होम›क्राइम›चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर क्राइम विंग की स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल ब्लॉक
क्राइम

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर क्राइम विंग की स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल ब्लॉक

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर क्राइम विंग की स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल ब्लॉक फर्जी नाम और टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड ग्रुप्स में गुमनाम रहकर अश्लील सामग्री देखने, शेयर करने वाले पुलिस की रडार पर. Published :…

ETV Bharat के अनुसार28 सितंबर 2026 को 11:05 am बजे
चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर क्राइम विंग की स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल ब्लॉक

सौजन्य से:- ETV Bharat

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर क्राइम विंग की स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल ब्लॉक

फर्जी नाम और टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड ग्रुप्स में गुमनाम रहकर अश्लील सामग्री देखने, शेयर करने वाले पुलिस की रडार पर.

Published : September 28, 2026 at 3:57 PM IST

जयपुर: मोबाइल में चाइल्ड पोर्नोग्राफी कंटेंट रखने, सोशल मीडिया के जरिए ऐसे कंटेंट को सर्कुलेट सर्कुलेट करने वालों पर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने डिजिटल स्ट्राइक की है. इसके तहत 15 से ज्यादा मोबाइल सिम को ब्लॉक करवाया गया है. जबकि 7800 प्रोफाइल को भी ब्लॉक किया गया है. पुलिस का संदेश साफ है कि मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री (सीएसईएएम) देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना अब भारी पड़ सकता है.

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस साइबर अपराध शाखा ने ऐसी आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर सख्त निगरानी और कार्रवाई शुरू कर रखी है. एडीजी, साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि प्रदेश में ऐसे मामलों में अब तक कई मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं.

टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड के गुप्त ग्रुप बने प्रसार का माध्यम : एडीजी वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल बनाते हैं. इनमें सदस्य फर्जी अथवा गुमनाम पहचान के साथ जुड़ते हैं और आपस में आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं. कई मामलों में सामग्री सीधे निजी संदेश के जरिए भेजी जाती है, जबकि गूगल ड्राइव अथवा अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर केवल उसका लिंक साझा किया जाता है.

कोडेड शब्दों और हैशटैग का उपयोग : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी आरोपी बचने के लिए कोडेड शब्दों और हैशटैग का इस्तेमाल करते हैं. कई बार इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म से संपर्क शुरू करने के बाद बातचीत को कम निगरानी वाले प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है. उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट के तहत बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री (सीएसईएएम) देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना अपराध की श्रेणी में आता है.

पढ़ें : साइबर क्राइम पीड़ितों से दिल्ली साइबर क्राइम ब्रांच के नाम पर दोबारा ठगी, ऐसे फंसाते थे चंगुल में

यूआरएल और मोबाइल नंबर चिह्नित : एडीजी वीके सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई के तहत इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और वाट्सएप से जुड़े लगभग 7,800 यूआरएल-प्रोफाइल, 15,326 मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस चिह्नित कर ब्लॉक करवाए गए हैं. तकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी की रिपोर्ट्स के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबर, अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की गई. इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सूचना देकर आपत्तिजनक लिंक और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए गए.

रिपीटेड ऑफेंडर पर कार्रवाई : एनसीएमईसी की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं. चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में ऐसे मामलों में प्रकरण दर्ज हुए हैं. प्रदेशभर में ऐसे मामलों में 15 मुकदमे दर्ज कर सभी मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया है. राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही है. सीएसईएएम की खरीद-फरोख्त अथवा आदान-प्रदान में सक्रिय व्यक्तियों की पहचान कर संबंधित राज्य की पुलिस को सूचना दी जा रही है, ताकि वहां भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके.

गुमनाम रहकर खेल करने वालों को सख्त चेतावनी : राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना अथवा साझा करना भी अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे लोग पहचान छुपाकर बचने का प्रयास करते हैं, लेकिन पुलिस तकनीकी माध्यमों से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रख रही है और डिजिटल ट्रेल के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है.

अभिभावक ऑनलाइन एक्टिविटी पर रखें नजर : राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर ध्यान देने तथा उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करने की अपील की है. किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल अथवा ऐसी सामग्री की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की सलाह दी गई है. उन्होंने कहा, बच्चे अनजाने में संदिग्ध लिंक, समूह, चैनल या ऐसी सामग्री का उपयोग कर लेते हैं. वे बोले- जिन नंबरों और प्रोफाइल को ब्लॉक किया गया है, अगर उन्हें लगता है कि उनका नंबर गलत तरीके से बंद हुआ है, तो वे एसपी साइबर क्राइम को ईमेल कर अपना पक्ष रख सकते हैं.

पढ़ें : Cyber fraud: बयाना में व्यापारी को 10 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, पुलिस इंस्पेक्टर बनकर ठगे 4 लाख

संदिग्ध सामग्री और गतिविधि के बारे में दें रिपोर्ट : उन्होंने बताया कि बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता के सुसंगत प्रावधानों के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है. उन्होंने आह्वान किया है कि संदिग्ध सामग्री या गतिविधि की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर दी जा सकती है. राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा (आर4सी), पुलिस मुख्यालय, जयपुर के ईमेल आईडी sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर भी ईमेल के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी जा सकती है.

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें