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राजस्थान के इस्लामपुर-श्रीरामपुर विवाद की A to Z कहानी; कैसे शुरू हुआ और कहां पहुंचा मामला?

राजस्थान के इस्लामपुर-श्रीरामपुर विवाद की A to Z कहानी; कैसे शुरू हुआ और कहां पहुंचा मामला? किसी गांव, शहर या स्थान का नाम बदलने के लिए आमतौर पर स्थानीय निकायों के प्रस्ताव, जिला प्रशासन की रिपोर्ट, राज्य सरकार की मंजूरी…

Live Hindustan के अनुसार16 जून 2026 को 07:56 am बजे
राजस्थान के इस्लामपुर-श्रीरामपुर विवाद की A to Z कहानी; कैसे शुरू हुआ और कहां पहुंचा मामला?

सौजन्य से:- Live Hindustan

राजस्थान के इस्लामपुर-श्रीरामपुर विवाद की A to Z कहानी; कैसे शुरू हुआ और कहां पहुंचा मामला?

किसी गांव, शहर या स्थान का नाम बदलने के लिए आमतौर पर स्थानीय निकायों के प्रस्ताव, जिला प्रशासन की रिपोर्ट, राज्य सरकार की मंजूरी और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले का इस्लामपुर गांव इन दिनों चर्चा में है। गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने के प्रस्ताव ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ग्रामीण सड़कों पर उतर आए हैं, पदयात्राएं निकाली जा रही हैं और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर यह विवाद शुरू कैसे हुआ और लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

क्या है पूरा मामला?

झुंझुनूं जिले के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने का प्रस्ताव सामने आया है। प्रस्ताव के सार्वजनिक होते ही गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे कोई राय नहीं ली गई और उनकी सहमति के बिना गांव की पहचान बदलने की कोशिश की जा रही है।

यही वजह है कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंबेडकर पार्क से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट तक करीब 15 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालकर विरोध दर्ज कराया।

इस्लामपुर नाम को लेकर क्या दावा है?

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस्लामपुर कोई नया नाम नहीं है। गांव करीब 400 साल से इसी नाम से जाना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज और स्थानीय इतिहास में गांव का नाम हमेशा से इस्लामपुर दर्ज है।

ग्रामीणों का तर्क है कि किसी भी गांव का नाम केवल एक शब्द नहीं होता, बल्कि उससे उसकी पहचान, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक विरासत जुड़ी होती है। इसलिए नाम बदलना उनकी ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित करेगा।

विरोध करने वालों की मुख्य दलीलें क्या हैं?

ऐतिहासिक पहचान खत्म होने का डर

ग्रामीणों का कहना है कि सदियों पुराना नाम बदलने से गांव की ऐतिहासिक पहचान प्रभावित होगी।

बिना सहमति फैसला लेने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि नाम परिवर्तन से पहले स्थानीय लोगों से कोई व्यापक रायशुमारी नहीं की गई।

सामाजिक सौहार्द पर असर की आशंका

कुछ ग्रामीणों का मानना है कि नाम बदलने का मुद्दा समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा कर सकता है।

असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप

विरोध कर रहे नेताओं और ग्रामीणों का आरोप है कि बेरोजगारी, महंगाई, पानी और विकास जैसे मुद्दों की बजाय नाम परिवर्तन की राजनीति की जा रही है।

आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?

इस आंदोलन में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के जिलाध्यक्ष राजेंद्र फौजी, सरपंच आमिन मनियार और कई सामाजिक संगठन सक्रिय हैं।

पूर्व मंत्री गुढ़ा ने प्रशासन को पुराने राजस्व दस्तावेज भी सौंपे हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में गांव का नाम इस्लामपुर ही दर्ज है और इसलिए नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं बनता।

प्रशासन की भूमिका क्या है?

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने इलाके और झुंझुनूं कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी।

क्या नाम बदलना आसान प्रक्रिया है?

नहीं। किसी गांव, शहर या स्थान का नाम बदलने के लिए आमतौर पर स्थानीय निकायों के प्रस्ताव, जिला प्रशासन की रिपोर्ट, राज्य सरकार की मंजूरी और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज और विभिन्न विभागों में बदलाव किए जाते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

इस्लामपुर-श्रीरामपुर विवाद केवल नाम बदलने का मामला नहीं है। यह स्थानीय पहचान, ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक भावनाओं और राजनीतिक विमर्श से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। एक पक्ष इसे सांस्कृतिक बदलाव के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अपनी सदियों पुरानी पहचान बचाने की लड़ाई बता रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार के फैसले पर इस विवाद की दिशा निर्भर करेगी।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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