झुंझुनूं ने 6 दिन में खोए 5 वीर सपूत, राजस्थान की धरती से आई खबर नम कर देगी आपकी आंखेंं
वीर भूमि राजस्थान का झुंझुनूं शहर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां महज छह दिनों के भीतर पांच जांबाज जवानों की सांसें थम गईं। हाल ही में मेरठ में तैनात नायक महेंद्र सिंह के असामयिक निधन के बाद जब उनके तीन वर्षीय मासूम…

सौजन्य से:- Navbharat Times
वीर भूमि राजस्थान का झुंझुनूं शहर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां महज छह दिनों के भीतर पांच जांबाज जवानों की सांसें थम गईं। हाल ही में मेरठ में तैनात नायक महेंद्र सिंह के असामयिक निधन के बाद जब उनके तीन वर्षीय मासूम बेटे ने मुखाग्नि दी, जिसे देख हर किसी की आंखे नम हो गई।
झुंझुनूं: देशभर में वीरों की धरती और सैनिकों की जन्मभूमि के रूप में पहचान रखने वाला राजस्थान का झुंझुनूं जिला इन दिनों गहरे शोक में डूबा हुआ है। महज छह दिनों के भीतर जिले के पांच जवानों की सांसें थम जाने से लगभग हर दिशा में मातम पसरा हुआ है। हर आंख नम है और हर दिल अपने वीर सपूतों की याद में भावुक है।
पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान
दरअसल, इसी कड़ी में ताज़ा शहादत वाला घटनाक्रम जिले के खेतड़ी उपखंड क्षेत्र में हुआ। जहां रविवार को भारतीय सेना की 12 जाट रेजीमेंट में तैनात खेतड़ी उपखंड के मेहाड़ा जाटूवास निवासी नायक महेंद्र सिंह की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने से जिले को एक और बड़ा सदमा लगा है। सेना के अधिकारियों एवं जवानों की मौजूदगी में नायक महेंद्र सिंह (39) का उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सबसे मार्मिक पल तब आया जब उनके तीन वर्षीय पुत्र आरव ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।
12 जाट रेजीमेंट में तैनाती के दौरान शहादत
जानकारी के अनुसार नायक महेंद्र सिंह मेरठ में 12 जाट रेजीमेंट में तैनात थे। 5 जून को ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। पहले उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में दिल्ली के आरआर अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान उनकी जिंदगी की सांसें थम गई और यह वीर सपूत दिया में छोड़कर चला गया। इधर, अपने लाडले और देश की रक्षण ड्यूटी पर तैनात सैनिक महेंद्र सिंह की शहादत की सूचना गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
उमड़ा जनसैलाब, तिरंगा यात्रा के साथ विदाई
तिरंगे में लिपटी उनकी पार्थिव देह मेहाड़ा जाटूवास पहुंची तो जिस तरह से बीते 5 दिनों में जैसे जिले के अन्य वीर सपूतों को विदाई दी गई , ठीक उसी तरह यहां भी हजारों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। रामपुरा बस स्टैंड से गांव तक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा थामे युवा भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पूरे मार्ग में पुष्पवर्षा कर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
सेना की टुकड़ियों ने दी वीर सैनिक महेंद्र सिंह को अंतिम सलामी
जयपुर और अलवर से पहुंची सेना की टुकड़ियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर सैनिक महेंद्र सिंह को अंतिम सलामी दी। सैन्य सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सुरेश जांगिड़, पूर्व विधायक दाताराम गुर्जर, पूर्व प्रधान मदनलाल प्रभु गुर्जर दयाराम गुर्जर सहित सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन और ग्रामीण मौजूद रहे।
6 दिनों में 5 वीर जवानों का असामयिक निधन
इस दौरान श्रद्धांजलि सभा में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पांच बार के खेतड़ी विधायक रहे डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि झुंझुनूं जिले के छह दिनों में पांच वीर जवानों की लगातार हो रही असामयिक निधन पूरे समाज को झकझोर रही हैं। डाक्टर जितेंद्र सिंह नायक खेतड़ी के महेंद्र सिंह को राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित एक साहसी सैनिक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वीर भूमि बार-बार हुई गमगीन
सनद् रहे कि झुंझुनूं जिले के लिए बीते छह दिन बेहद पीड़ादायक रहे हैं। 31 मई से 6 जून के बीच जिले के पांच वीर सपूतों की जीवन यात्रा थम गई। इनमें मेहाड़ा जाटूवास के नायक महेंद्र सिंह के अलावा झुंझुनूं जिले के इंडाली निवासी एवं भारतीय सेना के जवान सुनील कुमार, निहालोठ की ढाणी निवासी सुरेश कुमार, बलवंतपुरा निवासी दिनेश कुमार तथा बड़ागांव निवासी बीएसएफ हेड कांस्टेबल अभय सिंह शेखावत शामिल हैं।
कारगिल युद्ध के बाद पहली बार ऐसा दर्दनाक दौर
इनमें से तीन जवान छुट्टियों पर अपने घर आए हुए थे और कुछ ही दिनों बाद फिर देश सेवा के लिए लौटने वाले थे वहीं दो दो जांबाजों की ड्यूटी के दौरान अचानक तबियत बिगड़ने के बाद जिंदगी की सांस थम गई।अब लगातार सदमे वाली खबरों के बीच ए जाने लगा है कि नियति को कुछ और ही मंजूर था। लगातार छह दिनों में पांच जवानों की विदाई ने पूरे जिले को भावुक कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कारगिल युद्ध के बाद पहली बार ऐसा दर्दनाक दौर देखने को मिला है, जब इतने कम समय में जिले ने अपने पांच वीर सपूत खो दिए हों। वहीं इनकी अंतिम विदाई के दौरान हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि झुंझुनूं की धरती केवल सैनिकों को जन्म नहीं देती, बल्कि ऐसे वीर सपूतों को तैयार करती है जो अंतिम सांस तक राष्ट्र सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते हैं।
तिरंगे में लिपटे वीरों को अंतिम सलाम
इन सभी जवानों की अंतिम यात्राओं में जनसैलाब उमड़ा। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देहों के साथ निकली अंतिम यात्राओं में देशभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गांवों की गलियां गूंज उठीं। सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर जवानों को अंतिम सलामी दी। ग्रामीणों ने अपने लाडले बेटों को अश्रुपूर्ण विदाई देते हुए उनके राष्ट्रसेवा के योगदान को नमन किया।
वीरों की धरती की आंखें नम, लेकिन गर्व आज भी उतना ही बड़ा
नायक महेंद्र सिंह, सुनील कुमार, सुरेश कुमार, दिनेश कुमार और अभय सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर जीवित रहेगा। उनकी अंतिम यात्राओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि झुंझुनूं केवल सैनिकों की धरती नहीं, बल्कि वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की ऐसी पावन भूमि है जहां मातृभूमि की रक्षा को सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इन पांच वीर सपूतों को पूरा राष्ट्र नमन कर रहा है।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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