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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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मणिपुर से चली खेप, राजस्थान आने से पहले ही तस्करों से 90 किलो अफीम जब्त
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भास्कर न्यूज |भरतपुर
नशे के खिलाफ छेड़ी गई जंग में राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीफ) ने ऐसा प्रहार किया है, जिसने अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की जड़ों तक हिला दी हैं। महीनों की खुफिया निगरानी, सैकड़ों घंटे की तकनीकी पड़ताल और पांच राज्यों में फैले ऑपरेशन के बाद एएनटीएफ ने मणिपुर से राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलो अफीम की खेप जब्त कर ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 4.50 करोड़ रुपए आंकी गई है। बताया जा रहा है िक इसकी सप्लाई भरतपुर समेत अन्य जनपदों के साथ पड़ोसी राज्यों में होती थी। यह कार्रवाई केवल मादक पदार्थों की बरामदगी नहीं, बल्कि उन तस्करों के लिए कड़ा संदेश है जो युवाओं की जिंदगी को नशे के अंधेरे में धकेलकर करोड़ों रुपए कमाने का कारोबार चला रहे हैं। एएनटीएफ को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से भारी मात्रा में अफीम उत्तर भारत में सप्लाई की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए महानिरीक्षक विकास कुमार ने विशेष टीमों को तीन बार मणिपुर भेजकर जांच कराई गई। इसी दौरान पाली निवासी सुखराम की गतिविधियां जांच एजेंसियों के रडार पर आईं। वह लगातार मणिपुर और राजस्थान के बीच आवाजाही कर रहा था। इसके बाद उसके हर कदम पर नजर रखी जाने लगी।
{ऑपरेशन जमुहार'' ने तोड़ा नशा तस्करों का नेटवर्क:- पांच राज्यों में फैले इस अभियान को ‘ऑपरेशन जमुहार’ नाम दिया गया। यह नाम जम्मू, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के प्रथम अक्षरों को जोड़कर बनाया गया है। पुलिस का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले उस नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ा कदम है, जो युवाओं के भविष्य को नशे के दलदल में धकेल रहा था। ट्रक के नीचे बना रखा था गुप्त तहखाना :- हरियाणा के सिरसा क्षेत्र में ट्रक को चिन्हित कर रोका गया। टीम ने बारीकी से जांच की तो ट्रक के निचले हिस्से में लोहे की प्लेटों और नट-बोल्ट से तैयार एक गुप्त तहखाने में 95 पैकेटों में छिपाकर रखी गई 88.970 किलोग्राम अफीम बरामद हुई।पुलिस ने ट्रक चालक किशनाराम को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पाली निवासी सुखराम और जम्मू-मणिपुर में बैठे अन्य बड़े सूत्रधारों की भूमिका की जांच जारी है। राजस्थान एएनटीफ, हरियाणा पुलिस और एनसीबी की संयुक्त टीमें अब पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। जांच के दौरान नेटवर्क के सदस्यों के बीच हुई बातचीत में कोड वर्ड का इस्तेमाल सामने आया। एक सूत्रधार ने कहा, रात तक श्रीनगर पहुंचना था, लेकिन अब जम्मू में ही रुकना पड़ेगा। बाद में पूछताछ में खुलासा हुआ कि ‘श्रीनगर’ का मतलब जोधपुर और ‘जम्मू’ का मतलब रास्ते में ही माल का निपटारा करना था। तस्करों को शक हो चुका था कि पुलिस उनके करीब पहुंच गई है। सुखराम बेहद शातिर निकला। उसने बार-बार मोबाइल फोन बदले, वाहन बदले और रास्ते भी बदलता रहा। इसके बावजूद एएनटीएफ की टीमें उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रहीं। मणिपुर में सौदा तय करने के बाद वह लखनऊ पहुंचा। वहां से वह अपनी महिला मित्र के साथ नैनीताल और कैंची धाम की यात्रा पर निकल गया। इधर, पुलिस टीमें उसके हर कदम का हिसाब जुटाने में लगी थीं। और उनके हर कदम पर नजर रखीं। {एक फास्टैग ने खोल दिया पूरे नेटवर्क का राज:- जयपुर के निकट सुखराम को हिरासत में लिया गया, लेकिन उसके वाहन से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। जांच के दौरान अधिकारियों को एक संदिग्ध फास्टैग की जानकारी मिली। यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। पता चला कि एक ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम के जरिए किया जा रहा था। वही ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश होते हुए हरियाणा पहुंचा था।
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