जोधपुर व आसपास के जिलों में 50 हजार लोगों पर सर्वे से तलाशेंगे माइसेटोमा बीमारी का फैलाव - Jodhpur News
- Hindi News - Local - Rajasthan - Jodhpur - A Survey Of 50,000 People In Jodhpur And Surrounding Districts Will Be Conducted To Find Out The Spread Of Mycetoma Disease. जोधपुर व आसपास के जिलों में 50 हजार लोगों पर सर्वे…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Rajasthan
- Jodhpur
- A Survey Of 50,000 People In Jodhpur And Surrounding Districts Will Be Conducted To Find Out The Spread Of Mycetoma Disease.
जोधपुर व आसपास के जिलों में 50 हजार लोगों पर सर्वे से तलाशेंगे माइसेटोमा बीमारी का फैलाव
- कॉपी लिंक
मारवाड़ के रेगिस्तानी इलाकों में गंभीर परेशानी बन रही माइसेटोमा बीमारी का फैलाव अब बड़े स्तर पर खंगाला जाएगा। जोधपुर के ओसियां, शेरगढ़ और बाड़मेर के पचपदरा, सिवाना सहित कई इलाकों में 50 हजार लोगों पर सर्वे होगा। इसमें बीमारी की स्थिति, प्रसार और प्रभावित लोगों की पहचान की जाएगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से जुड़ी संस्था ड्रग्स फॉर नेग्लेक्टेड डिजीजेज इनिशिएटिव (डीएनडीआई) के सहयोग से होने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में स्वास्थ्य विभाग और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की अहम भूमिका रहेगी। भारत में जोधपुर को रिसर्च के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया गया है। केन्या और पश्चिम अफ्रीका के सेनेगल में भी परियोजना के तहत काम होगा।
जोधपुर में हर साल करीब 20 मरीज माइसेटोमा के गंभीर रूप में अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें करीब चार मरीजों की स्थिति पैर काटने तक पहुंच जाती है। वर्तमान में भी बीमारी के दो गंभीर मरीज भर्ती हैं। लंबे समय तक उपचार के साथ गंभीर संक्रमण में संक्रमित ऊतकों को सर्जरी से हटाना जरूरी हो जाता है।
डॉ. कच्छवाह होंगे नोडल अधिकारी
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के चर्म एवं रति रोग विभाग के सीनियर प्रोफेसर और पूर्व प्राचार्य डॉ. दिलीप कच्छवाह सर्वे के नोडल अधिकारी होंगे। सर्वे से बीमारी की वास्तविक स्थिति, प्रभावित लोगों की संख्या और प्रसार से जुड़े पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी। शुष्क क्षेत्रों में सामने आने वाली इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने पर संक्रमण गंभीर हो सकता है।
डॉ. कच्छवाह के अनुसार माइसेटोमा दो प्रकार का होता है- बैक्टीरियल और फंगल। फंगल संक्रमण मिट्टी, पेड़-पौधों और कांटों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। खेतों में नंगे पैर चलने या कांटा चुभने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। त्वचा पर गांठ, सूजन या लंबे समय से बना घाव दिखे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
छोटी गांठ से शुरू होकर हड्डियों तक पहुंचता है संक्रमण
माइसेटोमा की शुरुआत त्वचा पर छोटी फुंसी या गांठ से होती है। धीरे-धीरे संक्रमण त्वचा के नीचे के ऊतकों और हड्डियों तक पहुंच सकता है। गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है। बीमारी लंबे समय तक बनी रहने और संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ने से उपचार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान: उदयपुर में स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, तीन बच्चे घायल; जर्जर भवन पर लगा ताला

जोधपुर शहर में कल साढ़े 4 घंटे बिजली बंद: सुबह 8 बजे से शुरू होगी कटौती; जानें कौनसे इलाके होंगे प्रभावित - Jodhpur News

RBSE: अब साल में 2 बार होगी राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा! फरवरी-मार्च में होंगे पहले मेन एग्जाम


