्रोजेक्ट चाचियावास गांव, अजमेर में खसरा नंबर 2047, 2049, 2053, 2054, 2054/2726, 2055, 2059, 2059/2511, 2060, 2060/2512, 2061, 2062, 2063, 2064, 2065, 2066, 2067, 2069/2783, 2070, 2071/2374, 2088/2716, 2089, 2090, 2091 और 2873/2055 पर स्थित है। प्रोजेक्ट का कुल भूमि क्षेत्रफल 96,000 वर्गमीटर है।

क्या होता है 90-A

राजस्थान में जमीन का 90-A का मतलब कृषि भूमि को आवासीय (रहने) या व्यावसायिक (दुकान/कार्यालय) उपयोग में बदलना है।

इसके बिना कृषि भूमि पर वैध निर्माण या रजिस्ट्री नहीं करवा सकते हैं। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के तहत, मूल रूप से कृषि भूमि पर खेती ही की जा सकती है।

जब किसी जमीन पर कॉलोनी, टाउनशिप, या दुकान बनानी हो तो 90-A के जरिए उसका 'लैंड यूज़' बदलना पड़ता है। इसके लिए सम्बन्धित सरकारी एजेंसी से अनुमति लेनी पड़ती है।

क्या होता है बफर जोन

खेतों, नदियों या झीलों के किनारे छोड़ी गई प्राकृतिक वनस्पतियों या पेड़ों के लिए पट्टी को बफर जोन कहते है। जो जलाशय किसी एक्ट/कानून/मास्टर प्लान के तहत नोटिफ़ाई नहीं किए गए हैं।

उनके किनारे बफ़र जोन 10 मीटर से ज़्यादा चौड़ाई वाली नहर/नाले/स्टॉर्म वॉटर ड्रेन की तय सीमा से कम से कम 9 मीटर छोड़ना होता है।

वहीं, 10 मीटर तक की चौड़ाई वाली नहर/नाले/छोटे जलाशयों/स्टॉर्म वॉटर ड्रेन की तय सीमा से कम से कम 6 मीटर व बावड़ी (स्टेप-वेल) के चारों ओर कम से कम 6 मीटर छोड़ना होगा।

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ये खबर पढ़िए

सरकारी जमीन पर लग्जरी आइलैंड बनाने पर एक्शन:दैनिक भास्कर एप के खुलासे के बाद जांच कमेटी बनाई; 7 दिन में देगी रिपोर्ट

अजमेर में सरकारी नाले पर ‘आइलैंड’ बनाने के दैनिक भास्कर एप के खुलासे के बाद अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने कमेटी का गठन कर दिया है। तहसीलदार की अध्यक्षता में बनाई गई इस कमेटी को पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद ADA नियमानुसार कार्रवाई करेगा। (पूरी खबर पढ़ें)

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