राजस्थान भजनलाल सरकारः गर्भवती महिलाओं को घर पर सरकारी सेवा?, हर 3 दिन के बाद एएनएम घर जाकर करेगी बीपी, हीमोग्लोबिन की जांच
राजस्थान भजनलाल सरकारः गर्भवती महिलाओं को घर पर सरकारी सेवा?, हर 3 दिन के बाद एएनएम घर जाकर करेगी बीपी, हीमोग्लोबिन की जांच By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 21, 2026 11:21 IST2026-07-21T11:20:43+5:302026-07-21T11:21…

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi
राजस्थान भजनलाल सरकारः गर्भवती महिलाओं को घर पर सरकारी सेवा?, हर 3 दिन के बाद एएनएम घर जाकर करेगी बीपी, हीमोग्लोबिन की जांच
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 21, 2026 11:21 IST2026-07-21T11:20:43+5:302026-07-21T11:21:54+5:30
Rajasthan's Bhajan Lal Government: आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर एएनएम तुरंत मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी.
जयपुर:राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामले और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भजनलाल सरकार ने उच्च जोखिम वाली महिलाओं के लिए नई स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. इस व्यवस्था के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जाएगी और उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकार का लक्ष्य मातृ मृत्यु दर में कमी लाना और गर्भवती महिलाओं का समय पर उपचार सुनिश्चित करना है. स्वास्थ्य भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, सीएमएचओ और अस्पताल अधीक्षकों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि राज्य के किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में किसी भी मरीज या गर्भवती महिला की मृत्यु चिकित्सकीय लापरवाही के कारण बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. अगर किसी भी स्तर पर मॉनिटरिंग में ढिलाई पाई गई, तो डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सीधे सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
सरकार के नए नियमों के मुताबिक, ग्रामीण और ढाणियों में रहने वाली उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अब स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की होगी. प्रदेश की प्रत्येक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिला को एक एएनएम की सीधी निगरानी में रखा जाएगा. आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर एएनएम तुरंत मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी.
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि हाई रिस्क गर्भवती महिला से जुड़ी एएनएम प्रति 3 दिन बाद अनिवार्य रूप से महिला के घर जाकर व्यक्तिगत संपर्क करेगी और उसके बीपी, हीमोग्लोबिन तथा अन्य स्वास्थ्य मानकों की जांच करेगी.
अस्पतालों से होगी डिजिटल मैपिंग
सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में स्वच्छता और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता को लेकर नए वर्किंग प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं. सभी चिन्हित हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को उनके नजदीकी अस्पताल जैसे सीएचसी , , जिला अस्पताल या सीधे मेडिकल कॉलेज से पहले ही मैप कर दिया जाएगा, ताकि प्रसव पीड़ा शुरू होते ही उन्हें रेफरल के चक्कर न काटने पड़ें.
अस्पतालों को अब प्रतिदिन अपने ओटी, आईसीयू और लेबर रूम की क्रियाशीलता, वहां इलाज पा रहे मरीजों की कुल संख्या और बेड की उपलब्धता की रिपोर्ट एक तय स्टैंडर्ड फॉर्मेट में मुख्यालय भेजनी होगी। इसके साथ ही सर्जन के सभी रिक्त पदों को तुरंत प्रभाव से भरने के निर्देश भी दिए गए हैं.
सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से गर्भवती महिलाओं को घर के सबसे बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी. इस बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, एनएचएम मिशन निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा और अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला सहित राज्य के सभी प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थित रहे.
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