राजस्थान के 500 साल पुराने बुटाटी धाम में 22 करोड़ का घोटाला, जांच रिपोर्ट में खुलासा
बुटाटी धाम से 500 साल के इतिहास में 22 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। जांच रिपोर्ट में घोटाले के दुर्भर प्रमाण मिले हैं, जिसमें सोना-चांदी के लेखांकन में गड़बड़ी के साथ भोजनशाला निर्माण और किराया आय-खर्च में गबन का आरोप लगाया गया है। इस प्रकरण में मंदिर समिति ने किसी भी गड़बड़ी से इंकार किया है।

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान के 500 साल पुराने बुटाटी धाम में करोड़ों के घोटाले का दावा, जांच में क्या मिला?
Scam in 500 year old Butati Dham: पहले अयोध्या के श्री राम मंदिर से चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। फिर उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से। अब राजस्थान के बुटाटी धाम से करोड़ों के गबन की कहानी सामने आ रही है। दरअसल, डीएम के आदेश से बनी जांच कमेटी में 22 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।
Scam in 500 year old Butati Dham: क्या देश के मंदिर सुरक्षित नहीं रह गए हैं? पहले अयोध्या के श्री राम मंदिर से चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। इसके बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से भी चोरी की बात सामने आई। अब राजस्थान के बुटाटी धाम से करोड़ों के गबन की कहानी सामने आ रही है। दरअसल, डीएम के आदेश से बनी जांच कमेटी में 22 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। मंदिर में आए चढ़ावा और सोना-चांदी के रिकॉर्ड गायब पाए गए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
जानिए मंदिर में किस तरह की गड़बड़ियां सामने आई?
मामला नागौर के बुटाटी स्थित करीब 500 साल पुराने संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर से जुड़ा है। जिला कलेक्टर के आदेश पर बनी जांच कमेटी को मंदिर समिति के वित्तीय कामकाज में गड़बड़ी मिली है। जांच कमेटी ने मंदिर समिति के अकाउंटस, बैंक लेनदेन, वाउचर और अन्य डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी है।
रिपोर्ट में सोना-चांदी के लेखांकन से लेकर भोजनशाला निर्माण, किराया आय-खर्च आदि में गबन और फंड का दुरुपयोग माना है। कमेटी ने करीब 22 करोड़ के घोटाले का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, मंदिर समिति ने किसी भी गड़बड़ी से इंकार किया है।
कमेटी रिपोर्ट में सामने आईं गड़बड़ियों के कुछ उदाहरण
- 2.60 करोड़ के जेवर का रिकॉर्ड नहीं
- दानपेटी की आय में प्रमाणित कमी (प्रशासनिक बेंचमार्क एवं दर्ज आय में अंतर) 6,40,00,000 रुपये
- 2219 गायब रसीद बुकों के जरिए नकद गबन- 40,00,000 रुपये
- रसोई व्यय में बिना प्रमाणित रिकॉर्ड के भारी वृद्धि- 1,17,63,933 रुपये
- बिना माप पुस्तिका और निविदा के फर्जी मरम्मत व निर्माण व्यय- 9748119 रुपये
146 दिन की रिपोर्ट में सामने आया 22 करोड़ का गबन
मंदिर में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आने के बाद गठित की गई कमेटी ने 146 दिन तक पड़ताल की। इसके बाद 23 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ का प्रमाणित गबन सामने आया है। वहीं 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल को उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिकूल अनुमान पर 7.58 करोड़ का गबन जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ की कथित गबन का आकलन किया गया है।
500 साल पुराने धाम की कहानी
संत श्री चतुरदासजी महाराज के नाम से बने इस मंदिर को करीब 500 साल पहले संत चतुरदास जी महाराज ने धाम के रूप में स्थापित किया था। ऐसी मान्यता है कि उनके पास लकवा रोगियों को ठीक करने की दिव्य शक्ति थी। आज मरीज सात दिन तक सुबह-शाम समाधि की परिक्रमा करते हैं और यहां होने वाली आरती में शामिल होते हैं। लोगों में ऐसी आस्था है कि यहां मिलने वाली भभूत को शरीर पर मलने से रोग का निदान होता है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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