राजस्थान पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: 15 हजार से अधिक मोबाइल नंबर बंद, अश्लीलता पर हमला
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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राजस्थान पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: 15 हजार से अधिक मोबाइल नंबर बंद, अश्लीलता पर हमला
Mon, 28 Sep 2026 06:04 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 28 Sep 2026 06:04 PM IST
सार
राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 15,326 मोबाइल नंबर, 7,800 से अधिक आपत्तिजनक यूआरएल और प्रोफाइल तथा 100 डिजिटल उपकरण ब्लॉक कराए हैं। सात जिलों में मामले दर्ज किए गए हैं।
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विस्तार
राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा और राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (आर4सी) ने डिजिटल क्षेत्र में अवैध और अश्लील गतिविधियों के विरुद्ध व्यापक अभियान के तहत विभिन्न सोशल मीडिया तथा संचार माध्यमों पर सक्रिय 15,326 मोबाइल नंबरों को पूरी तरह बंद करा दिया है। साथ ही, साइबर विंग ने 7,800 से अधिक आपत्तिजनक यूआरएल तथा प्रोफाइल और 100 डिजिटल उपकरणों को भी चिह्नित करके ब्लॉक कराया है। पुलिस ने इंटरनेट पर छिपकर अश्लील सामग्री तथा बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसईएएम) का प्रसार करने वाले आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए यह कदम उठाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्शन
तकनीकी विश्लेषण और नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयडिट चिल्ड्रन्स (एनसीएमईसी) की टिपलाइन रिपोर्टों के आधार पर राजस्थान पुलिस की साइबर टीम ने डिजिटल ट्रेल की गहनता से पड़ताल की। इस जांच में सामने आया कि असामाजिक तत्व टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और वॉट्सऐप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्मों पर अवैध समूह बनाकर लोगों को आपस में जोड़ रहे थे। इन विभिन्न चैनलों और डिजिटल समूहों के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान और खरीद-फरोख्त की जा रही थी। साइबर क्राइम विंग ने तथ्य सामने आने के बाद संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों और दूरभाष सेवा प्रदाताओं से संपर्क साधा तथा आपत्तिजनक लिंक व खातों को तुरंत बंद कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी जांच टीम संदिग्ध खातों के डिजिटल पदचिह्नों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बना रही है और ऐसी गतिविधियों पर लगातार निगाह रखी जा रही है।
जिलों में दर्ज हुए मुकदमे और अंतरराज्यीय समन्वय
टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए आरोपियों की विशेष पहचान की गई है। पुलिस ने इन आदतन अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में कानूनी प्रकरण दर्ज किए हैं। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी निरंतर समन्वय स्थापित कर रही है। बाल यौन शोषण सामग्री के व्यापार और वितरण में शामिल लोगों के संबंध में डिजिटल साक्ष्य जुटाकर संबंधित राज्यों की पुलिस को भी प्रेषित किए जा रहे हैं, ताकि वहां भी आरोपियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कदम उठाए जा सकें।
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पुलिस की सख्त चेतावनी और शिकायत के माध्यम
राजस्थान पुलिस ने आम नागरिकों तथा अभिभावकों को सचेत करते हुए बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान बनाकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, सहेजना अथवा शेयर करना पूरी तरह गैर-कानूनी और असुरक्षित है। यह कृत्य पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के सुसंगत प्रावधानों के तहत कठोर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह या सामग्री की जानकारी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अतिरिक्त साइबर क्राइम शाखा (आर4सी), पुलिस मुख्यालय जयपुर के ई-मेल sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर भी तुरंत सूचना भेजी जा सकती है।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्शन
तकनीकी विश्लेषण और नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयडिट चिल्ड्रन्स (एनसीएमईसी) की टिपलाइन रिपोर्टों के आधार पर राजस्थान पुलिस की साइबर टीम ने डिजिटल ट्रेल की गहनता से पड़ताल की। इस जांच में सामने आया कि असामाजिक तत्व टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और वॉट्सऐप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्मों पर अवैध समूह बनाकर लोगों को आपस में जोड़ रहे थे। इन विभिन्न चैनलों और डिजिटल समूहों के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान और खरीद-फरोख्त की जा रही थी। साइबर क्राइम विंग ने तथ्य सामने आने के बाद संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों और दूरभाष सेवा प्रदाताओं से संपर्क साधा तथा आपत्तिजनक लिंक व खातों को तुरंत बंद कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी जांच टीम संदिग्ध खातों के डिजिटल पदचिह्नों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बना रही है और ऐसी गतिविधियों पर लगातार निगाह रखी जा रही है।
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जिलों में दर्ज हुए मुकदमे और अंतरराज्यीय समन्वय
टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए आरोपियों की विशेष पहचान की गई है। पुलिस ने इन आदतन अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में कानूनी प्रकरण दर्ज किए हैं। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ भी निरंतर समन्वय स्थापित कर रही है। बाल यौन शोषण सामग्री के व्यापार और वितरण में शामिल लोगों के संबंध में डिजिटल साक्ष्य जुटाकर संबंधित राज्यों की पुलिस को भी प्रेषित किए जा रहे हैं, ताकि वहां भी आरोपियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कदम उठाए जा सकें।
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पुलिस की सख्त चेतावनी और शिकायत के माध्यम
राजस्थान पुलिस ने आम नागरिकों तथा अभिभावकों को सचेत करते हुए बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इंटरनेट पर गुमनाम पहचान बनाकर बाल यौन शोषण सामग्री देखना, डाउनलोड करना, सहेजना अथवा शेयर करना पूरी तरह गैर-कानूनी और असुरक्षित है। यह कृत्य पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के सुसंगत प्रावधानों के तहत कठोर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, समूह या सामग्री की जानकारी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अतिरिक्त साइबर क्राइम शाखा (आर4सी), पुलिस मुख्यालय जयपुर के ई-मेल sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर भी तुरंत सूचना भेजी जा सकती है।
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