एक परिवार ऐसा भी: राजस्थान के भीलवाड़ा में पंचायत चुनाव में उतरेगी चौथी पीढ़ी
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की रायपुर पंचायत समिति में 'पंडा परिवार' के नाम से मशहूर त्रिवेदी परिवार का 4 पीढ़ियों से दबदबा है। वर्ष 1955 में सरपंच पद से शुरू हुआ यह सफर प्रधान, उप-प्रधान से लेकर विधायक तक पहुँचा। अब परिवा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की रायपुर पंचायत समिति में 'पंडा परिवार' के नाम से मशहूर त्रिवेदी परिवार का 4 पीढ़ियों से दबदबा है। वर्ष 1955 में सरपंच पद से शुरू हुआ यह सफर प्रधान, उप-प्रधान से लेकर विधायक तक पहुँचा। अब परिवार की चौथी पीढ़ी रणदीप त्रिवेदी मैदान में उतरने की तैयारी में है।
भीलवाड़ा: राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बज उठा है। हम राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की रायपुर पंचायत समिति के त्रिवेदी परिवार की एक-दो नहीं, चार पीढ़ियों प्रधान, उप-प्रधान, सरपंच और विधायक का सफर आपको बता रहे हैं। वैसे तो रायपुर के प्रमुख चारभुजा मंदिर के पुजारी होने के कारण यह पंडा परिवार कहलाता है, मगर राजनीति में भी इनकी दखलअंदाजी कोई कम नहीं रही। ये परिवार राजनीतिक विरासत संभाले हुए है। एक बार फिर साल 2026 के चुनावी मैदान में है।
जानिए कैसे शुरू हुई इस परिवार की राजनीति
शुरुआत नंदकिशोर त्रिवेदी ने रायपुर ग्राम पंचायत के 25 साल तक, साल 1955 से 1980 तक सरपंच रहकर लंबी पारी खेलते हुए की थी। अपने पिता नंदकिशोर की राह पर चलते हुए इनके बड़े बेटे भंवरलाल त्रिवेदी रायपुर पंचायत समिति के 1963 से 1965 तक प्रधान रहे। 1965 में इनकी चुनाव प्रचार के दौरान एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। बड़े भाई भंवरलाल त्रिवेदी की राजनीतिक विरासत संभाली उनके छोटे भाई श्यामलाल त्रिवेदी ने, जो साल 1981 से 1986 तक रायपुर पंचायत समिति के प्रधान रहे।
कैलाश त्रिवेदी की 2020 में कोरोना में हो गई थी मौत
अपने पिता और चाचा की राजनीतिक विरासत भंवरलाल त्रिवेदी के बड़े बेटे कैलाश त्रिवेदी ने संभालते हुए साल 1988 से 91 तक रायपुर पंचायत समिति के प्रधान के रूप में पंचायती राज में अपनी शिरकत की। राजनीति में कैलाश त्रिवेदी अपने दादा, चाचा और पिताजी की तरह प्रधान तक ही नहीं रुके, बल्कि यह तीन बार सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र से साल 2003, 2008 और 2018 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। साल 2020 में कोरोना से उनकी मृत्यु हो गई।
कैलाश त्रिवेदी की राजनीतिक विरासत
विधायक कैलाश त्रिवेदी की राजनीतिक विरासत पहले इनकी मां कमला देवी ने साल 1981 से 1985 तक रायपुर पंचायत समिति की उप-प्रधान बनने के साथ संभाली। इसके बाद उनकी पत्नी गायत्री देवी त्रिवेदी पहले साल 2000 से 2005 तक रायपुर पंचायत समिति की प्रधान रहीं और अपने पति कैलाश त्रिवेदी के निधन के बाद सहाड़ा विधानसभा उपचुनाव में साल 2021 से 2023 तक विधायक भी चुनी गईं।
प्रपौत्र रणदीप लड़ेंगे रायपुर पंचायत का चुनाव
भंवरलाल त्रिवेदी के बेटे और कैलाश त्रिवेदी के छोटे भाई राजेंद्र त्रिवेदी भी रायपुर पंचायत समिति के साल 2010 से 15 तक उप-प्रधान चुने गए और 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से अपना भाग्य आजमाया, मगर वे भाजपा के लादू लाल पितलिया से चुनाव हार गए। त्रिवेदी परिवार का पंचायती राज चुनाव का तीन पीढ़ियों का राजनीतिक सफर यहीं खत्म नहीं होता है। अब नंदकिशोर त्रिवेदी के प्रपौत्र यानी चौथी पीढ़ी के रणदीप त्रिवेदी रायपुर पंचायत समिति से पंचायत समिति मेंबर बन प्रधान बनने के लिए चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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