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बच्चों की तस्वीरों में झलका जयपुर का इतिहास,संस्कृति और विरासत: दीया कुमारी बोलीं-गुलाबी शहर के 300 साल का जश्न जनता का उत्सव बने - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार28 जून 2026 को 10:28 am बजे
बच्चों की तस्वीरों में झलका जयपुर का इतिहास,संस्कृति और विरासत:  दीया कुमारी बोलीं-गुलाबी शहर के 300 साल का जश्न जनता का उत्सव बने - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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बच्चों की तस्वीरों में झलका जयपुर का इतिहास,संस्कृति और विरासत:दीया कुमारी बोलीं-गुलाबी शहर के 300 साल का जश्न जनता का उत्सव बने

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जयपुर को एक नए नजरिए से देखने का अवसर रविवार को जवाहर कला केंद्र में मिला, जहां जयपुर की विरासत, संस्कृति और बदलते रंगों को पांच स्कूली विद्यार्थियों ने अपने कैमरों में अनोखे अंदाज में कैद किया। इन तस्वीरों की प्रदर्शनी में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी

गौरागिनी आर्ट्स की ओर से आयोजित एक दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी 'जयपुर हमारी नजर से' का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किया।

उन्होंने कहा कि जयपुर के 300 वर्ष पूरे होने का उत्सव केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर आमजन की भागीदारी वाला जनोत्सव बनना चाहिए। प्रदर्शनी में छात्रों की रचनात्मक सोच और फोटोग्राफी की खूब सराहना की गई।

प्रदर्शनी में 17 वर्षीय कृष्णप्रिया भाटिया और उनकी सहेलियों अंतरिक्षा गुप्ता, पलक अरोड़ा, परिधि गुप्ता और तन्वी शर्मा की ओर से मोबाइल कैमरे से खींचे गए करीब 120 छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। इन तस्वीरों में जयपुर की विरासत, संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास को किशोर कलाकारों की दृष्टि से बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनी में सिटी पैलेस, हवा महल, जंतर-मंतर, गढ़ गणेश मंदिर, पुरानी चौपड़, बाजारों की रौनक, मंदिरों की भव्यता के साथ-साथ स्टैच्यू सर्किल, डब्ल्यूटीपी, विधानसभा क्षेत्र और एयरपोर्ट रोड जैसे आधुनिक जयपुर की झलक भी देखने को मिली। हर तस्वीर शहर की एक अलग कहानी बयां करती नजर आई।

दो साल की मेहनत का नतीजा बनी प्रदर्शनी

प्रदर्शनी की संयोजक रागिनी ईश्वर ने बताया कि यह विचार पूरे परिवार का था। उन्होंने अपनी बेटी कृष्णप्रिया और उसके चार दोस्तों के साथ मिलकर तय किया कि वे जयपुर को अपनी नजर से लोगों के सामने पेश करेंगे।

उन्होंने बताया कि हम लगभग दो साल तक हर रविवार शहर के अलग-अलग हिस्सों में घूमने जाते थे। जब बच्चों की परीक्षाएं नहीं होती थीं, तब हम कैमरा नहीं, बल्कि मोबाइल लेकर निकल पड़ते थे। कभी सिटी पैलेस, कभी हवा महल, कभी गढ़ गणेश मंदिर तो कभी पुराने बाजारों में जाकर तस्वीरें लेते थे। हमने सिर्फ पुराना जयपुर ही नहीं, बल्कि नए विकसित हो रहे जयपुर को भी अपने कैमरे में कैद किया।

डिप्टी सीएम दीया कुमारी के आने की नहीं थी उम्मीद

रागिनी ने बताया कि शुरुआत में ये तस्वीरें सिर्फ बच्चों के मोबाइल में थीं। जब बच्चे नया मोबाइल लेते थे तो मजाक में कहते थे कि मैम, फोटो चाहिए तो अभी ले लीजिए, बाद में चली जाएंगी। तब उन्होंने सभी तस्वीरें संभालकर रखनी शुरू कर दीं।

उन्होंने कहा कि अप्रैल में मैंने बच्चों को सरप्राइज दिया और कहा कि जून में हम इन तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाएंगे। उस समय हमें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी इसका उद्घाटन करने आएंगी। हमने कुछ दिन पहले ही उनसे समय का अनुरोध किया था।

शनिवार तक कोई सूचना नहीं मिली थी, लेकिन शनिवार शाम को संदेश आया कि वे रविवार को आएंगी। यह हम सभी के लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण था।

जयपुर के 300वें स्थापना वर्ष को मिलकर बनाएं यादगार

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों में जयपुर को जिस नजरिए से दिखाया गया है, वह बेहद प्रेरणादायक है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष जयपुर अपनी स्थापना के 300 वर्ष पूरे कर रहा है। यह केवल सरकार का उत्सव नहीं होना चाहिए, बल्कि हर जयपुरवासी का उत्सव होना चाहिए। ऐसे आयोजन शहर को और खास बनाते हैं। सरकार अपने स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है, लेकिन आम लोगों की भागीदारी से ही यह उत्सव यादगार बनेगा।

दीया कुमारी ने स्कूली बच्चों की रचनात्मक कला को सराहा

उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में स्कूली बच्चों ने जिस तरह अपनी रचनात्मकता दिखाई है, वह सराहनीय है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अगर वे चाहें तो फोटोग्राफी और विजुअल आर्ट्स को भविष्य में अपने प्रोफेशन के रूप में भी अपना सकते हैं।

मोबाइल कैमरे से पेश की विरासत की नई तस्वीर

प्रदर्शनी की सबसे खास बात यह रही कि सभी तस्वीरें किसी महंगे कैमरे से नहीं, बल्कि साधारण मोबाइल फोन से खींची गई हैं। बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति, धैर्य और नजरिए के दम पर ऐसे फ्रेम तैयार किए, जो किसी पेशेवर फोटोग्राफर के काम से कम नहीं लगे।

आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल तस्वीरें प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति, विरासत और शहर को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करना भी है।

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