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पांचना बांध से 20 साल बाद पानी छोड़ने से किसानों का जीत का पल, 74 गांवों का विवाद समाप्त

पांचना बांध से 20 साल बाद पानी छोड़ने से राजस्थान में किसानों का जीत का पल आया। पानी की हर बूंद के लिए हुए संघर्ष के बाद 74 गांवों का विवाद समाप्त हो गया है।

Live Hindustan के अनुसार7 जुलाई 2026 को 10:24 am बजे
पांचना बांध से 20 साल बाद पानी छोड़ने से किसानों का जीत का पल, 74 गांवों का विवाद समाप्त

सौजन्य से:- Live Hindustan

राजस्थान में पांचना बांध से 20 साल बाद छोड़ा गया पानी; 74 गांवों का विवाद खत्म

पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष करने वाले किसानों के लिए यह किसी जीत से कम नहीं था। पिछले 20 वर्षों से कमांड एरिया के हजारों किसान सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करते रहे।

करौली जिले में सोमवार का दिन हजारों किसानों के लिए सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि दो दशक लंबे इंतजार के खत्म होने का दिन बन गया। पांचना बांध से आखिरकार 20 साल बाद पानी छोड़ा गया। जैसे ही बांध के तीन गेट खुले और गंभीरी नदी की ओर पानी बहना शुरू हुआ, वैसे ही उन किसानों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दी, जो वर्षों से इस पल का इंतजार कर रहे थे। इसके साथ ही कैचमेंट और कमांड एरिया के 74 गांवों के बीच पानी को लेकर चला आ रहा विवाद भी समाप्त हो गया।

मंत्रियों ने खोले बांध के गेट

जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम की मौजूदगी में पांचना बांध के गेट खोले गए। इस दौरान सिर्फ नदी में ही नहीं, बल्कि बांध की नहरों और गुड़ला पांचना लिफ्ट परियोजना के जरिए भी पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। लंबे समय बाद एक साथ तीन अलग-अलग क्षेत्रों में पानी पहुंचने की शुरुआत हुई।

किसानों के संघर्ष को मिली सफलता

पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष करने वाले किसानों के लिए यह किसी जीत से कम नहीं था। पिछले 20 वर्षों से कमांड एरिया के हजारों किसान सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करते रहे। दूसरी ओर कैचमेंट एरिया के ग्रामीण भी अपनी जरूरतों को लेकर अड़े रहे। यही वजह थी कि पानी का यह विवाद वर्षों तक समाधान का इंतजार करता रहा। आखिरकार सरकार, प्रशासन और दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति ने इस लंबे विवाद का रास्ता साफ कर दिया।

जयपुर की बैठक में बनी थी सहमति

इस समाधान की नींव 30 जून को जयपुर स्थित शिक्षा संकुल में हुई बैठक में रखी गई थी। बैठक में सरकार के तीन मंत्रियों और दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों के बीच लंबी चर्चा हुई। सहमति बनने के बाद तय किया गया कि 6 जुलाई से बांध से पानी छोड़ा जाएगा। उसी फैसले को अमल में लाते हुए सोमवार को पानी की निकासी शुरू कर दी गई।

लिफ्ट परियोजनाओं का भी हुआ शिलान्यास

कार्यक्रम के दौरान दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और गुड़ला लिफ्ट परियोजना के पीडीएन सिस्टम रिमॉडलिंग का भी शिलान्यास किया गया। करीब 61 लाख रुपये की लागत से होने वाले इन कार्यों का उद्देश्य भविष्य में सिंचाई व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। पहाड़ी गांव स्थित देवनारायण मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में रिमोट के जरिए इन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया।

सायरन बजाकर किया गया अलर्ट

बांध के गेट खोलने से पहले प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डूब क्षेत्र के गांवों में सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया। इसके बाद मंत्री सुरेश रावत और जवाहर सिंह बेढम ने बटन दबाकर बांध के तीन गेट खोले। देखते ही देखते पानी गंभीरी नदी की ओर बहने लगा। वहीं चाबी से नहरों के गेट खोलकर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया और गुड़ला पांचना लिफ्ट परियोजना का संचालन भी शुरू किया गया।

पौधरोपण से दिया संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। बांध परिसर में दोनों मंत्रियों ने पौधरोपण किया और लोगों से जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लेने की अपील की।

एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध

पांचना बांध अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। करौली जिले में गंभीरी नदी पर बना यह एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह भद्रावती, बरखेड़ा, मांची, अटा और भैंसावट समेत पांच नदियों के संगम पर निर्मित है। यही वजह है कि इसका पानी करौली जिले के कृषि क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

किसानों के लिए नई उम्मीद की शुरुआत

सोमवार को आयोजित समारोह में करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम सिर्फ पानी छोड़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक बन गया कि लंबे समय से चले आ रहे जटिल विवाद भी संवाद और सहमति के जरिए सुलझाए जा सकते हैं।

अब खेतों तक पहुंचेगी राहत

दो दशक तक पानी के इंतजार में बीते संघर्ष के बाद अब किसानों की उम्मीदें फिर से हरी होने लगी हैं। खेतों तक पहुंचता यह पानी केवल फसलों की प्यास ही नहीं बुझाएगा, बल्कि उन परिवारों के भविष्य को भी नई दिशा देगा, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। पांचना बांध से निकली यह धारा अब केवल नदी में बहता पानी नहीं, बल्कि हजारों किसानों के विश्वास, संघर्ष और नई शुरुआत की कहानी बन चुकी है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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