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राजस्थान में पांचना बांध का पानी बना 75 गांवों की जंग, आखिर क्या है विवाद?

राजस्थान में पांचना बांध का पानी बना 75 गांवों की जंग, आखिर क्या है विवाद? पांचना बांध के निर्माण के दौरान कई गांवों की जमीन डूब क्षेत्र में चली गई। किसानों ने अपनी खेती, घर और जमीनें खो दीं। वर्षों तक इन लोगों का मानना…

Live Hindustan के अनुसार25 जून 2026 को 04:09 am बजे
राजस्थान में पांचना बांध का पानी बना 75 गांवों की जंग, आखिर क्या है विवाद?

सौजन्य से:- Live Hindustan

राजस्थान में पांचना बांध का पानी बना 75 गांवों की जंग, आखिर क्या है विवाद?

पांचना बांध के निर्माण के दौरान कई गांवों की जमीन डूब क्षेत्र में चली गई। किसानों ने अपनी खेती, घर और जमीनें खो दीं। वर्षों तक इन लोगों का मानना रहा कि बांध का पानी सबसे पहले उन्हीं का अधिकार है

करौली जिले का पांचना बांध इन दिनों सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि हजारों किसानों की उम्मीदों, संघर्षों और अधिकारों की लड़ाई का केंद्र बन गया है। पानी की एक-एक बूंद को लेकर करीब 75 गांव आमने-सामने हैं। कोई नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहा है तो कोई बांध का पानी रोकने के लिए आंदोलन कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रशासन, सरकार और अदालत के आदेश भी इस विवाद का आसान समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं।

क्या है पांचना बांध?

करौली जिले में गंभीर नदी पर बना पांचना बांध राजस्थान के बड़े बांधों में शामिल है। इसका निर्माण मूल रूप से बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ यह सिंचाई और पेयजल का भी महत्वपूर्ण स्रोत बन गया। लेकिन अब यही पानी विवाद की वजह बन गया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पांचना बांध के निर्माण के दौरान कई गांवों की जमीन डूब क्षेत्र में चली गई। किसानों ने अपनी खेती, घर और जमीनें खो दीं। वर्षों तक इन लोगों का मानना रहा कि बांध का पानी सबसे पहले उन्हीं का अधिकार है, क्योंकि उन्होंने इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाई है।

दूसरी ओर बांध से निकलने वाली नहरों के कमांड एरिया के किसान हैं। उनका कहना है कि 1992 से 2005 तक उन्हें नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी मिलता रहा। बाद में नहरों में पानी छोड़ा जाना बंद हो गया, जिससे उनकी खेती प्रभावित हुई। अब वे उसी अधिकार को वापस मांग रहे हैं।

दो धड़ों में क्यों बंट गए गांव?

डूब क्षेत्र के 39 गांवों के किसान कहते हैं कि यदि नहरों में पानी छोड़ा गया तो बांध में जल स्तर कम होगा और उनकी सिंचाई तथा भविष्य की जल जरूरतें प्रभावित होंगी। यही वजह है कि वे लगातार बांध पर धरना देकर पानी रोकने की मांग कर रहे हैं।

वहीं कमांड एरिया के 35 गांवों के किसानों का कहना है कि उनके खेत वर्षों से नहरों के पानी पर निर्भर रहे हैं। पानी नहीं मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। इसलिए वे नहरों में तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

विवाद अदालत तक पहुंचा। राजस्थान हाईकोर्ट ने कमांड क्षेत्र के किसानों के पक्ष में नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए। लेकिन जमीनी स्तर पर विरोध इतना मजबूत है कि आदेश का क्रियान्वयन आसान नहीं हो पा रहा। प्रशासन कानून और सामाजिक संतुलन के बीच रास्ता तलाश रहा है।

सरकार समाधान के लिए क्या कर रही है?

सरकार और प्रशासन दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकों का दौर चला रहे हैं। जल बंटवारे का नया फार्मूला तलाशने की कोशिश की जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र के किसानों के साथ अन्याय न हो।

इसके साथ ही लंबे समय के समाधान के रूप में चंबल-पांचना-जगर और गंभीर नदी को जोड़ने वाली लिफ्ट सिंचाई परियोजना की मांग तेज हो गई है। यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जल संकट को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्यों अहम है लिफ्ट सिंचाई परियोजना?

विशेषज्ञों का मानना है कि पांचना बांध में उपलब्ध सीमित पानी पर निर्भरता ही इस विवाद की सबसे बड़ी वजह है। यदि चंबल बेसिन से अतिरिक्त पानी लाकर पांचना और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ा जाता है तो पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।

इससे डूब क्षेत्र और कमांड क्षेत्र दोनों के किसानों को पर्याप्त पानी मिलने की संभावना बनेगी। यही कारण है कि किसान संगठन और जनप्रतिनिधि इस परियोजना को स्थायी समाधान बता रहे हैं।

विवाद खत्म हुआ तो किसे होगा फायदा?

सबसे बड़ा फायदा करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, भरतपुर और धौलपुर जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों को मिल सकता है। सिंचाई के लिए अधिक पानी मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा और किसानों की आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

यदि लिफ्ट परियोजना और ईआरसीपी जैसी योजनाएं पूरी तरह लागू होती हैं तो पूर्वी राजस्थान के कई जिलों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा मिल सकती है। इससे पेयजल संकट भी कम होगा और औद्योगिक तथा शहरी विकास को भी गति मिलेगी।

क्या दूसरे राज्यों को भी फायदा होगा?

वर्तमान पांचना विवाद मुख्य रूप से राजस्थान के भीतर का मामला है, इसलिए इसका सीधा लाभ अन्य राज्यों को नहीं मिलेगा। हालांकि यदि ईआरसीपी और चंबल बेसिन से जुड़ी व्यापक जल प्रबंधन योजनाएं सफल होती हैं, तो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच नदी जल प्रबंधन को लेकर बेहतर समन्वय की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

आगे क्या?

फिलहाल पांचना बांध का पानी सिर्फ खेतों तक पहुंचने वाला संसाधन नहीं, बल्कि अधिकार, इतिहास और भविष्य की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ वे किसान हैं जिन्होंने अपनी जमीनें खोकर बांध बनते देखा, दूसरी तरफ वे किसान हैं जिनकी फसलें नहरों के पानी पर टिकी हैं। समाधान में जितनी देरी होगी, तनाव उतना बढ़ेगा।

अब निगाहें सरकार, प्रशासन और उन बैठकों पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि पानी की यह जंग समझौते में बदलेगी या फिर आंदोलन और टकराव का नया दौर शुरू होगा।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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