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एमपी सहित 4 राज्यों का दशकों पुराना नर्मदा विवाद सुलझा: अमित शाह बोले: पानी कहीं भी बहे, फायदा देश के किसान को ही होगा - Bhopal News

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Dainik Bhaskar के अनुसार8 जुलाई 2026 को 04:26 am बजे
एमपी सहित 4 राज्यों का दशकों पुराना नर्मदा विवाद सुलझा:  अमित शाह बोले: पानी कहीं भी बहे, फायदा देश के किसान को ही होगा - Bhopal News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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एमपी सहित 4 राज्यों का दशकों पुराना नर्मदा विवाद सुलझा:अमित शाह बोले: पानी कहीं भी बहे, फायदा देश के किसान को ही होगा

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सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण लागत और नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े भुगतान को लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया।

मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के साथ परियोजना से जुड़े लंबित वित्तीय दावों का अंतिम निपटारा हो गया। अमित शाह ने इसे सहकारी संघवाद का बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि पानी देश के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल हो, उसका लाभ आखिरकार भारत के किसान और नागरिक को ही मिलता है।

दशकों पुराने वित्तीय विवाद का हुआ अंतिम निपटारा

समझौता नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (नर्मदा अवॉर्ड) के तहत सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत में चारों राज्यों की हिस्सेदारी और लंबित भुगतान से जुड़ा था। परियोजना की लागत साझेदारी और देयों को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था।

अब चारों राज्यों ने एकमुश्त भुगतान (वन-टाइम सेटलमेंट) के जरिए सभी लंबित दावों और देयों का अंतिम निपटारा करने पर सहमति जताई है। इससे परियोजना से जुड़े वित्तीय विवादों का स्थायी समाधान माना जा रहा है।

नई दिल्ली में चारों मुख्यमंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ केंद्र और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अमित शाह बोले- सहकारी संघवाद से सुलझ रहे पुराने विवाद

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने के बाद राज्यों के बीच समन्वय बढ़ा है, जिससे वर्षों से लंबित कई विवाद तेजी से सुलझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता भी उसी सोच का परिणाम है।

'पानी कहीं भी जाए, फायदा देश के किसान को होगा'

अमित शाह ने कहा कि पानी का उपयोग चाहे गुजरात में हो, मध्य प्रदेश में, राजस्थान में या महाराष्ट्र में, उससे लाभान्वित होने वाला एक भारतीय ही होगा। उनका कहना था कि जल संसाधनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपदा के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है तो उसका लाभ दूसरे राज्यों को भी मिलता है।

सरदार सरोवर परियोजना से बदली कई इलाकों की तस्वीर

गृह मंत्री ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को मिला है। परियोजना पूरी होने के बाद इन राज्यों में सिंचाई, पेयजल और बिजली की उपलब्धता बढ़ी है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां-जहां नर्मदा का पानी पहुंचा, वहां खेती और जमीन दोनों की तस्वीर बदल गई और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

अन्य जल विवादों के समाधान का भी किया जिक्र

अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के बीच जल विवादों का समाधान प्राथमिकता से कर रही है। उन्होंने हाल में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद के समाधान और किशाऊ बांध परियोजना पर बनी सहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी सहकारी संघवाद के सफल उदाहरण हैं। उनका कहना था कि किसी भी अंतरराज्यीय विवाद से देश का नुकसान होता है, इसलिए ऐसे मामलों का समयबद्ध समाधान जरूरी है।

एमपी को चाहिए थे 7669 करोड़ रुपए अब उल्टे 550 करोड़ देने होंगे भले ही दिल्ली में चारों राज्यों के सीएम के बीच समझौता हो गया हो लेकिन इसमें मप्र को आर्थिक नुकसान होगा। सरदार सरोवर डैम के मुआवजे के तौर पर मप्र की डिमांड 7669 करोड़ की डिमांड थी। अब हुए समझौते में मप्र की सरकार को गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपए देने होंगे।

एमपी को चाहिए थे 7669 करोड़ रुपए अब उल्टे 550 करोड़ देने होंगे भले ही दिल्ली में सरदार सरोवर डैम के मुआवजे के तौर पर मप्र की डिमांड 7669 करोड़ की डिमांड थी। अब हुए समझौते में मप्र की सरकार को गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपए देने होंगे।

डेम की ऊंचाई 58 मीटर बढ़ने से बदले हालात 2002 में मप्र के 178 गांव (15,625.6 हेक्टेयर) सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में थे। 2019 में बांध पहली बार पूरी क्षमता से भरने पर वास्तविक स्थिति सामने आई। अब 192 गांवों की 20,822 हेक्टेयर भूमि डूब में है। बांध की ऊंचाई बढ़ने से मध्यप्रदेश की करीब 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन हमेशा के लिए जलमग्न हो गई। यह था विवाद: सरदार सरोवर विवाद की मुख्य वजह मुआवजे की गणना है। मप्र ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून व 2019-20 के बाजार भाव के आधार पर 7,669 करोड़ रुपए का संशोधित दावा किया है। वहीं गुजरात 2001 की दरों के अनुसार 281 करोड़ रुपए देने पर अड़ा रहा। दूसरी ओर गुजरात ने बांध निर्माण व रखरखाव लागत का हिस्सा बताते हुए मप्र पर 5,516.50 करोड़ रुपए की देनदारी का दावा भी किया, जिसे मप्र ने खारिज कर दिया था।

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