जोधपुर: 28 साल पहले घर से रूठकर निकले थे बुजुर्ग पहलवान, अस्पताल स्टाफ के प्रयास से तीन पीढ़ियों का हुआ भावुक मिलन
जोधपुर: 28 साल पहले घर से रूठकर निकले थे बुजुर्ग पहलवान, अस्पताल स्टाफ के प्रयास से तीन पीढ़ियों का हुआ भावुक मिलन 28 साल पहले घर से रूठकर निकले 70 वर्षीय मदन सिंह का एमडीएम अस्पताल स्टाफ की मदद से उनके बेटे और पोते से म…

सौजन्य से:- ETV Bharat
जोधपुर: 28 साल पहले घर से रूठकर निकले थे बुजुर्ग पहलवान, अस्पताल स्टाफ के प्रयास से तीन पीढ़ियों का हुआ भावुक मिलन
28 साल पहले घर से रूठकर निकले 70 वर्षीय मदन सिंह का एमडीएम अस्पताल स्टाफ की मदद से उनके बेटे और पोते से मिलन हुआ.
Published : June 29, 2026 at 7:40 AM IST
जोधपुर : अपनों से रूठकर दूर चले जाने वाले तो बहुत देखे होंगे, लेकिन जब करीब तीन दशक बाद कोई अपने परिवार के सामने आए, तो वह पल हर किसी की आंखें नम कर देता है. जोधपुर के मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग स्टाफ की सजगता से 28 साल पुराना एक बिछड़ा परिवार फिर से एक हो गया. इंदौर के रहने वाले 70 वर्षीय मदन सिंह, जो 1998 में घर छोड़कर चले गए थे, आखिरकार अपने बेटे और पोते से दोबारा मिल पाए.
पैरालिसिस अटैक के बाद पहुंचे अस्पताल : मूल रूप से इंदौर के मरौडिया बाजार के रहने वाले मदन सिंह को पहलवानी का शौक था. साल 1998 में करीब 42 साल की उम्र में किसी पारिवारिक नाराजगी के चलते उन्होंने घर छोड़ दिया था. इसके बाद वे कभी लौटकर वापस नहीं गए. हाल ही में उन्हें पैर में लकवा (स्ट्रोक) मार गया, जिसके बाद उन्हें पहले पाली के अस्पताल और फिर वहां से जोधपुर के एमडीएम अस्पताल रेफर किया गया.
इसे भी पढ़ें: खुदा की सबसे बड़ी ईदी: 16 साल बाद बेटों से मिली मां...अपना घर आश्रम में मिलन
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सेहत सुधरी, तो स्टाफ ने परिजनों को बुलाने का कहा. लेकिन घर वालों के बारे में सोचा तो मदन सिंह की आंखे छलक गई. वार्ड के प्रभारी नर्स अरशद कुरैशी और नर्सिंगकर्मियों ने ढाढ़स बंधाया तो मदन सिंह उन्हें बताया कि वह 1998 से घर बाहर है. स्टाफ ने पूरी जानकारी मिलने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित को अवगत करवाया. डॉ. राजपुरोहित ने बताया कि स्टाफ के प्रयास से एक परिवार मिलन संभव हो पाया.
पुत्र से संपर्क किया, पौत्र भी आया लेने तो रो पड़े : अस्पताल स्टाफ ने मदन सिंह से मिली जानकारियों के आधार पर इंदौर में उनके बेटे राजेश वर्मा से संपर्क साधा. पिता के जिंदा होने और जोधपुर में होने की खबर मिलते ही सर्राफा कारोबारी राजेश बिना वक्त गंवाए अपने बेटे के साथ जोधपुर के लिए रवाना हो गए. रविवार को जब मदन सिंह ने अपने बेटे और पोते को सामने देखा, तो उनके मुंह से शब्द नहीं निकले, बस आंसुओं का सैलाब बह निकला. बेटे राजेश ने पिता को गले लगाते हुए भावुक अंदाज में कहा, "पापा अब तो घर चलो, अब तो आपका पड़पोता भी आने वाला है." अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने स्टाफ की इस मानवीय पहल की सराहना की, वहीं बेटे राजेश ने पूरे अस्पताल प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने हमारे जीवन के 28 साल के इस फासले को चंद मिनटों में खत्म कर दिया. मदन इंदौर के बेटे ज्वैलर कारोबारी राजेश ने बताया कि परिवार ने उन्हें ढूंढ़ने के खूब प्रयास किए, लेकिन नाकाम रहे.
इसे भी पढ़ें: 12 साल बाद जिंदा मिली मां, बेटी से मिलते ही फूट पड़ा भावनाओं का सैलाब
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

न दवा खराब, न इंफेक्शन: राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर बड़ा खुलासा, सरकार की रिपोर्ट में सामने आई अलग-अलग वजह

राजस्थान रिफाइनरी: राज्य में खुलेंगे 300 नए पेट्रोल पंप एचपीसीएल करेगा 400 करोड़ रुपए का निवेश - Balotra News

राजस्थान : मतदाता से दावेदार बने बावरी समाज के राजनीतिक आत्मविश्वास की कहानी


