होम›क्राइम›अश्लील फिल्मों के 8000 लिंक-ग्रुप पुलिस ने कराए ब्लॉक: 15 हजार मोबाइल नंबर किए बंद; टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड एप पर जोड़ते थे लोगों को - Jaipur News
क्राइम

अश्लील फिल्मों के 8000 लिंक-ग्रुप पुलिस ने कराए ब्लॉक: 15 हजार मोबाइल नंबर किए बंद; टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड एप पर जोड़ते थे लोगों को - Jaipur News

- Hindi News - Local - Rajasthan - Jaipur - Rajasthan Police Crackdown: Child Pornography Network Busted | Blocked Mobiles अश्लील फिल्मों के 8000 लिंक-ग्रुप पुलिस ने कराए ब्लॉक:15 हजार मोबाइल नंबर किए बंद; टेलीग्राम-डिस्…

Dainik Bhaskar के अनुसार28 सितंबर 2026 को 11:05 am बजे
अश्लील फिल्मों के 8000 लिंक-ग्रुप पुलिस ने कराए ब्लॉक:  15 हजार मोबाइल नंबर किए बंद; टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड एप पर जोड़ते थे लोगों को - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Rajasthan

- Jaipur

- Rajasthan Police Crackdown: Child Pornography Network Busted | Blocked Mobiles

अश्लील फिल्मों के 8000 लिंक-ग्रुप पुलिस ने कराए ब्लॉक:15 हजार मोबाइल नंबर किए बंद; टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड एप पर जोड़ते थे लोगों को

- कॉपी लिंक

राजस्थान साइबर क्राइम विंग और राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) ने सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर अश्लील फिल्में भेजने पर कार्रवाई की। टीमों ने तकनीकी जांच के बाद कई सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार इंस्टाग्

नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) की टिपलाइन रिपोर्ट्स और डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के आधार पर करीब 25 हजार इनपुट जुटाए गए। पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस क्रॉन्फ्रेंस में एडीजी (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने मॉड्यूस ऑपरेंडी (अपराध करने के तरीके) का सोमवार दोपहर यह खुलासा किया।

ग्रुप में फर्जी नाम से जुड़ते हैं लोग

एडीजी वीके सिंह ने बताया- साइबर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल बनाते हैं। इनमें मेंबर फर्जी या गुमनाम पहचान के साथ जुड़ते हैं। आपस में आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। कई मामलों में सामग्री सीधे निजी मैसेज के जरिए भेजी जाती है, जबकि गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर केवल उसका लिंक शेयर किया जाता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी आरोपी पकड़ से बचने के लिए कोडेड शब्दों और हैशटैग का यूज करते हैं। कई बार इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म से कॉन्टैक्ट करने के बाद बातचीत को कम निगरानी वाले प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है। राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार इन माध्यमों से जुड़कर ऐसी सामग्री भेजना और लेना गंभीर दंडनीय अपराध है।

7800 से अधिक यूआरएल और 15,326 मोबाइल नंबर चिन्हित

राजस्थान पुलिस ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और वॉट्सएप से जुड़े लगभग 7 हजार 800 यूआरएल-प्रोफाइल और 15 हजार 326 मोबाइल नंबर व 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए। तकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी की रिपोर्ट्स के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबर, अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की गई। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सूचना देकर आपत्तिजनक लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए गए।

एनसीएमईसी रिपोर्ट के आधार पर रिपीटेड ऑफेंडर पर कार्रवाई

एनसीएमईसी की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए गए व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में ऐसे मामलों में मामले दर्ज हुए हैं। राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही है। सीएसईएएम की खरीद-फरोख्त और आदान-प्रदान में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर संबंधित राज्य की पुलिस को सूचना दी जा रही है, ताकि वहां भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।

पुलिस की सख्त चेतावनी

राजस्थान पुलिस ने कहा- इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना सुरक्षित नहीं है। पुलिस तकनीकी माध्यमों से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रख रही है। डिजिटल ट्रेल के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।

परिजन रखें नजर, यहां दें सूचना

राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों और परिजनों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट यूज पर ध्यान देने और उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल और ऐसी सामग्री की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की सलाह दी गई है। बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत अपराध है।

- संदिग्ध सामग्री या गतिविधि की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर भी सूचना दी जा सकती है।

- राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा (आर4सी) पुलिस मुख्यालय जयपुर के ई-मेल sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर भेजी जा सकती है।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें