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राजस्थान में आगर मालवा की पुलिस ने की फर्जी कार्रवाई? दो थाना प्रभारी समेत 90 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज

Agar Malwa Police Fake Action: आगर मालवा की पुलिस राजस्थान में कार्रवाई को लेकर फंस गई है। कोर्ट ने कार्रवाई को फर्जी माना है। साथ ही दो टीआई समेत 90 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आगर मालवा: चर्चि…

Navbharat Times के अनुसार16 जून 2026 को 12:29 pm बजे
राजस्थान में आगर मालवा की पुलिस ने की फर्जी कार्रवाई? दो थाना प्रभारी समेत 90 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज

सौजन्य से:- Navbharat Times

Agar Malwa Police Fake Action: आगर मालवा की पुलिस राजस्थान में कार्रवाई को लेकर फंस गई है। कोर्ट ने कार्रवाई को फर्जी माना है। साथ ही दो टीआई समेत 90 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

आगर मालवा: चर्चित एनडीपीएस एक्ट की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि ड्रग्स बरामदगी की कार्रवाई नियमों के खिलाफ और फर्जी थी। इस कार्रवाई में आगर मालवा पुलिस अब खुद ही फंस गई है।

दो थाना प्रभारी और 90 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के आदेश

राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के सख्त आदेश दिए हैं। आरोप है कि ड्रग्स बरामदगी की पूरी कार्रवाई फर्जी और प्रक्रिया के खिलाफ थी। न्यायालय के इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच के तरीके पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

जनवरी 2026 में की थी फर्जी कार्रवाई

दरअसल, जनवरी 2026 में आगर मालवा कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई का दावा किया था, जिसमें करोड़ों रुपए की एमडी ड्रग, केमिकल और मशीनरी जब्त करने की बात कही गई थी। लेकिन अब उसी कार्रवाई को लेकर अदालत ने गंभीर टिप्पणी करते हुए थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित कई पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान के डग थाने में 6 नामजद और करीब 90 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

मामले में आगे होगी जांच

बताया जा रहा है कि इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला कायम किया गया है। मामले की जांच अब आगे बढ़ाई जाएगी। यह पूरा मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब पुलिस ने झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में छापा मारकर भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त करने का दावा किया था। इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। उस समय इसे बड़ी सफलता बताया गया था, लेकिन अब उसी पर सवाल उठ रहे हैं।

कार्रवाई है फर्जी

गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने इस कार्रवाई को फर्जी बताते हुए अदालत का रुख किया। शिकायत में कहा गया कि पुलिस ने बिना सही प्रक्रिया के कार्रवाई की और पूरे मामले को मनगढ़ंत तरीके से पेश किया। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं। कहा गया कि पुलिस ने आमद-रवानगी दर्ज नहीं की, रोजनामचा अपडेट नहीं किया और स्थानीय पुलिस को भी जानकारी नहीं दी। नियमों के मुताबिक कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी जरूरी होती है, लेकिन वह भी नहीं की गई।

पुलिस की कार्रवाई पर संदेह

इन सभी तथ्यों ने पुलिस की कार्रवाई पर संदेह खड़ा कर दिया। पुलिस ने स्थानीय थाने को सूचना न देने के पीछे यह तर्क दिया कि मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी। लेकिन जब कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल थे तो सभी के मोबाइल बंद होने की बात पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने इस तर्क को भी संदिग्ध माना।

कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।

शशि उपाध्याय, आरोपी थाना प्रभारी

न्याय की है जीत

फरियादी पक्ष के वकील असगर अली ने कहा कि अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि पुलिस ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया। उन्होंने इस आदेश को न्याय की जीत बताया और कहा कि सच्चाई सामने आ रही है। आरोपियों के परिजनों ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि अब वे अपने भाइयों की जमानत और रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे। उनका आरोप है कि पुलिस ने गलत तरीके से उन्हें फंसाया था।

इनके खिलाफ दर्ज हुए केस

वहीं, पुलिस विभाग अब अपने बचाव में कानूनी विकल्प तलाश रहा है। इन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर: शशि उपाध्याय, थाना प्रभारी कोतवाली आगर, रूपसिंह राजपुत, थाना प्रभारी बड़ौद, राखी गुर्जर, उप निरीक्षक, अजय जाट, सहायक उप निरीक्षक, राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी, शुभम, पुलिसकर्मी।

लेखक के बारे मेंमुनेश्वर कुमारमुनेश्वर कुमार नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (प्रमुख संवाददाता) हैं । वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को कवर करते हैं। इसके अलावे दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर कर देते हैं। पत्रकारिता की शुरुआत टीवी रिपोर्टिंग से हुई है। बीते 10 सालों से डिजिटल मीडिया में हूं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। चार साल तक टीवी में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हूं। डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी करता हूं। मध्य प्रदेश में दो लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और नगर निकाय चुनाव को कवर किया। साथ ही कई बड़े इवेंट में ग्राउंड जीरो पर मौजूदगी रही है। टीवी और डिजिटल के बिहार में विधानसभा चुनाव को ग्राउंड से कवर किया हूं।

इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में रहकर टीवी और डिजिटल पत्रकारिता के अलग-अलग गुर सीखे है। एमपी में रहते हुए सीएम मोहन यादव से लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान तक का इंटरव्यू किया हूं। इसके साथ ही एमपी के बड़े मंत्रियों, सेलिब्रिटी और अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं। इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी इंटरव्यू किए। अन्ना आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे का इंटरव्यू किया। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने के पूरे प्रकरण को ग्राउंड जीरो से कवर किया।

विशेषता: पॉलिटिक्ल और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। इसकी शुरुआत महुआ न्यूज टीवी चैनल से हुई थी। फिर अलग-अलग टीवी चैनलों में काम करते हुए। ईनाडु इंडिया में पहुंचे जो अब ईटीवी भारत है। वहां लंबे समय तक रहने के बाद राजस्थान पत्रिका भोपाल में पहुंचे। पत्रिका में एक करीब एक साल तक रहने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं।... और पढ़ें

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