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कोटा के बाद बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल

कोटा के बाद बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल कोटा मेडिकल कॉलेज में हाल ही में सामने आए समान मामले के बाद बीकानेर की यह घटना सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रसूति सेवाओं पर नए सव…

Hindustan Hindi News के अनुसार9 जून 2026 को 05:03 am बजे
कोटा के बाद बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News

कोटा के बाद बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल

कोटा मेडिकल कॉलेज में हाल ही में सामने आए समान मामले के बाद बीकानेर की यह घटना सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रसूति सेवाओं पर नए सवाल खड़े कर रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही मरीजों की हालत बिगड़ने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

राजस्थान में प्रसूताओं की सेहत को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद हुई मौतों का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में इसी तरह का चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी किडनी फेल होने की स्थिति बन गई। सभी मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस दी जा रही है, जबकि एक महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

डिलीवरी के कुछ दिन बाद बिगड़ने लगी मरीजों की हालत

जानकारी के अनुसार, करीब 10 से 15 दिन पहले पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग में इन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद शुरुआत में उनकी स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन कुछ दिनों बाद एक-एक कर सभी महिलाओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगीं। मरीजों को पेशाब रुकने, प्लेटलेट्स गिरने, संक्रमण और किडनी संबंधी जटिलताओं की शिकायत हुई। स्थिति लगातार बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन मरीजों की हालत खराब होने और परिजनों की चिंता बढ़ने के बाद पूरा मामला सामने आया।

एक मरीज वेंटिलेटर पर, सभी की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच

अस्पताल में भर्ती सभी महिलाओं की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच बताई जा रही है। फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार प्रीति को हाई ब्लड प्रेशर के कारण डिलीवरी के बाद दौरे पड़े थे। इसके साथ ही उन्हें एक्यूट किडनी इंजरी, फेफड़ों से जुड़ी समस्या, खून की कमी और हेल्प सिंड्रोम होने की आशंका भी है।

अन्य मरीजों में तारा देवी, शारदा, राहिला और इमरती शामिल हैं, जिन्हें एक्यूट किडनी इंजरी, संक्रमण, प्लेटलेट्स की कमी और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

क्या संक्रमण है वजह? जांच में जुटा अस्पताल प्रशासन

पीबीएम अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. संतोष खजोतिया ने बताया कि किडनी फेल होने के पीछे केवल संक्रमण ही कारण नहीं हो सकता। अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य चिकित्सीय जटिलताएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट कारणों का पता चल सकेगा।

वहीं एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी के कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने यह भी माना कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में जल्द ही अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगाने की तैयारी की जा रही है, जो मात्र 90 सेकेंड में संक्रमण की पहचान कर सकेगी।

कोटा कांड के बाद फिर उठे सवाल

गौरतलब है कि इससे पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया था कि महिलाओं को रक्तस्राव रोकने के लिए दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में आवश्यक घटक मौजूद नहीं थे। मामले की जांच एम्स दिल्ली को सौंपी गई थी और बाद में संबंधित दवा निर्माता कंपनी का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया था।

अब बीकानेर में सामने आए इस नए मामले ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और मरीज सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। फिलहाल सभी मरीजों का इलाज जारी है और स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला संक्रमण, चिकित्सीय जटिलता या किसी अन्य लापरवाही का परिणाम है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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