राजस्थान में तबादलों की खुली छूट ने सरकारी कर्मचारियों को तड़पाया
राजस्थान में तबादलों की आखिरी तारीख नजदीक आते ही सरकारी कर्मचारी अपनी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए जमीन आसमान की बातें कर रहे हैं। इसके चलते विभिन्न विभागों के सवा लाख से ज्यादा तबादला आवेदन सरकार तक पहुंच चुके हैं।

सौजन्य से:- Live Hindustan
साहब माता पिता बीमार है; राजस्थान में 20 दिन में सवा लाख कर्मचारियों ने लगाई तबादले की अर्जी
तबादलों की इस दौड़ में एक और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। कर्मचारियों के आवेदन हों या नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां, अधिकांश का प्रारूप लगभग एक जैसा है। सिर्फ आवेदक का नाम, मंत्री का नाम और हस्ताक्षर बदले गए हैं।
राजस्थान में तबादलों की खुली छूट ने सरकारी दफ्तरों से ज्यादा नेताओं के घर और सचिवालय को व्यस्त कर दिया है। 10 जुलाई को ट्रांसफर की आखिरी तारीख नजदीक आते ही कर्मचारी अपनी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बीते करीब 20 दिनों में विभिन्न विभागों के सवा लाख से ज्यादा तबादला आवेदन सरकार तक पहुंच चुके हैं।
हर आवेदन में वही दर्द… मां-पिता बीमार, बच्चों की जिम्मेदारी
दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर कर्मचारियों की परेशानी भी लगभग एक जैसी है। रेंडम सर्वे में सामने आया कि करीब 90 फीसदी आवेदनों में ‘बीमार माता-पिता की देखभाल’, ‘पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी’ या ‘पारिवारिक परिस्थितियां’ को तबादले का आधार बनाया गया है। मानो पूरे प्रदेश की एक ही कहानी हो।
नाम अलग… लेकिन आवेदन का फॉर्मेट एक जैसा
तबादलों की इस दौड़ में एक और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। कर्मचारियों के आवेदन हों या नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां, अधिकांश का प्रारूप लगभग एक जैसा है। सिर्फ आवेदक का नाम, मंत्री का नाम और हस्ताक्षर बदले गए हैं। बाकी भाषा, कारण और सिफारिश का तरीका लगभग कॉपी-पेस्ट नजर आता है।
नेताओं के घर से लेकर सचिवालय तक भीड़
तबादला करवाने की उम्मीद में कर्मचारी रोजाना मंत्रियों, विधायकों, बीजेपी नेताओं और सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। नेताओं के आवासों पर सिफारिशी पत्र बनवाने वालों की भीड़ लगी हुई है, जबकि सचिवालय में भी आवेदन जमा कराने वालों की कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
मंत्रियों ने कहा- भावनाएं नहीं, नियम देखेंगे
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि लगभग हर शिक्षक माता-पिता की सेवा का हवाला देकर मनचाही जगह तबादला चाहता है, लेकिन सरकार को भावनाओं से ज्यादा नियमों के आधार पर फैसला करना पड़ता है।
वहीं डेयरी एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने भी माना कि जनसुनवाई और तबादला आवेदनों में भाषा और कारण लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी कहा कि अधिकांश अर्जियों और सिफारिशों का प्रारूप लगभग समान है और उनमें एक जैसी दलीलें दी गई हैं।
आखिरी दौड़ शुरू
10 जुलाई को तबादलों में छूट की अवधि खत्म होने वाली है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में आवेदन और सिफारिशों का दबाव और बढ़ने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि सरकार नियमों को प्राथमिकता देती है या फिर सिफारिशों का असर भी तबादला सूची में नजर आता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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